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COPD (CHRONIC OBSTRUCTIVE PULMONARY DISEASE) – SUPPORT KIT

COPD (CHRONIC OBSTRUCTIVE PULMONARY DISEASE) – SUPPORT KIT

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COPD (CHRONIC OBSTRUCTIVE PULMONARY DISEASE) – SUPPORT KIT

सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज)- सपोर्ट किट 

COPD एक दीर्घकालीन (chronic) फेफड़ों की बीमारी है जिसमें श्वसन नलिकाएं संकरी हो जाती हैं और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है। इसमें सांस लेने में कठिनाई, खांसी और बलगम प्रमुख लक्षण हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन नियंत्रित की जा सकती है।

2. प्रकार

Chronic Bronchitis (क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस):
लगातार खांसी और ज्यादा बलगम बनना।
Emphysema (एम्फायसीमा):
फेफड़ों की एयर सैक (alveoli) नष्ट होकर सांस लेने की क्षमता घट जाती है।
Mixed COPD:
दोनों का मिश्रण।

3. लक्षण

सांस लेने में तकलीफ (खासकर परिश्रम करने पर)
लगातार खांसी (2–3 महीने से अधिक)
अधिक बलगम आना
सीने में जकड़न
सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकना
बार-बार सांस की बीमारी या संक्रमण होना
वजन घटना, कमजोरी

4. कारण

धूम्रपान (सबसे बड़ा कारण)
प्रदूषण (धूल, धुआं, गैसें)
लंबे समय तक बायोमास ईंधन (लकड़ी, कोयला, गोबर) का उपयोग
आनुवंशिक कमी (Alpha-1 antitrypsin deficiency)
बार-बार फेफड़ों के संक्रमण

5. बचाव (Prevention)

धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ें
प्रदूषित वातावरण से बचें, मास्क का उपयोग करें
व्यायाम और प्राणायाम करें
फेफड़ों के संक्रमण से बचाव (वैक्सीनेशन – फ्लू, न्यूमोकोक्कल)
संतुलित आहार व पर्याप्त पानी

6. डाइट चार्ट (COPD मरीज के लिए)

सुबह (नाश्ता):

हल्का दलिया / ओट्स / पोहा
अदरक वाली हर्बल चाय
भीगे हुए बादाम (3–4)

मध्याह्न:

मौसमी फल (सेब, पपीता, नाशपाती)
नारियल पानी

दोपहर का भोजन:

गेहूं की रोटी / मल्टीग्रेन रोटी
हरी सब्जियां (लौकी, परवल, पालक)
मूंग दाल / मसूर दाल (कम तेल, मसाले रहित)
सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)

शाम:

सूप (टमाटर, गाजर, चुकंदर, अदरक)
ग्रीन टी

रात्रि भोजन:

खिचड़ी / दलिया
हल्की सब्जी
सोने से पहले हल्दी वाला दूध

7. अपथ्य (Avoid)

धूम्रपान, शराब
तली-भुनी, मसालेदार और तेलीय चीजें
अधिक ठंडी चीजें (आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक)
रेड मीट, अधिक प्रोटीनयुक्त भारी भोजन
अधिक मिठाई और मैदा उत्पाद

8. योगासन (फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने हेतु)

भुजंगासन
मकरासन
शवासन
ताड़ासन
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम
कपालभाति (हल्की गति से, यदि तकलीफ न हो)

9. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

श्वसन मार्ग को साफ करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक।
खांसी और बलगम में लाभकारी।
फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है।
गले और श्वसन नलिकाओं को आराम देती है।
बलगम कम करने में उपयोगी।
श्वसन मार्ग साफ करने में सहायक।

आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों के साथ संयोजन

अड़ूसा, बहेड़ा, मुलेठी, हल्दी, शिरीष, कंटकारी, तुलसी, काकरासिंघी, कपूर-कचरी, पिप्पली, कुटकी,  भारंगी,  सौंठ, बिल्व पत्र, काली मिर्च, अनार छिलका, भृंगराज, नवसादर, कपूर, अजवायन के फूल।, गोजला ,आवला, अश्वगंधा, गोखरू, जीवांति, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, दालचीनी पाउडर, जायफल पाउडर, कवच बीज, लौंग पाउडर, शुद्ध शिलाजीत, घी, गुड़, हरी इलायची,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, 

हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |

1. आयुर्वेदिक ब्रोंकोल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक किमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक कोफनोल कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4.  सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालकर पिएँ । दूध में आधा आधा छोटा चम्मच  आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।

5. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7.

