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Thalassemia Support Kit

Thalassemia Support Kit

Regular price Rs. 3,850.00 INR
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Support thalassemia naturally with our ayurvedic support kit. Our specialised herbal formulation is designed to assist in managing thalassemia, promoting healthy blood production and overall well-being.

 

THALASSEMIA SUPPORT KIT

थैलेसीमिया सपोर्ट किट 

Causes

Genetic blood disorder affecting hemoglobin production
Chronic anemia and weak oxygen supply
Repeated blood transfusions causing toxin overload
Weak immunity and poor digestion (Ayurvedic view)

Solution : Jain’s Cow Urine Therapy supports the body’s natural healing in thalassemia control by:

Traditionally supports blood purification (Rakta Shuddhi)
Helps strengthen immunity and vitality
Supports detoxification, especially liver function
Helps in digestion and nutrient absorption
Helps improve energy, stamina, and overall wellbeing

संक्षिप्त परिचय

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक (genetic) रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हिमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण अनीमिया (रक्त की कमी) हो जाती है। यह बीमारी माता–पिता से जीन के माध्यम से बच्चे में आती है, इसलिए इसे जन्मजात रक्त रोग कहा जाता है। गंभीर स्थिति में बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता पड़ती है।

प्रकार

थैलेसीमिया माइनर (Carrier)
– व्यक्ति को कोई खास समस्या नहीं रहती।
– हिमोग्लोबिन थोड़ा कम हो सकता है।
थैलेसीमिया इंटरमीडिएट
– मध्यम स्तर का अनीमिया।
– कभी-कभी ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत।
थैलेसीमिया मेजर
– गंभीर रूप।
– बचपन से ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता।
– दवाइयों से आयरन ओवरलोड को नियंत्रित करना पड़ता है।

लक्षण

लगातार थकान, कमजोरी
त्वचा का पीला या हल्का नीला रंग
भूख कम होना
बच्चों में वृद्धि या वजन धीमा होना
पीलिया
पेट व लीवर/तिल्ली (spleen) का बढ़ना
सांस फूलना
दिल की धड़कन तेज

कारण

यह पूरी तरह आनुवंशिक बीमारी है।
माता या पिता में थैलेसीमिया जीन (carrier) होने पर संभावना बढ़ जाती है।
दोनों माता-पिता carrier हों तो बच्चे में 25% संभावना थैलेसीमिया मेजर की होती है।

बचाव

शादी से पहले थैलेसीमिया परीक्षण (Hb Electrophoresis) करवाना।
दोनों पार्टनर carrier हों तो genetic counselling आवश्यक।
प्रेग्नेंसी में Prenatal Test (CVS/Amniocentesis) से बच्चे की जांच।
नोट: थैलेसीमिया होने के बाद इसे रोका नहीं जा सकता, सिर्फ मैनेजमेंट होता है।

डाइट चार्ट

थैलेसीमिया में आयरन ओवरलोड होने की संभावना रहती है, इसलिए डाइट में आयरन नियंत्रित करना जरूरी है।

क्या खाएँ

ताज़े फल — सेब, अमरूद, पपीता, तरबूज
हरी सब्ज़ियाँ (कम आयरन वाली) जैसे लौकी, तोरई, परवल
दही, छाछ, दूध
विटामिन-C प्राकृतिक स्रोत — नींबू, संतरा, आँवला
प्रोटीन बढ़ाएँ — मूंग दाल, पनीर, दही, सोया
एंटीऑक्सीडेंट खाद्य — हल्दी, अदरक, तुलसी, गिलोय
खूब पानी, नारियल पानी

क्या कम करें/बचें

बहुत आयरन वाले खाद्य — गुड़, चुकंदर, पालक, मेथी, बीन्स
रेड मीट
आयरन सप्लीमेंट बिना डॉक्टर सलाह
ओवरफोर्टिफाइड cereals
तले-भुने, बहुत मसालेदार भोजन

