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ANAL FISSURE SUPPORT TREATMENT

ANAL FISSURE SUPPORT TREATMENT

Regular price Rs. 2,650.00 INR
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ANAL FISSURE SUPPORT TREATMENT 

गुदा फिशर सपोर्ट ट्रीटमेंट 

फिशर गुदा (Anus) के अंदर या बाहर की त्वचा में छोटा सा कट या घाव होता है। यह अक्सर कठोर मल (hard stool) निकलने से बन जाता है और मल त्याग के समय तेज दर्द व जलन होती है।यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन कब्ज और गलत खान-पान के कारण अधिक होती है।

2. मुख्य लक्षण (Symptoms)

मल त्याग के समय तेज दर्द या चुभन
गुदा के आसपास जलन और खुजली
मल में हल्का खून दिखाई देना
मल त्याग के बाद कई घंटों तक दर्द
गुदा के पास छोटा सा कट या घाव

3. फिशर के मुख्य कारण (Causes)

पुरानी कब्ज
बहुत कठोर मल
पानी कम पीना
फाइबर कम खाना
ज्यादा मिर्च-मसाले व तला भोजन
लंबे समय तक बैठकर काम करना
बार-बार दस्त
डिलीवरी के बाद महिलाओं में

4. फिशर में क्या खाएं (Diet Chart)


सुबह

गुनगुना पानी + 1 चम्मच गाय का घी
पपीता / भीगा हुआ अंजीर

नाश्ता

दलिया / ओट्स
मूंग दाल चीला
नारियल पानी

दोपहर का भोजन

मल्टीग्रेन रोटी
हरी सब्जियां
सलाद (खीरा, गाजर, चुकंदर)
छाछ

शाम

फल (सेब, अमरूद, पपीता)


रात

हल्का भोजन
मूंग दाल खिचड़ी
सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण

क्या न खाएं


बहुत तीखा और मसालेदार भोजन
फास्ट फूड
ज्यादा चाय-कॉफी
शराब
सूखा व भारी भोजन

5. फिशर में लाभकारी योगासन

पवनमुक्तासन – कब्ज दूर करता है
मालासन – पेल्विक मसल्स मजबूत करता है
वज्रासन – पाचन सुधारता है
सेतु बंधासन – रक्त संचार बढ़ाता है

जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 


त्रिफला, हीराबोल, नागकेसर, बकयन, कुरचि, दरुहल्दी, रीठा, बेलगिरी, नीम, लाजवंती, कुटकी, चित्रक, सौंठ, करंज, शुद्ध फिटकरी, शुद्ध सुहागा, गोजला ,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रयोग किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य,आदि निम्नानुसार उपयोग कर 

1. आयुर्वेदिक पाइलोसिन सिरप 6-6 चम्मच प्रतिदिन दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक एन्सोक्योर कैप्सूल 1-1 प्रतिदिन दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें। .

4. रोजाना रात को सोते समय फिस्टुला के घाव पर आयुर्वेदिक मलहम पाइलोरिड लगाएं।

Please click to fill form for free consultation with doctor 

https://cowurine.com/en/contact

Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation- 07313599100

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फिशर गुदा (Anus) के अंदर या बाहर की त्वचा में छोटा सा कट या घाव होता है। यह अक्सर कठोर मल (hard stool) निकलने से बन जाता है और मल त्याग के समय तेज दर्द व जलन होती है।यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन कब्ज और गलत खान-पान के कारण अधिक होती है।

2. मुख्य लक्षण (Symptoms)

मल त्याग के समय तेज दर्द या चुभन
गुदा के आसपास जलन और खुजली
मल में हल्का खून दिखाई देना
मल त्याग के बाद कई घंटों तक दर्द
गुदा के पास छोटा सा कट या घाव

3. फिशर के मुख्य कारण (Causes)

पुरानी कब्ज
बहुत कठोर मल
पानी कम पीना
फाइबर कम खाना
ज्यादा मिर्च-मसाले व तला भोजन
लंबे समय तक बैठकर काम करना
बार-बार दस्त
डिलीवरी के बाद महिलाओं में

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सुबह

गुनगुना पानी + 1 चम्मच गाय का घी
पपीता / भीगा हुआ अंजीर

नाश्ता

दलिया / ओट्स
मूंग दाल चीला
नारियल पानी

दोपहर का भोजन

मल्टीग्रेन रोटी
हरी सब्जियां
सलाद (खीरा, गाजर, चुकंदर)
छाछ

शाम

फल (सेब, अमरूद, पपीता)


रात

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मूंग दाल खिचड़ी
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क्या न खाएं


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शराब
सूखा व भारी भोजन

5. फिशर में लाभकारी योगासन

पवनमुक्तासन – कब्ज दूर करता है
मालासन – पेल्विक मसल्स मजबूत करता है
वज्रासन – पाचन सुधारता है
सेतु बंधासन – रक्त संचार बढ़ाता है

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आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य,आदि निम्नानुसार उपयोग कर 

1. आयुर्वेदिक पाइलोसिन सिरप 6-6 चम्मच प्रतिदिन दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक एन्सोक्योर कैप्सूल 1-1 प्रतिदिन दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें। .

4. रोजाना रात को सोते समय फिस्टुला के घाव पर आयुर्वेदिक मलहम पाइलोरिड लगाएं।

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