……………………………………………………………………………………………………………

प्रतिबंधित आहार- अचार, इमली, तले हुए खाद्य पदार्थ, ठंडे पेय, चावल, दही, छाछ, मिठाई, केला, तरबूज, काले चने, धूम्रपान, शराब (शराब), प्याज।

अनुशंसित आहार: चोकर, लौंग, इलायची, खीरा, खजूर, तुलसी, काली मिर्च, सौंठ, करेला, मूली, अनार, सेब, अंगूर, पपीता, गाजर, अंकुरित अनाज, सुबह गुनगुना पानी, मसला हुआ, राजमा, पालक, परवल, चुकंदर, मेथी, धनिया, पुदीना, जेंटल, अमरंथस, ड्रमस्टिक। छड़ी, अदरक, लहसुन, आलू, चीकू, अंजीर, शहतूत, चुकंदर, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


https://cowurine.com/en/contact

Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation- 07313599100

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COPD एक दीर्घकालीन (chronic) फेफड़ों की बीमारी है जिसमें श्वसन नलिकाएं संकरी हो जाती हैं और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है। इसमें सांस लेने में कठिनाई, खांसी और बलगम प्रमुख लक्षण हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन नियंत्रित की जा सकती है।

2. प्रकार

Chronic Bronchitis (क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस):
लगातार खांसी और ज्यादा बलगम बनना।
Emphysema (एम्फायसीमा):
फेफड़ों की एयर सैक (alveoli) नष्ट होकर सांस लेने की क्षमता घट जाती है।
Mixed COPD:
दोनों का मिश्रण।

3. लक्षण

सांस लेने में तकलीफ (खासकर परिश्रम करने पर)
लगातार खांसी (2–3 महीने से अधिक)
अधिक बलगम आना
सीने में जकड़न
सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकना
बार-बार सांस की बीमारी या संक्रमण होना
वजन घटना, कमजोरी

4. कारण

धूम्रपान (सबसे बड़ा कारण)
प्रदूषण (धूल, धुआं, गैसें)
लंबे समय तक बायोमास ईंधन (लकड़ी, कोयला, गोबर) का उपयोग
आनुवंशिक कमी (Alpha-1 antitrypsin deficiency)
बार-बार फेफड़ों के संक्रमण

5. बचाव (Prevention)

धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ें
प्रदूषित वातावरण से बचें, मास्क का उपयोग करें
व्यायाम और प्राणायाम करें
फेफड़ों के संक्रमण से बचाव (वैक्सीनेशन – फ्लू, न्यूमोकोक्कल)
संतुलित आहार व पर्याप्त पानी

6. डाइट चार्ट (COPD मरीज के लिए)

सुबह (नाश्ता):

हल्का दलिया / ओट्स / पोहा
अदरक वाली हर्बल चाय
भीगे हुए बादाम (3–4)

मध्याह्न:

मौसमी फल (सेब, पपीता, नाशपाती)
नारियल पानी

दोपहर का भोजन:

गेहूं की रोटी / मल्टीग्रेन रोटी
हरी सब्जियां (लौकी, परवल, पालक)
मूंग दाल / मसूर दाल (कम तेल, मसाले रहित)
सलाद (खीरा, टमाटर, गाजर)

शाम:

सूप (टमाटर, गाजर, चुकंदर, अदरक)
ग्रीन टी

रात्रि भोजन:

खिचड़ी / दलिया
हल्की सब्जी
सोने से पहले हल्दी वाला दूध

7. अपथ्य (Avoid)

धूम्रपान, शराब
तली-भुनी, मसालेदार और तेलीय चीजें
अधिक ठंडी चीजें (आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक)
रेड मीट, अधिक प्रोटीनयुक्त भारी भोजन
अधिक मिठाई और मैदा उत्पाद

8. योगासन (फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने हेतु)

भुजंगासन
मकरासन
शवासन
ताड़ासन
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम
कपालभाति (हल्की गति से, यदि तकलीफ न हो)

9. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

श्वसन मार्ग को साफ करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक।
खांसी और बलगम में लाभकारी।
फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है।
गले और श्वसन नलिकाओं को आराम देती है।
बलगम कम करने में उपयोगी।
श्वसन मार्ग साफ करने में सहायक।

आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों के साथ संयोजन

अड़ूसा, बहेड़ा, मुलेठी, हल्दी, शिरीष, कंटकारी, तुलसी, काकरासिंघी, कपूर-कचरी, पिप्पली, कुटकी,  भारंगी,  सौंठ, बिल्व पत्र, काली मिर्च, अनार छिलका, भृंगराज, नवसादर, कपूर, अजवायन के फूल।, गोजला ,आवला, अश्वगंधा, गोखरू, जीवांति, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, दालचीनी पाउडर, जायफल पाउडर, कवच बीज, लौंग पाउडर, शुद्ध शिलाजीत, घी, गुड़, हरी इलायची,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, 

हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |

1. आयुर्वेदिक ब्रोंकोल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक किमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक कोफनोल कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4.  सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालकर पिएँ । दूध में आधा आधा छोटा चम्मच  आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।

5. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7.

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प्रतिबंधित आहार- अचार, इमली, तले हुए खाद्य पदार्थ, ठंडे पेय, चावल, दही, छाछ, मिठाई, केला, तरबूज, काले चने, धूम्रपान, शराब (शराब), प्याज।

अनुशंसित आहार: चोकर, लौंग, इलायची, खीरा, खजूर, तुलसी, काली मिर्च, सौंठ, करेला, मूली, अनार, सेब, अंगूर, पपीता, गाजर, अंकुरित अनाज, सुबह गुनगुना पानी, मसला हुआ, राजमा, पालक, परवल, चुकंदर, मेथी, धनिया, पुदीना, जेंटल, अमरंथस, ड्रमस्टिक। छड़ी, अदरक, लहसुन, आलू, चीकू, अंजीर, शहतूत, चुकंदर, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


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