अपथ्य (जिससे बचना चाहिए)

तनाव, देर रात जागना
शराब, धूम्रपान
अत्यधिक चाय–कॉफी
भारी व्यायाम जो थकावट बढ़ाए
केमिकल प्रिज़र्वेटिव वाले फूड्स
बिना सलाह आयरन की दवाएँ

योगासन

हल्के, ऊर्जा बढ़ाने वाले आसन बेहतर रहते हैं:

प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, दीर्घ श्वास
ताड़ासन
त्रिकोणासन
भुजंगासन
जानुशिर्षासन
शशांकासन
शवासन (आराम देने हेतु)
ध्यान: बहुत थकाने वाले व्यायाम न करें।

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद थैलेसीमिया को आनुवंशिक रोग मानता है, इसलिए पूरा उपचार संभव नहीं, लेकिन लक्षणों को बहुत हद तक कम कर सकता है:

रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाते हैं
शरीर को पोषण
कमजोरी कम
ऊर्जा व पाचन सुधार
मेटाबॉलिज़्म बेहतर करने में सहायक
बालकों में विकास व ताकत बढ़ाने में सहायक
रक्त शुद्धि में उपयोगी

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गोखरू, आंवला, अश्वगंधा, गिलोय, पुनर्नवा, अर्जुन, नीम, शतावरी, रस्ना, अडूसा, कुटकी, भूमी आंवला, गोजला,शुद्ध चुना, हड़जोड़, अर्जुन, मुलेठी, शतावरी, एसई हल्दी  , गिलोय,  आंवला, लाक्षा गुग्गुल, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा,जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक रेडॉक्सिल सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक हेपोरिल, बोनक्योर सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ओमनीफोर्ट कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें। 

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

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प्रतिबंधित आहार - तला हुआ भोजन, अधिक नमक

अनुशंसित आहार: अंजीर, अनार, हनीड्यू-तरबूज, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा फ़िल्टर किया हुआ गोमूत्र सुबह और शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


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Support thalassemia naturally with our ayurvedic support kit. Our specialised herbal formulation is designed to assist in managing thalassemia, promoting healthy blood production and overall well-being.

 

THALASSEMIA SUPPORT KIT

थैलेसीमिया सपोर्ट किट 

Causes

Genetic blood disorder affecting hemoglobin production
Chronic anemia and weak oxygen supply
Repeated blood transfusions causing toxin overload
Weak immunity and poor digestion (Ayurvedic view)

Solution : Jain’s Cow Urine Therapy supports the body’s natural healing in thalassemia control by:

Traditionally supports blood purification (Rakta Shuddhi)
Helps strengthen immunity and vitality
Supports detoxification, especially liver function
Helps in digestion and nutrient absorption
Helps improve energy, stamina, and overall wellbeing

संक्षिप्त परिचय

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक (genetic) रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हिमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण अनीमिया (रक्त की कमी) हो जाती है। यह बीमारी माता–पिता से जीन के माध्यम से बच्चे में आती है, इसलिए इसे जन्मजात रक्त रोग कहा जाता है। गंभीर स्थिति में बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता पड़ती है।

प्रकार

थैलेसीमिया माइनर (Carrier)
– व्यक्ति को कोई खास समस्या नहीं रहती।
– हिमोग्लोबिन थोड़ा कम हो सकता है।
थैलेसीमिया इंटरमीडिएट
– मध्यम स्तर का अनीमिया।
– कभी-कभी ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत।
थैलेसीमिया मेजर
– गंभीर रूप।
– बचपन से ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता।
– दवाइयों से आयरन ओवरलोड को नियंत्रित करना पड़ता है।

लक्षण

लगातार थकान, कमजोरी
त्वचा का पीला या हल्का नीला रंग
भूख कम होना
बच्चों में वृद्धि या वजन धीमा होना
पीलिया
पेट व लीवर/तिल्ली (spleen) का बढ़ना
सांस फूलना
दिल की धड़कन तेज

