
AMYLOIDOSIS – SUPPORT KIT
एमाइलॉयडोसिस - सहायता किट
🔶 संक्षिप्त परिचय (Introduction)
Amyloidosis एक दुर्लभ किन्तु गंभीर रोग है, जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों — जैसे हृदय, गुर्दे, यकृत, नसें, और त्वचा — में “Amyloid” नामक असामान्य प्रोटीन जमा हो जाता है। ये प्रोटीन धीरे-धीरे अंगों की सामान्य कार्यक्षमता को बाधित करते हैं, जिससे शरीर में दोष संचय और धातु-दूषण की स्थिति उत्पन्न होती है।
आयुर्वेद में यह रोग “मेद-धातुगत विकार” एवं “अवरोधजन्य अमविकार” से तुलना योग्य है।
🧩 प्रकार (Types)
Primary (AL) Amyloidosis – अस्थिमज्जा (Bone marrow) द्वारा उत्पन्न असामान्य प्रोटीन के कारण।
Secondary (AA) Amyloidosis – शरीर में किसी दीर्घकालीन संक्रमण या सूजन से।
Hereditary (Familial) – आनुवंशिक कारणों से।
Dialysis-related Amyloidosis – लंबे समय तक डायलिसिस करवाने वाले रोगियों में।
Localized Amyloidosis – एक ही अंग या ऊतक में सीमित।
⚠️ लक्षण (Symptoms)
Amyloidosis के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं और रोग के स्थान के अनुसार भिन्न होते हैं:
थकान, कमजोरी, और शरीर में भारीपन
हाथ-पैरों में सूजन या झुनझुनी
सांस फूलना, दिल की धड़कन का बढ़ना
पेट में सूजन या यकृत का बढ़ना
मूत्र कम आना या झागदार होना (किडनी प्रभावित होने पर)
जीभ मोटी या सूजी हुई
वजन कम होना, पाचन गड़बड़
त्वचा पर पीलापन या रेखाओं का उभरना
🧠 कारण (Causes)
आधुनिक दृष्टि से यह प्रोटीन मेटाबोलिज्म की विकृति है, जबकि आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके कारण हैं:
दीर्घकालिक पाचन दोष और आम (toxic residue) की वृद्धि
यकृत और गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी
अत्यधिक तैलीय, भारी, जंक-फूड सेवन
मानसिक तनाव और नींद की कमी
प्रदूषित वातावरण, शराब या धूम्रपान
दीर्घकालिक सूजनजन्य रोग जैसे – TB, RA, chronic infections
🕉️ बचाव (Prevention)
नियमित पाचन सुधारने वाले उपाय अपनाएं (त्रिफला, अजवाइन जल)।
शरीर में आम-संचय न होने दें — हल्का और सुपाच्य आहार लें।
अधिक तेल, तले-भुने, व मांसाहारी पदार्थ से परहेज रखें।
मानसिक संतुलन बनाए रखें — ध्यान, प्राणायाम करें।
संक्रमण या सूजनजन्य रोगों का समय पर उपचार करवाएं।
🥗 डाइट चार्ट (Dietary Guidelines)
क्या खाएं (Pathya):
मूंग, मसूर, तिलकुट, जौ, ओट्स, हरी सब्जियाँ
लौकी, परवल, तोरई, टिंडा, करेला
गाय का दूध, छाछ, हल्का सूप
नींबू पानी, गिलोय जल, तुलसी जल
हल्दी, अदरक, मेथी, लहसुन
क्या न खाएं (Apathy):
अत्यधिक तला-भुना, नमकीन, मीठा
रेड मीट, शराब, धूम्रपान
देर रात भोजन, दिन में सोना
रासायनिक पदार्थों या संरक्षित खाद्य का सेवन
🧘♀️ योगासन और प्राणायाम
शरीर में रक्त संचार व विषनाश के लिए निम्न आसन लाभकारी हैं:
भुजंगासन – यकृत व गुर्दे को सशक्त करता है।
पवनमुक्तासन – गैस व आम-निष्कासन में सहायक।
सुप्त बद्धकोणासन – हार्मोनल संतुलन व तंत्रिका शांति।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति – शुद्धिकरण और मानसिक शांति हेतु।
🌿आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
Amyloidosis को आयुर्वेद में धातु-दूषणज व आमजन्य विकार माना जाता है। इसका उपचार मुख्यतः आम-शोधन, दोष-संतुलन और धातु-पोषण पर आधारित है।
रोग प्रतिरोधक व विषनाशक।
यकृत व गुर्दा कार्य सुधारक।
शुद्धिकारक एवं शोथहर।
यकृत-शोधन व पाचन सुधार।
धातु पोषण में सहायक।
कोशिकीय विषाक्तता दूर कर धातु संतुलन में सहायक।
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
