
CEREBRAL BELL’S PALSY - SUPPORT KIT
सेरेब्रल बेल्स पाल्सी - सपोर्ट किट
🧠 1. परिचय (Introduction)
Bell’s Palsy चेहरे की नस (Facial Nerve – 7th Cranial Nerve) में सूजन या क्षति के कारण चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी या लकवा जैसी स्थिति होती है। जब यह समस्या मस्तिष्क (Cerebral) के किसी हिस्से की क्षति या तंत्रिका तंत्र में विकार के कारण होती है (जैसे स्ट्रोक या जन्मजात स्थिति में), तो उसे Cerebral Bell’s Palsy कहा जाता है। इस स्थिति में चेहरे की गति और अभिव्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है — जैसे मुस्कुराना, आँख बंद करना या बोलने में कठिनाई। अधिकतर मामलों में समय पर इलाज से सुधार संभव होता है।
🧪 2. प्रकार (Types)
Peripheral Bell’s Palsy – चेहरे की नस में सूजन या संक्रमण के कारण। आमतौर पर अचानक होता है और अक्सर कुछ हफ्तों में ठीक भी हो जाता है।
Cerebral (Central) Bell’s Palsy – मस्तिष्क के उस हिस्से (आमतौर पर फ्रंटल लोब या ब्रेनस्टेम) में क्षति होने पर जो चेहरे की नस को नियंत्रित करता है। यह प्रायः स्ट्रोक, जन्मजात विकार या मस्तिष्क संक्रमण के कारण होता है।
Cerebral Bell’s Palsy में आमतौर पर चेहरे के निचले हिस्से पर प्रभाव अधिक होता है जबकि माथे की मांसपेशियाँ अक्सर सामान्य रहती हैं — यह इसे पेरिफेरल बेल्स पाल्सी से अलग बनाता है।
⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)
चेहरे के एक तरफ अचानक कमजोरी या लटकना
मुस्कुराने, हँसने, आँख बंद करने में कठिनाई
आँखों में पानी आना या सूखापन
बोलने में हल्की कठिनाई, कुछ शब्दों का स्पष्ट उच्चारण न होना
स्वाद में कमी या बदलाव (कुछ मामलों में)
कान में आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना (hyperacusis)
गंभीर मामलों में चबाने या निगलने में भी परेशानी
Cerebral कारण होने पर अक्सर अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी साथ हो सकते हैं — जैसे हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना (स्ट्रोक के संकेत)
🦠 4. कारण (Causes)
Cerebral Stroke – मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने या फटने से चेहरे की नसों को नियंत्रित करने वाले हिस्से में क्षति
मस्तिष्क संक्रमण – जैसे मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस
जन्मजात न्यूरोलॉजिकल विकार – बच्चों में देखा जाता है
ट्रॉमा (चोट) – सिर या ब्रेन स्टेम को क्षति
ट्यूमर – मस्तिष्क के उस क्षेत्र में दबाव
Autoimmune कारण – कुछ मामलों में प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा तंत्रिका पर हमला
🛡️ 5. बचाव (Prevention)
स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर का नियमित नियंत्रण — Cerebral Bell’s Palsy के सबसे आम कारणों में से एक स्ट्रोक है
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से परहेज़
संक्रमणों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और टीकाकरण
सिर की चोट से बचने के लिए हेलमेट और सावधानी
नियमित स्वास्थ्य जांच, खासकर यदि हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ या हार्ट रोग हैं
🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)
✅ सेवन योग्य (Pathya)
हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसमी फल (विशेषकर विटामिन C युक्त जैसे संतरा, आंवला)
साबुत अनाज, मूंग दाल, खिचड़ी
ओमेगा-3 युक्त खाद्य (अलसी, अखरोट) – मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए
पर्याप्त पानी और नारियल पानी
हल्दी, अदरक, लहसुन — सूजन कम करने में सहायक
B-कॉम्प्लेक्स विटामिन (खासतौर पर B12) वाले खाद्य पदार्थ
❌ निषेध (Apthya)
तला-भुना और भारी भोजन
अत्यधिक चीनी, मैदा और प्रोसेस्ड फूड
शराब और तंबाकू
अत्यधिक नमक (स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है)
