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DEMENTIA - SUPPORT KIT

DEMENTIA - SUPPORT KIT

Regular price Rs. 4,755.00 INR
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DEMENTIA - SUPPORT KIT 

डिमेंशिया- सपोर्ट किट 

🧠 1. परिचय (Introduction)

Dementia कोई एक रोग नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता में धीरे-धीरे कमी आने की एक स्थिति है, जिसमें स्मरण शक्ति (memory), सोचने की क्षमता (cognition), निर्णय लेने की शक्ति और व्यवहार प्रभावित होते हैं। यह सामान्य बुढ़ापे का हिस्सा नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के क्षरण या विकार के कारण होता है। समय के साथ व्यक्ति को दैनिक कार्य करने में कठिनाई होने लगती है और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

🧪 2. प्रकार (Types)

  • Alzheimer’s Disease – सबसे आम प्रकार; मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक और टाउ प्रोटीन जमा होने के कारण।

    Vascular Dementia – मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट या स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क को नुकसान।

    Lewy Body Dementia – मस्तिष्क में Lewy body नामक प्रोटीन जमा होने से; इसमें भ्रम, झटके और नींद की समस्या हो सकती है।

    Frontotemporal Dementia – मस्तिष्क के फ्रंटल और टेम्पोरल लोब की कोशिकाओं के क्षरण से; व्यवहार में बदलाव पहले दिखते हैं।

    Mixed Dementia – जब एक से अधिक प्रकार साथ में मौजूद हों।

    Secondary Dementia – कुछ संक्रमणों, सिर की चोट, हॉर्मोनल असंतुलन या विटामिन की कमी के कारण भी डिमेंशिया जैसी स्थिति हो सकती है।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

हाल की बातें या घटनाएँ याद न रहना (Short-term memory loss)
बार-बार वही प्रश्न पूछना
रास्ता या जगह भूल जाना
निर्णय लेने या समस्या हल करने में कठिनाई
बोलने या सही शब्द ढूँढने में परेशानी
व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन या अवसाद
समय, तिथि या मौसम को लेकर भ्रम
नींद में गड़बड़ी
धीरे-धीरे दैनिक कार्यों (जैसे कपड़े पहनना, खाना खाना) में असमर्थता
Alzheimer’s में लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि Vascular Dementia में अचानक परिवर्तन दिख सकते हैं।

🧠 4. कारण (Causes)

  • मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति या प्रोटीन का असामान्य जमाव
    आनुवंशिक (Genetic) कारक
    उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, मधुमेह जैसी स्थितियाँ
    बार-बार सिर में चोट लगना
    संक्रमण (जैसे HIV, Syphilis), थायरॉयड रोग, विटामिन B12 की कमी
    अधिक शराब सेवन
    मानसिक रूप से सक्रिय न रहना और निष्क्रिय जीवनशैली

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

डिमेंशिया का पूर्ण रूप से रोकथाम संभव नहीं, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है:

नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि
मानसिक रूप से सक्रिय रहना — पढ़ना, खेलना, नई चीज़ें सीखना
सामाजिक रूप से जुड़े रहना और अकेलापन न होने देना
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना
धूम्रपान और शराब से परहेज़
पोषक आहार और पर्याप्त नींद
सिर की चोट से बचाव
नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेषकर उम्र बढ़ने पर

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

ताज़े फल और सब्ज़ियाँ — विशेषकर हरी पत्तेदार, बेरीज़, संतरा, सेब
साबुत अनाज, मूंग दाल, हल्का और सुपाच्य भोजन
हल्दी, अदरक, लहसुन — मस्तिष्क और रक्त संचार के लिए लाभकारी
अखरोट, बादाम, अलसी के बीज — ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर
गुनगुना पानी, नारियल पानी
दूध, घी और ब्राह्मी, शंखपुष्पी जैसे आयुर्वेदिक टॉनिक (वैद्य की सलाह से)
विटामिन B12 और D युक्त आहार 

❌ निषेध (Apthya)

प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स
अत्यधिक चीनी, मैदा और नमक
शराब और तंबाकू
बहुत तैलीय, मसालेदार या भारी भोजन
बार-बार गर्म किया गया या बासी खाना

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योग और प्राणायाम मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ाने, तनाव घटाने और मानसिक स्पष्टता में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से स्मरण शक्ति और मन की शांति में सुधार होता है।

लाभदायक आसन और अभ्यास:

वज्रासन – स्थिरता और ध्यान के लिए
सुखासन / पद्मासन – ध्यान और श्वसन अभ्यास के लिए
अनुलोम-विलोम प्राणायाम – मस्तिष्क में ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाता है
भ्रामरी प्राणायाम – मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी
त्राटक (दीपक पर ध्यान) – एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
योग निद्रा और ध्यान – तनाव घटाने और नींद सुधारने में सहायक
⏳ सुबह या शाम 15–20 मिनट नियमित अभ्यास करें।

🌿 8. आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)

आयुर्वेद में डिमेंशिया को “स्मृति भ्रंश” या “बुद्धि मंद्यता” की श्रेणी में रखा गया है। उपचार का उद्देश्य मस्तिष्क को पोषण देना, स्मृति शक्ति बढ़ाना और मानसिक स्थिरता प्रदान करना होता है।

स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध
तनाव घटाने और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक
इम्यूनिटी और मानसिक शक्ति में सहायक
दीर्घकालिक पोषण और स्मृति सुधार के लिए
मस्तिष्क को पोषण देने के लिए

