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ALCOHOLIC LIVER DISEASE - SUPPORT KIT

ALCOHOLIC LIVER DISEASE - SUPPORT KIT

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ALCOHOLIC LIVER DISEASE - SUPPORT KIT 

अल्कोहॉलिक लिवर रोग - सपोर्ट किट 

🩺 1. परिचय (Introduction)

Alcoholic Liver Disease (ALD) वह स्थिति है जिसमें लंबे समय तक शराब के सेवन से लीवर को नुकसान पहुँचता है। लीवर लगातार अल्कोहल को डिटॉक्स करने में काम करता है। जब मात्रा ज़्यादा और समय लंबा होता है, तो लीवर की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं और सूजन, फैट जमना, और अंततः सिरोसिस जैसी गंभीर अवस्थाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

🧪 2. प्रकार (Types)

Alcoholic Fatty Liver (स्टिएटोसिस) – शुरुआती अवस्था; शराब के कारण लीवर में फैट जमा हो जाता है। अक्सर कोई लक्षण नहीं होते और शराब बंद करने से उलटा हो सकता है।
Alcoholic Hepatitis – मध्यम अवस्था; लीवर में सूजन और क्षति होती है। इसमें बुखार, पीलिया और पेट दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह जानलेवा भी बन सकता है।
Alcoholic Cirrhosis – अंतिम और गंभीर अवस्था; लीवर की कोशिकाएँ स्थायी रूप से नष्ट होकर फाइब्रोसिस और स्कार टिश्यू बनाते हैं। यह अवस्था स्थायी है और केवल नियंत्रित की जा सकती है।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

थकान और कमजोरी
भूख में कमी और वजन घटना
मतली और उल्टी
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
त्वचा और आँखों में पीलापन (जॉन्डिस)
पेट और पैरों में सूजन (fluid retention)
हाथों में कंपकंपी
मानसिक भ्रम या नींद में गड़बड़ी (गंभीर अवस्था में)
आसानी से चोट या खून आना (advanced stage)

🦠 4. कारण (Causes)

लंबे समय तक और नियमित रूप से शराब का सेवन
एक ही बार में बहुत अधिक मात्रा में शराब पीना (binge drinking)
पोषण की कमी और असंतुलित आहार
आनुवंशिक प्रवृत्ति (कुछ लोगों में अल्कोहल का असर अधिक)
वायरल हेपेटाइटिस जैसे अन्य लीवर संक्रमण के साथ शराब का सेवन
महिलाओं में समान मात्रा में शराब भी लीवर को ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

शराब का सेवन पूरी तरह बंद करना सबसे प्रभावी उपाय है
संतुलित और पोषक आहार लेना
दूषित भोजन-पानी से बचाव कर अन्य लीवर संक्रमणों से बचना
नियमित स्वास्थ्य जांच और लीवर फंक्शन टेस्ट कराना
किसी भी दवा का उपयोग लीवर पर प्रभाव को ध्यान में रखकर करना
मानसिक तनाव और नशे की आदतों से छुटकारा पाने के लिए मनोवैज्ञानिक या चिकित्सकीय सहायता लेना

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

गुनगुना पानी और नारियल पानी
हल्का, सुपाच्य और कम तेल-मसाले वाला भोजन
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसमी फल (विशेषकर पपीता, सेब, अनार)
मूंग की दाल, दलिया, खिचड़ी, सूप
नींबू पानी, छाछ, हर्बल टी (बिना चीनी)
हल्दी, अदरक, लहसुन जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
गाय का स्वर्णिम A2 घी (बहुत सीमित मात्रा में)

❌ निषेध (Apthya)

शराब और सभी नशीले पदार्थ
तला-भुना, भारी और मसालेदार भोजन
रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड
शीतल पेय, आइसक्रीम और अत्यधिक चीनी वाले पदार्थ
मैदा और परिष्कृत खाद्य पदार्थ
अधपका या बाहर का दूषित भोजन