डिब्बाबंद और रासायनिक युक्त खाद्य पदार्थ
🧘 7. योगासन (Yogasana)
योग और प्राणायाम चेहरे की नसों को सक्रिय करने, मस्तिष्क को शांत रखने और रक्त प्रवाह बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह फिजियोथैरेपी के साथ उपयोगी पूरक हो सकता है।
लाभदायक आसन और अभ्यास:
वज्रासन – स्थिर बैठने से ध्यान केंद्रित होता है
सुखासन / पद्मासन – ध्यान और श्वसन अभ्यास के लिए
अनुलोम-विलोम प्राणायाम – मस्तिष्क में ऑक्सीजन आपूर्ति सुधारता है
भ्रामरी प्राणायाम – नर्वस सिस्टम को शांत करता है
फेशियल योगा / एक्सरसाइज़ – जैसे मुँह फुलाना, गाल में हवा भरना, आँख बंद-बंद खोलना, चेहरे की मांसपेशियों को हल्के से मालिश करना
ध्यान और योग निद्रा – मानसिक तनाव घटाने और रिकवरी में सहायता
⏳ दिन में 10–15 मिनट हल्के रूप में नियमित अभ्यास लाभकारी होता है।
🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
आयुर्वेद में Bell’s Palsy को “Ardita” रोग के अंतर्गत माना गया है। Cerebral कारण वाले मामलों में आयुर्वेदिक उपचार सहायक है।
मस्तिष्क और नाड़ी तंत्र पर लाभकारी प्रभाव
नसों को खोलने में सहायक
नर्वस सिस्टम को मज़बूत करने में सहायक
शरीर की शुद्धि और पाचन सुधार के लिए
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का इलाज करें |
1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।
4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।
5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।
6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।
7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।
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प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।
अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध
नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।
सेरेब्रल बेल्स पाल्सी - सपोर्ट किट
🧠 1. परिचय (Introduction)
Bell’s Palsy चेहरे की नस (Facial Nerve – 7th Cranial Nerve) में सूजन या क्षति के कारण चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी या लकवा जैसी स्थिति होती है। जब यह समस्या मस्तिष्क (Cerebral) के किसी हिस्से की क्षति या तंत्रिका तंत्र में विकार के कारण होती है (जैसे स्ट्रोक या जन्मजात स्थिति में), तो उसे Cerebral Bell’s Palsy कहा जाता है। इस स्थिति में चेहरे की गति और अभिव्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है — जैसे मुस्कुराना, आँख बंद करना या बोलने में कठिनाई। अधिकतर मामलों में समय पर इलाज से सुधार संभव होता है।
🧪 2. प्रकार (Types)
Peripheral Bell’s Palsy – चेहरे की नस में सूजन या संक्रमण के कारण। आमतौर पर अचानक होता है और अक्सर कुछ हफ्तों में ठीक भी हो जाता है।
Cerebral (Central) Bell’s Palsy – मस्तिष्क के उस हिस्से (आमतौर पर फ्रंटल लोब या ब्रेनस्टेम) में क्षति होने पर जो चेहरे की नस को नियंत्रित करता है। यह प्रायः स्ट्रोक, जन्मजात विकार या मस्तिष्क संक्रमण के कारण होता है।
Cerebral Bell’s Palsy में आमतौर पर चेहरे के निचले हिस्से पर प्रभाव अधिक होता है जबकि माथे की मांसपेशियाँ अक्सर सामान्य रहती हैं — यह इसे पेरिफेरल बेल्स पाल्सी से अलग बनाता है।
⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)
चेहरे के एक तरफ अचानक कमजोरी या लटकना
मुस्कुराने, हँसने, आँख बंद करने में कठिनाई
आँखों में पानी आना या सूखापन
बोलने में हल्की कठिनाई, कुछ शब्दों का स्पष्ट उच्चारण न होना
स्वाद में कमी या बदलाव (कुछ मामलों में)
कान में आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना (hyperacusis)
गंभीर मामलों में चबाने या निगलने में भी परेशानी
Cerebral कारण होने पर अक्सर अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी साथ हो सकते हैं — जैसे हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना (स्ट्रोक के संकेत)