शुद्ध चुना, हड़जोड़, अर्जुन, मुलेठी, शतावरी, एसई हल्दी , गिलोय, आंवला, लाक्षा गुग्गुल, गोजला, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, पुनर्नवा, अर्जुन, अश्वगंधा, आंवला, शतावरी, भृंगराज, नागरमोथा, जटामांसी, गोखरू, गिलोय, सर्पगंधा, सौंठ, इलायची,गोखरू, पुनर्नवा, कुल्थी, हरड़, काकमाची, आंवला, निशोथ, रसवंती जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ इलाज करें |
1. आयुर्वेदिक हेपोरिल, बोनक्योर और ब्रैंटोन सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक यूरोफ्लश, कार्डोविन और केमोट्रिम सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक स्पोंडीक्योर कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।
4. 250 मिलीलीटर पियें। सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालें।दूध में आधा छोटा चम्मच आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।
5. रात के समय प्रत्येक नाक में छोटे आयुर्वेदिक टोनर की 2-2 बूंदें डालें। सिर के नीचे तकिये का उपयोग किये बिना।इसके अलावा उपरोक्त तरल पदार्थ की 02 बूंदों को अनामिका उंगली की मदद से नाभि क्षेत्र पर लगाएं और उंगली को 3-4 बार घुमाएं। घड़ी की दिशा और विपरीत दिशा में समय। इसी तरह रोजाना सुबह और दोपहर को सेवन के बाद इसे दोहराएं । ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।
6. आधा ग्राम फिटकरी लें (इसे गैस पर गर्म करें ताकि यह फूल जाए) और इसे आधा ग्राम मिश्रीदाना के साथ लें।
7. 1-1 चम्मच आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक दिन में दो बार लें।
8. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।
SJÖGREN’S SYNDROME - SUPPORT KIT
शोग्रेन सिंड्रोम – सपोर्ट किट
Sjögren's Syndrome एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system) अपनी ही लार ग्रंथियों व आँसू ग्रंथियों पर हमला करती है। इसके कारण आंखों में सूखापन, मुँह में सूखापन और अन्य अंगों में तकलीफ होती है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों (जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस) के साथ भी हो सकती है।
2. प्रकार
Primary Sjögren’s Syndrome: केवल Sjögren’s के लक्षण मौजूद हों।
Secondary Sjögren’s Syndrome: यह किसी अन्य ऑटोइम्यून रोग (जैसे RA, SLE) के साथ हो।
3. लक्षण
आँखों में सूखापन, जलन, खुजली, लालिमा
मुँह में सूखापन, बोलने या निगलने में कठिनाई
दांतों में जल्दी कैविटी, मसूड़ों की समस्या
थकान, जोड़ों में दर्द और सूजन
त्वचा का सूखापन, रैशेज
महिलाओं में योनि का सूखापन
गले में खराश, खांसी
कभी-कभी किडनी, लिवर, फेफड़े भी प्रभावित
4. कारण
ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया (इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी)
आनुवंशिक कारण
संक्रमण (वायरल/बैक्टीरियल ट्रिगर)
अन्य ऑटोइम्यून रोगों के साथ सह-उपस्थिति
5. बचाव
आँखों और मुँह की नियमित देखभाल करें
धूल, धुआं, प्रदूषण से बचें
धूम्रपान और शराब से परहेज करें
पर्याप्त नींद और तनाव-नियंत्रण
नियमित पानी पिएं
डॉक्टर द्वारा सुझाई आई-ड्रॉप्स / आर्टिफिशियल सालाइवा का उपयोग करें
6. डाइट चार्ट (Sjögren’s Syndrome मरीजों के लिए)
सुबह (नाश्ता):
गुनगुना पानी + नींबू
दलिया / ओट्स / मूंग दाल चीला
2–3 भीगे बादाम
मध्याह्न:
मौसमी फल (पपीता, सेब, नाशपाती, अनार)
नारियल पानी
दोपहर का भोजन:
गेहूं / जौ की रोटी
लौकी, तोरी, गाजर जैसी हल्की सब्जियां
मूंग दाल / मसूर दाल
सलाद (खीरा, गाजर, चुकंदर)
शाम:
ग्रीन टी / तुलसी-अदरक चाय