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योग लीवर की कार्यक्षमता को सुधारने और डिटॉक्स में सहायक होता है। शुरुआती और मध्यम अवस्था में नियमित योग से काफ़ी लाभ हो सकता है।

लाभदायक योगासन:

वज्रासन – भोजन के बाद पाचन में मदद
पवनमुक्तासन – पेट के अंगों पर हल्का दबाव और पाचन सुधार
भुजंगासन – लीवर में रक्त संचार बढ़ाता है
धनुरासन – पाचन तंत्र को सक्रिय करता है
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी – श्वसन और मानसिक शांति के लिए
योग को रोज़ाना 15–20 मिनट हल्के रूप में करें। गंभीर अवस्था में ज़्यादा परिश्रम वाले आसन न करें।

🌿 8. आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)

आयुर्वेद में शराब से क्षतिग्रस्त लीवर को शुद्ध और पुनर्जीवित करने पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन गंभीर सिरोसिस में यह उपचार केवल सहायक भूमिका निभाते हैं, मुख्य चिकित्सा आधुनिक पद्धति से होती है।

लीवर को शुद्ध और मज़बूत करने में उपयोगी
लीवर एंज़ाइम को संतुलित करने में सहायक
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

गंभीर मामलों में एलोपैथिक इलाज (एंटीबायोटिक, ड्रेनेज) अनिवार्य होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा सहायक रूप में की जाती है, योग्य वैद्य की सलाह से।

लीवर की शुद्धि में सहायक
लीवर कार्य सुधारने में उपयोगी
संक्रमण और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज करें 


1. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक केमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. तुलसी की इकतीस पत्तियों का रस निचोड़ लें और उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला लें।इसे रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

6.

—----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, प्याज, मिर्च पालक, टमाटर, पत्तागोभी, बैंगन, मशरूम, पनीर, चीकू, काले चने, सूखे मेवे , भिंडी, सफेद हंस भोजन, मटर।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, दाल, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यू तरबूज, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, तुलसी + शहद, चावल, मैश, खिचरी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, 50-50 लें ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम एक मिलीलीटर।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।












































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ALCOHOLIC LIVER DISEASE - SUPPORT KIT 

अल्कोहॉलिक लिवर रोग - सपोर्ट किट 

🩺 1. परिचय (Introduction)

Alcoholic Liver Disease (ALD) वह स्थिति है जिसमें लंबे समय तक शराब के सेवन से लीवर को नुकसान पहुँचता है। लीवर लगातार अल्कोहल को डिटॉक्स करने में काम करता है। जब मात्रा ज़्यादा और समय लंबा होता है, तो लीवर की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं और सूजन, फैट जमना, और अंततः सिरोसिस जैसी गंभीर अवस्थाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

🧪 2. प्रकार (Types)

Alcoholic Fatty Liver (स्टिएटोसिस) – शुरुआती अवस्था; शराब के कारण लीवर में फैट जमा हो जाता है। अक्सर कोई लक्षण नहीं होते और शराब बंद करने से उलटा हो सकता है।
Alcoholic Hepatitis – मध्यम अवस्था; लीवर में सूजन और क्षति होती है। इसमें बुखार, पीलिया और पेट दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह जानलेवा भी बन सकता है।
Alcoholic Cirrhosis – अंतिम और गंभीर अवस्था; लीवर की कोशिकाएँ स्थायी रूप से नष्ट होकर फाइब्रोसिस और स्कार टिश्यू बनाते हैं। यह अवस्था स्थायी है और केवल नियंत्रित की जा सकती है।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

थकान और कमजोरी
भूख में कमी और वजन घटना
मतली और उल्टी
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
त्वचा और आँखों में पीलापन (जॉन्डिस)
पेट और पैरों में सूजन (fluid retention)
हाथों में कंपकंपी
मानसिक भ्रम या नींद में गड़बड़ी (गंभीर अवस्था में)
आसानी से चोट या खून आना (advanced stage)

🦠 4. कारण (Causes)