🦠 4. कारण (Causes)
Cerebral Stroke – मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने या फटने से चेहरे की नसों को नियंत्रित करने वाले हिस्से में क्षति
मस्तिष्क संक्रमण – जैसे मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस
जन्मजात न्यूरोलॉजिकल विकार – बच्चों में देखा जाता है
ट्रॉमा (चोट) – सिर या ब्रेन स्टेम को क्षति
ट्यूमर – मस्तिष्क के उस क्षेत्र में दबाव
Autoimmune कारण – कुछ मामलों में प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा तंत्रिका पर हमला
🛡️ 5. बचाव (Prevention)
स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर का नियमित नियंत्रण — Cerebral Bell’s Palsy के सबसे आम कारणों में से एक स्ट्रोक है
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से परहेज़
संक्रमणों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और टीकाकरण
सिर की चोट से बचने के लिए हेलमेट और सावधानी
नियमित स्वास्थ्य जांच, खासकर यदि हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ या हार्ट रोग हैं
🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)
✅ सेवन योग्य (Pathya)
हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसमी फल (विशेषकर विटामिन C युक्त जैसे संतरा, आंवला)
साबुत अनाज, मूंग दाल, खिचड़ी
ओमेगा-3 युक्त खाद्य (अलसी, अखरोट) – मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए
पर्याप्त पानी और नारियल पानी
हल्दी, अदरक, लहसुन — सूजन कम करने में सहायक
B-कॉम्प्लेक्स विटामिन (खासतौर पर B12) वाले खाद्य पदार्थ
❌ निषेध (Apthya)
तला-भुना और भारी भोजन
अत्यधिक चीनी, मैदा और प्रोसेस्ड फूड
शराब और तंबाकू
अत्यधिक नमक (स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है)
डिब्बाबंद और रासायनिक युक्त खाद्य पदार्थ
🧘 7. योगासन (Yogasana)
योग और प्राणायाम चेहरे की नसों को सक्रिय करने, मस्तिष्क को शांत रखने और रक्त प्रवाह बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह फिजियोथैरेपी के साथ उपयोगी पूरक हो सकता है।
लाभदायक आसन और अभ्यास:
वज्रासन – स्थिर बैठने से ध्यान केंद्रित होता है
सुखासन / पद्मासन – ध्यान और श्वसन अभ्यास के लिए
अनुलोम-विलोम प्राणायाम – मस्तिष्क में ऑक्सीजन आपूर्ति सुधारता है
भ्रामरी प्राणायाम – नर्वस सिस्टम को शांत करता है
फेशियल योगा / एक्सरसाइज़ – जैसे मुँह फुलाना, गाल में हवा भरना, आँख बंद-बंद खोलना, चेहरे की मांसपेशियों को हल्के से मालिश करना
ध्यान और योग निद्रा – मानसिक तनाव घटाने और रिकवरी में सहायता
⏳ दिन में 10–15 मिनट हल्के रूप में नियमित अभ्यास लाभकारी होता है।
🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
आयुर्वेद में Bell’s Palsy को “Ardita” रोग के अंतर्गत माना गया है। Cerebral कारण वाले मामलों में आयुर्वेदिक उपचार सहायक है।
मस्तिष्क और नाड़ी तंत्र पर लाभकारी प्रभाव
नसों को खोलने में सहायक
नर्वस सिस्टम को मज़बूत करने में सहायक
शरीर की शुद्धि और पाचन सुधार के लिए
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का इलाज करें |
1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।
4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।
5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।
6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।
7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।
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प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।
अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध
नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।
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