अंकुरित अनाज / भुना चना
रात्रि भोजन:
खिचड़ी / दलिया
हल्की सब्जी
सोने से पहले हल्दी वाला दूध
7. अपथ्य (Avoid)
तली-भुनी, मसालेदार और मिर्ची वाली चीजें
बहुत ज्यादा मीठा, मैदा व बेकरी आइटम
कॉफी और कोल्ड ड्रिंक (डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं)
शराब और धूम्रपान
पैकेज्ड फूड और प्रिजर्वेटिव्स
8. योगासन (Stress Control + Immunity Balance के लिए)
भुजंगासन
मंडूकासन
वज्रासन
शवासन
प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, नाड़ी शोधन
ध्यान (Meditation)
9. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
शरीर से विषैले तत्व निकालने और इम्युनिटी को संतुलित करने में सहायक।
इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने वाली प्रमुख औषधि।
थकान और जोड़ों के दर्द में लाभकारी।
रक्त शुद्ध करने और त्वचा संबंधी लक्षणों में उपयोगी।
पाचन और डिटॉक्स के लिए।
गले, खांसी और मुँह के सूखेपन में लाभकारी।
त्वचा और आंतरिक नमी बनाए रखने में सहायक।
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
गौमूत्र को नीम, बावची, खदिर, करंज, चक्रमर्द, अनंतमूल, आंवला, मंजीष्ठा, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, रोहितक, विदंग, कुटकी, पुनर्नवा, सत्यनाशी, डीकमाली, मेहंदी, शुद्ध गंधक, शुद्ध फिटकरी, अजवाइन के फूल आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा कचनार गुग्गुल ,सहजना ,चित्रक,सारिवा,गिलोय,भूमी आंवला,मेहंदी,पाषाणभेद,अतीबला,अश्वगंधा,पुनर्नवा,मुलैठी,हल्दी,तुलसी,पीपल छाल,मंजिष्ठा,मकोय,गुलर छाल,वट (बड़ का वृक्ष),लोध्र,सहदेवी,नागकेसर,शतावरी,वासा (अडूसा) ,कंकोल (तैलफल) ,त्रिकटु ,शिलाजीत ,वन ककड़ी,सदा पुष्पी,रोहितक,कालमेघ जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर SLE का इलाज
1. आयुर्वेदिक कीमोट्रिम सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक हेपोरिल सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक डर्मोसोल सिरप और आइसोल सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
4. 1-1 आयुर्वेदिक टोक्सोविन कैप्सूल दिन में दो बार लें।
5 . 250 मिलीलीटर पियें। सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालें।
दूध में आधा छोटा चम्मच आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।
6 . रोजाना सोने से पहले और नहाने के बाद आयुर्वेदिक पुरोडर्म ऑयल लगाएं।
7 . तुलसी की चटनी के इकतीस पत्तों को एक चाय के चम्मच शहद के साथ लें।सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।
8 . आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।
प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, इमली, अचार, तला हुआ भोजन, अधिक नमकीन चीजें, गन्ना, दही, तिल, काले चने, बैंगन, बेसन, अरबी, बड़े राजमा, छोले, लहसुन, ठंडे पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ , आइसक्रीम, चना।
अनुशंसित आहार: करेला, राजमा, फूलदार डोलिचोस, तुलसी+शहद, सेब, तरबूज, गाजर, ककड़ी, पत्तागोभी, मूली, पालक, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, चावल, दाल, परवल, ज्वार , बाजरा, राजमा, मोठ, सज्जनों के पैर, एंगल्ड लूफै़ण (रिबन लौकी), दूध, प्याज, चेनोपोडियम एल्बम, खसखस, फूलगोभी का रस, ताजा फ़िल्टर किया हुआ गौमूत्र 50-50 मिलीलीटर सुबह और शाम लें।
नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।
Whatsapp the reports- 9179078878
Call For Free Consultation- 07313599100
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