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ALZHEIMER’S DISEASE- SUPPORT KIT

ALZHEIMER’S DISEASE- SUPPORT KIT

Regular price Rs. 4,855.00 INR
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ALZHEIMER’S DISEASE- SUPPORT KIT 

अल्ज़ाइमर रोग - सपोर्ट किट 

🔹 संक्षिप्त परिचय

अल्ज़ाइमर रोग एक मस्तिष्क संबंधी अपक्षयी विकार (neurodegenerative disorder) है, जिसमें धीरे-धीरे स्मृति (memory), सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और व्यवहार प्रभावित हो जाते हैं।
यह डिमेंशिया (Dementia) का सबसे सामान्य प्रकार है।आयुर्वेद में इसे "स्मृतिभ्रंश" या "बुद्धि नाश" कहा गया है, जो मुख्यतः मज्जा धातु और वात दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है।

🔹 प्रकार

Early-Onset Alzheimer’s (जल्दी प्रारंभ होने वाला) – 60 वर्ष से कम उम्र में, आनुवंशिक कारणों से।
Late-Onset Alzheimer’s (बाद में होने वाला) – 60 वर्ष के बाद, सबसे सामान्य रूप।
Familial Alzheimer’s Disease (वंशानुगत) – पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में चलने वाला।

🔹 लक्षण

हाल की बातों को भूल जाना
बार-बार एक ही प्रश्न पूछना
वस्तुएँ रखकर भूल जाना
समय, स्थान या व्यक्ति की पहचान में भ्रम
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
बोलने या सही शब्द याद करने में परेशानी
निर्णय लेने में असमर्थता
व्यक्तित्व व व्यवहार में बदलाव
दैनिक कार्यों में कठिनाई (खाना बनाना, कपड़े पहनना आदि)

🔹 कारण

मस्तिष्क में बीटा-एमिलॉयड प्लाक और टाऊ प्रोटीन का जमाव, जो न्यूरॉन्स को नष्ट करता है
आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic mutation)
ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative stress)
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की कमी
दीर्घकालिक तनाव, अवसाद या अनिद्रा
अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और पोषक तत्वों की कमी
वृद्धावस्था और न्यूरोनल डीजेनेरेशन

🔹 बचाव

नियमित मानसिक व्यायाम (puzzle, reading, learning) करें
संतुलित आहार और योग अभ्यास बनाए रखें
तनाव, धूम्रपान और शराब से दूरी
पर्याप्त नींद (7–8 घंटे)
नियमित ध्यान और सकारात्मक विचार
परिवार और सामाजिक संपर्क बनाए रखें
विटामिन B12, D और ओमेगा-3 का पर्याप्त सेवन

🔹 डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टि से)

सुबह – गुनगुना पानी, नींबू-शहद, या आंवला जूस
नाश्ता – बादाम, अखरोट, फल (सेब, केला, अनार), अंकुरित मूंग
दोपहर – हरी सब्जियाँ (पालक, लौकी, शिमला मिर्च), जौ या मल्टीग्रेन रोटी, मूंग दाल, घी
शाम – नारियल पानी, ब्राह्मी या तुलसी चाय
रात – हल्का सुपाच्य भोजन (मूंग खिचड़ी, सूप, गोघृत के साथ)
औषधीय सेवन – ब्राह्मी रस, गिलोय रस, आंवला, गोमूत्र अर्क (जैन गौ चिकित्सा में उपयोगी)

🔹 अपथ्य (क्या न खाएँ)

अधिक नमक, चीनी और तला-भुना भोजन
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, और प्रिज़र्व्ड फूड
अत्यधिक कॉफी या कैफीन
नशे की आदतें (शराब, धूम्रपान)
तनावपूर्ण और नकारात्मक वातावरण

🔹 योगासन

योग मस्तिष्क की ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाकर और मानसिक संतुलन बनाकर स्मृति को सशक्त करता है —

वृक्षासन – संतुलन और एकाग्रता बढ़ाता है
भुजंगासन – मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सुधारता है
शवासन – तनाव घटाता है
पद्मासन – ध्यान केंद्रित करने में मदद
प्राणायामअनुलोम-विलोम, भ्रामरी, नाड़ी शोधन मस्तिष्क को शांत व सक्रिय करते हैं
ध्यान (Meditation) – स्मृति और मनःशक्ति पुनः सुदृढ़ करता है