कारण

यह पूरी तरह आनुवंशिक बीमारी है।
माता या पिता में थैलेसीमिया जीन (carrier) होने पर संभावना बढ़ जाती है।
दोनों माता-पिता carrier हों तो बच्चे में 25% संभावना थैलेसीमिया मेजर की होती है।

बचाव

शादी से पहले थैलेसीमिया परीक्षण (Hb Electrophoresis) करवाना।
दोनों पार्टनर carrier हों तो genetic counselling आवश्यक।
प्रेग्नेंसी में Prenatal Test (CVS/Amniocentesis) से बच्चे की जांच।
नोट: थैलेसीमिया होने के बाद इसे रोका नहीं जा सकता, सिर्फ मैनेजमेंट होता है।

डाइट चार्ट

थैलेसीमिया में आयरन ओवरलोड होने की संभावना रहती है, इसलिए डाइट में आयरन नियंत्रित करना जरूरी है।

क्या खाएँ

ताज़े फल — सेब, अमरूद, पपीता, तरबूज
हरी सब्ज़ियाँ (कम आयरन वाली) जैसे लौकी, तोरई, परवल
दही, छाछ, दूध
विटामिन-C प्राकृतिक स्रोत — नींबू, संतरा, आँवला
प्रोटीन बढ़ाएँ — मूंग दाल, पनीर, दही, सोया
एंटीऑक्सीडेंट खाद्य — हल्दी, अदरक, तुलसी, गिलोय
खूब पानी, नारियल पानी

क्या कम करें/बचें

बहुत आयरन वाले खाद्य — गुड़, चुकंदर, पालक, मेथी, बीन्स
रेड मीट
आयरन सप्लीमेंट बिना डॉक्टर सलाह
ओवरफोर्टिफाइड cereals
तले-भुने, बहुत मसालेदार भोजन

अपथ्य (जिससे बचना चाहिए)

तनाव, देर रात जागना
शराब, धूम्रपान
अत्यधिक चाय–कॉफी
भारी व्यायाम जो थकावट बढ़ाए
केमिकल प्रिज़र्वेटिव वाले फूड्स
बिना सलाह आयरन की दवाएँ

योगासन

हल्के, ऊर्जा बढ़ाने वाले आसन बेहतर रहते हैं:

प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, दीर्घ श्वास
ताड़ासन
त्रिकोणासन
भुजंगासन
जानुशिर्षासन
शशांकासन
शवासन (आराम देने हेतु)
ध्यान: बहुत थकाने वाले व्यायाम न करें।

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद थैलेसीमिया को आनुवंशिक रोग मानता है, इसलिए पूरा उपचार संभव नहीं, लेकिन लक्षणों को बहुत हद तक कम कर सकता है:

रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाते हैं
शरीर को पोषण
कमजोरी कम
ऊर्जा व पाचन सुधार
मेटाबॉलिज़्म बेहतर करने में सहायक
बालकों में विकास व ताकत बढ़ाने में सहायक
रक्त शुद्धि में उपयोगी

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गोखरू, आंवला, अश्वगंधा, गिलोय, पुनर्नवा, अर्जुन, नीम, शतावरी, रस्ना, अडूसा, कुटकी, भूमी आंवला, गोजला,शुद्ध चुना, हड़जोड़, अर्जुन, मुलेठी, शतावरी, एसई हल्दी  , गिलोय,  आंवला, लाक्षा गुग्गुल, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा,जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक रेडॉक्सिल सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक हेपोरिल, बोनक्योर सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ओमनीफोर्ट कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें। 

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

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प्रतिबंधित आहार - तला हुआ भोजन, अधिक नमक

अनुशंसित आहार: अंजीर, अनार, हनीड्यू-तरबूज, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा फ़िल्टर किया हुआ गोमूत्र सुबह और शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


  • REDOXYL + SYP
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