लंबे समय तक और नियमित रूप से शराब का सेवन
एक ही बार में बहुत अधिक मात्रा में शराब पीना (binge drinking)
पोषण की कमी और असंतुलित आहार
आनुवंशिक प्रवृत्ति (कुछ लोगों में अल्कोहल का असर अधिक)
वायरल हेपेटाइटिस जैसे अन्य लीवर संक्रमण के साथ शराब का सेवन
महिलाओं में समान मात्रा में शराब भी लीवर को ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

शराब का सेवन पूरी तरह बंद करना सबसे प्रभावी उपाय है
संतुलित और पोषक आहार लेना
दूषित भोजन-पानी से बचाव कर अन्य लीवर संक्रमणों से बचना
नियमित स्वास्थ्य जांच और लीवर फंक्शन टेस्ट कराना
किसी भी दवा का उपयोग लीवर पर प्रभाव को ध्यान में रखकर करना
मानसिक तनाव और नशे की आदतों से छुटकारा पाने के लिए मनोवैज्ञानिक या चिकित्सकीय सहायता लेना

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

गुनगुना पानी और नारियल पानी
हल्का, सुपाच्य और कम तेल-मसाले वाला भोजन
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसमी फल (विशेषकर पपीता, सेब, अनार)
मूंग की दाल, दलिया, खिचड़ी, सूप
नींबू पानी, छाछ, हर्बल टी (बिना चीनी)
हल्दी, अदरक, लहसुन जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
गाय का स्वर्णिम A2 घी (बहुत सीमित मात्रा में)

❌ निषेध (Apthya)

शराब और सभी नशीले पदार्थ
तला-भुना, भारी और मसालेदार भोजन
रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड
शीतल पेय, आइसक्रीम और अत्यधिक चीनी वाले पदार्थ
मैदा और परिष्कृत खाद्य पदार्थ
अधपका या बाहर का दूषित भोजन

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योग लीवर की कार्यक्षमता को सुधारने और डिटॉक्स में सहायक होता है। शुरुआती और मध्यम अवस्था में नियमित योग से काफ़ी लाभ हो सकता है।

लाभदायक योगासन:

वज्रासन – भोजन के बाद पाचन में मदद
पवनमुक्तासन – पेट के अंगों पर हल्का दबाव और पाचन सुधार
भुजंगासन – लीवर में रक्त संचार बढ़ाता है
धनुरासन – पाचन तंत्र को सक्रिय करता है
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी – श्वसन और मानसिक शांति के लिए
योग को रोज़ाना 15–20 मिनट हल्के रूप में करें। गंभीर अवस्था में ज़्यादा परिश्रम वाले आसन न करें।

🌿 8. आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)

आयुर्वेद में शराब से क्षतिग्रस्त लीवर को शुद्ध और पुनर्जीवित करने पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन गंभीर सिरोसिस में यह उपचार केवल सहायक भूमिका निभाते हैं, मुख्य चिकित्सा आधुनिक पद्धति से होती है।

लीवर को शुद्ध और मज़बूत करने में उपयोगी
लीवर एंज़ाइम को संतुलित करने में सहायक
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

गंभीर मामलों में एलोपैथिक इलाज (एंटीबायोटिक, ड्रेनेज) अनिवार्य होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा सहायक रूप में की जाती है, योग्य वैद्य की सलाह से।

लीवर की शुद्धि में सहायक
लीवर कार्य सुधारने में उपयोगी
संक्रमण और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज करें 


1. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक केमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. तुलसी की इकतीस पत्तियों का रस निचोड़ लें और उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला लें।इसे रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

6.

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प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, प्याज, मिर्च पालक, टमाटर, पत्तागोभी, बैंगन, मशरूम, पनीर, चीकू, काले चने, सूखे मेवे , भिंडी, सफेद हंस भोजन, मटर।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, दाल, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यू तरबूज, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, तुलसी + शहद, चावल, मैश, खिचरी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, 50-50 लें ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम एक मिलीलीटर।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।












































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