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

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प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।



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DEMENTIA - SUPPORT KIT 

डिमेंशिया- सपोर्ट किट 

🧠 1. परिचय (Introduction)

Dementia कोई एक रोग नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता में धीरे-धीरे कमी आने की एक स्थिति है, जिसमें स्मरण शक्ति (memory), सोचने की क्षमता (cognition), निर्णय लेने की शक्ति और व्यवहार प्रभावित होते हैं। यह सामान्य बुढ़ापे का हिस्सा नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के क्षरण या विकार के कारण होता है। समय के साथ व्यक्ति को दैनिक कार्य करने में कठिनाई होने लगती है और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

🧪 2. प्रकार (Types)

  • Alzheimer’s Disease – सबसे आम प्रकार; मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक और टाउ प्रोटीन जमा होने के कारण।

    Vascular Dementia – मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट या स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क को नुकसान।

    Lewy Body Dementia – मस्तिष्क में Lewy body नामक प्रोटीन जमा होने से; इसमें भ्रम, झटके और नींद की समस्या हो सकती है।

    Frontotemporal Dementia – मस्तिष्क के फ्रंटल और टेम्पोरल लोब की कोशिकाओं के क्षरण से; व्यवहार में बदलाव पहले दिखते हैं।

    Mixed Dementia – जब एक से अधिक प्रकार साथ में मौजूद हों।

    Secondary Dementia – कुछ संक्रमणों, सिर की चोट, हॉर्मोनल असंतुलन या विटामिन की कमी के कारण भी डिमेंशिया जैसी स्थिति हो सकती है।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

हाल की बातें या घटनाएँ याद न रहना (Short-term memory loss)
बार-बार वही प्रश्न पूछना
रास्ता या जगह भूल जाना
निर्णय लेने या समस्या हल करने में कठिनाई
बोलने या सही शब्द ढूँढने में परेशानी
व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन या अवसाद
समय, तिथि या मौसम को लेकर भ्रम
नींद में गड़बड़ी
धीरे-धीरे दैनिक कार्यों (जैसे कपड़े पहनना, खाना खाना) में असमर्थता
Alzheimer’s में लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि Vascular Dementia में अचानक परिवर्तन दिख सकते हैं।

🧠 4. कारण (Causes)

  • मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति या प्रोटीन का असामान्य जमाव
    आनुवंशिक (Genetic) कारक
    उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, मधुमेह जैसी स्थितियाँ
    बार-बार सिर में चोट लगना
    संक्रमण (जैसे HIV, Syphilis), थायरॉयड रोग, विटामिन B12 की कमी
    अधिक शराब सेवन
    मानसिक रूप से सक्रिय न रहना और निष्क्रिय जीवनशैली

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

डिमेंशिया का पूर्ण रूप से रोकथाम संभव नहीं, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है:

नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि
मानसिक रूप से सक्रिय रहना — पढ़ना, खेलना, नई चीज़ें सीखना
सामाजिक रूप से जुड़े रहना और अकेलापन न होने देना
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना
धूम्रपान और शराब से परहेज़
पोषक आहार और पर्याप्त नींद
सिर की चोट से बचाव
नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेषकर उम्र बढ़ने पर

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

ताज़े फल और सब्ज़ियाँ — विशेषकर हरी पत्तेदार, बेरीज़, संतरा, सेब
साबुत अनाज, मूंग दाल, हल्का और सुपाच्य भोजन
हल्दी, अदरक, लहसुन — मस्तिष्क और रक्त संचार के लिए लाभकारी
अखरोट, बादाम, अलसी के बीज — ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर
गुनगुना पानी, नारियल पानी
दूध, घी और ब्राह्मी, शंखपुष्पी जैसे आयुर्वेदिक टॉनिक (वैद्य की सलाह से)
विटामिन B12 और D युक्त आहार 

❌ निषेध (Apthya)

प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स
अत्यधिक चीनी, मैदा और नमक
शराब और तंबाकू
बहुत तैलीय, मसालेदार या भारी भोजन
बार-बार गर्म किया गया या बासी खाना

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योग और प्राणायाम मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ाने, तनाव घटाने और मानसिक स्पष्टता में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से स्मरण शक्ति और मन की शांति में सुधार होता है।

लाभदायक आसन और अभ्यास:

वज्रासन – स्थिरता और ध्यान के लिए
सुखासन / पद्मासन – ध्यान और श्वसन अभ्यास के लिए
अनुलोम-विलोम प्राणायाम – मस्तिष्क में ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाता है
भ्रामरी प्राणायाम – मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी
त्राटक (दीपक पर ध्यान) – एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
योग निद्रा और ध्यान – तनाव घटाने और नींद सुधारने में सहायक
⏳ सुबह या शाम 15–20 मिनट नियमित अभ्यास करें।

🌿 8. आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)

आयुर्वेद में डिमेंशिया को “स्मृति भ्रंश” या “बुद्धि मंद्यता” की श्रेणी में रखा गया है। उपचार का उद्देश्य मस्तिष्क को पोषण देना, स्मृति शक्ति बढ़ाना और मानसिक स्थिरता प्रदान करना होता है।

स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध
तनाव घटाने और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक
इम्यूनिटी और मानसिक शक्ति में सहायक
दीर्घकालिक पोषण और स्मृति सुधार के लिए
मस्तिष्क को पोषण देने के लिए

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

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प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।



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