🔹 आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

मस्तिष्क को शांत व सशक्त बनाती है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।









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ALZHEIMER’S DISEASE- SUPPORT KIT 

अल्ज़ाइमर रोग - सपोर्ट किट 

🔹 संक्षिप्त परिचय

अल्ज़ाइमर रोग एक मस्तिष्क संबंधी अपक्षयी विकार (neurodegenerative disorder) है, जिसमें धीरे-धीरे स्मृति (memory), सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और व्यवहार प्रभावित हो जाते हैं।
यह डिमेंशिया (Dementia) का सबसे सामान्य प्रकार है।आयुर्वेद में इसे "स्मृतिभ्रंश" या "बुद्धि नाश" कहा गया है, जो मुख्यतः मज्जा धातु और वात दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है।

🔹 प्रकार

Early-Onset Alzheimer’s (जल्दी प्रारंभ होने वाला) – 60 वर्ष से कम उम्र में, आनुवंशिक कारणों से।
Late-Onset Alzheimer’s (बाद में होने वाला) – 60 वर्ष के बाद, सबसे सामान्य रूप।
Familial Alzheimer’s Disease (वंशानुगत) – पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में चलने वाला।

🔹 लक्षण

हाल की बातों को भूल जाना
बार-बार एक ही प्रश्न पूछना
वस्तुएँ रखकर भूल जाना
समय, स्थान या व्यक्ति की पहचान में भ्रम
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
बोलने या सही शब्द याद करने में परेशानी
निर्णय लेने में असमर्थता
व्यक्तित्व व व्यवहार में बदलाव
दैनिक कार्यों में कठिनाई (खाना बनाना, कपड़े पहनना आदि)

🔹 कारण

मस्तिष्क में बीटा-एमिलॉयड प्लाक और टाऊ प्रोटीन का जमाव, जो न्यूरॉन्स को नष्ट करता है
आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic mutation)
ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative stress)
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की कमी
दीर्घकालिक तनाव, अवसाद या अनिद्रा
अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और पोषक तत्वों की कमी
वृद्धावस्था और न्यूरोनल डीजेनेरेशन

🔹 बचाव

नियमित मानसिक व्यायाम (puzzle, reading, learning) करें
संतुलित आहार और योग अभ्यास बनाए रखें
तनाव, धूम्रपान और शराब से दूरी
पर्याप्त नींद (7–8 घंटे)
नियमित ध्यान और सकारात्मक विचार
परिवार और सामाजिक संपर्क बनाए रखें
विटामिन B12, D और ओमेगा-3 का पर्याप्त सेवन

🔹 डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टि से)

सुबह – गुनगुना पानी, नींबू-शहद, या आंवला जूस
नाश्ता – बादाम, अखरोट, फल (सेब, केला, अनार), अंकुरित मूंग
दोपहर – हरी सब्जियाँ (पालक, लौकी, शिमला मिर्च), जौ या मल्टीग्रेन रोटी, मूंग दाल, घी
शाम – नारियल पानी, ब्राह्मी या तुलसी चाय
रात – हल्का सुपाच्य भोजन (मूंग खिचड़ी, सूप, गोघृत के साथ)
औषधीय सेवन – ब्राह्मी रस, गिलोय रस, आंवला, गोमूत्र अर्क (जैन गौ चिकित्सा में उपयोगी)

🔹 अपथ्य (क्या न खाएँ)

अधिक नमक, चीनी और तला-भुना भोजन
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, और प्रिज़र्व्ड फूड
अत्यधिक कॉफी या कैफीन
नशे की आदतें (शराब, धूम्रपान)
तनावपूर्ण और नकारात्मक वातावरण

🔹 योगासन

योग मस्तिष्क की ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाकर और मानसिक संतुलन बनाकर स्मृति को सशक्त करता है —

वृक्षासन – संतुलन और एकाग्रता बढ़ाता है
भुजंगासन – मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सुधारता है
शवासन – तनाव घटाता है
पद्मासन – ध्यान केंद्रित करने में मदद
प्राणायामअनुलोम-विलोम, भ्रामरी, नाड़ी शोधन मस्तिष्क को शांत व सक्रिय करते हैं
ध्यान (Meditation) – स्मृति और मनःशक्ति पुनः सुदृढ़ करता है

🔹 आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

मस्तिष्क को शांत व सशक्त बनाती है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।









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