
ATAXIA - SUPPORT KIT
अटैक्सिया - सपोर्ट किट
🔹 संक्षिप्त परिचय
अटैक्सिया एक तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार (neurological disorder) है, जिसमें व्यक्ति के संतुलन, चाल, हाथ-पैर की गतिविधि, बोलने और आंखों के समन्वय पर नियंत्रण कम हो जाता है। यह स्वयं कोई रोग नहीं, बल्कि मस्तिष्क के सेरीबेलम (Cerebellum) या उससे जुड़ी नसों की क्षति का परिणाम होता है।
🔹 प्रकार
Cerebellar Ataxia – सेरीबेलम की क्षति से उत्पन्न; चाल डगमगाना, बोलने में कठिनाई।
Sensory Ataxia – नसों की क्षति से; व्यक्ति को अंगों की स्थिति का एहसास नहीं होता।
Vestibular Ataxia – कान के अंदरूनी हिस्से (vestibular system) में समस्या; चक्कर आना, असंतुलन।
Hereditary Ataxia – वंशानुगत कारणों से, जैसे Friedreich’s Ataxia।
Acquired Ataxia – स्ट्रोक, सिर की चोट, अल्कोहल या दवाओं के कारण उत्पन्न।
🔹 लक्षण
चलने या खड़े होने में असंतुलन
हाथ-पैर में समन्वय की कमी
बोलने में अस्पष्टता (slurred speech)
आंखों की गति पर नियंत्रण न रहना (nystagmus)
निगलने में कठिनाई
थकान, चक्कर या डगमगाहट
सूक्ष्म कामों में कठिनाई (जैसे लिखना, बटन लगाना)
🔹 कारण
-
सेरीबेलम या तंत्रिकाओं की क्षति
सिर की चोट या स्ट्रोक
अल्कोहल, विष या दवाओं का अत्यधिक सेवन
विटामिन E, B12 या थायमिन की कमी
मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ट्यूमर या संक्रमण
आनुवंशिक विकार (genetic mutations)
🔹 बचाव
-
अल्कोहल और नशे से दूर रहें
विटामिन B12, E, और D से भरपूर आहार लें
हेलमेट पहनें, सिर की चोट से बचें
नियमित स्वास्थ्य जांच
तनाव और नींद की कमी से बचाव
योग और ध्यान द्वारा तंत्रिका तंत्र को सशक्त बनाना
🔹 डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टि से लाभदायक)
सुबह – गुनगुना पानी, नींबू-शहद, 5 बादाम (भिगोए हुए)
नाश्ता – फल (पपीता, केला, सेब), अंकुरित मूंग या दलिया
दोपहर – जौ, बाजरा या मल्टीग्रेन रोटी, मूंग दाल, हरी सब्जियाँ (पालक, लौकी, तुरई)
शाम – नारियल पानी या तुलसी-अदरक चाय
रात – हल्का भोजन (मूंग खिचड़ी, सूप)
गिलोय, आंवला, ब्राह्मी कैप्सूल
🔹 अपथ्य (परहेज़)
अत्यधिक नमक, चीनी और मैदा
तला, मसालेदार, बासी भोजन
कैफीन, अल्कोहल, धूम्रपान
कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड
देर रात जागना, तनावपूर्ण वातावरण
🔹 योगासन
ताड़ासन – शरीर का संतुलन सुधारता है
वृक्षासन – पैर की मांसपेशियों और मन का नियंत्रण बढ़ाता है
सुखासन / पद्मासन – ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता है
शवासन – तनाव और थकान कम करता है
प्राणायाम – विशेषकर अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और नाड़ी शोधन – ऑक्सीजन और मस्तिष्क ऊर्जा बढ़ाते हैं
🔹 आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
आयुर्वेद में अटैक्सिया को "वात विकार" या "मज्जा धातु विकृति" माना जाता है।
उपचार का उद्देश्य वात दोष को शांत करना, तंत्रिका तंत्र को पोषण देना और मन-शरीर का समन्वय पुनर्स्थापित करना होता है।
वात शमन और रक्तसंचार सुधारने हेतु
मस्तिष्क की शांति व संतुलन के लिए
टोनर नेसल ड्राप का नाक में प्रवाह, जो मस्तिष्क तक पहुँचता है
तंत्रिका शक्ति व संतुलन बढ़ाता है
मस्तिष्क को शांत व सशक्त बनाती है
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का इलाज करें |
1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।
4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।
5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।
6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।
7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।
प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।
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