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DIABETIC NEPHROPATHY SUPPORT KIT

DIABETIC NEPHROPATHY SUPPORT KIT

Regular price Rs. 4,200.00 INR
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DIABETIC NEPHROPATHY SUPPORT KIT 

डायबिटीज से किडनी खराब होना सपोर्ट किट 

संक्षिप्त परिचय

Diabetic Nephropathy वह स्थिति है जिसमें लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर रहने से किडनी की छोटी रक्त–नलिकाएँ (glomeruli) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इससे यूरिन में प्रोटीन लीकेज (Proteinuria/Albuminuria) होने लगता है और धीरे-धीरे किडनी की क्षमता कम होकर CKD और ESRD तक पहुँच सकती है।

प्रकार (Stages)

Hyperfiltration Stage – शुरुआती समय में किडनी जरूरत से ज्यादा काम करती है।
Microalbuminuria Stage – यूरिन में 30–300 mg/day प्रोटीन।
Macroalbuminuria Stage – यूरिन में 300 mg/day से ज्यादा प्रोटीन।
Declining GFR Stage – किडनी फंक्शन लगातार गिरता है।
ESRD (End Stage Renal Disease) – Dialysis/Transplant की जरूरत।

लक्षण

शुरुआत में कोई लक्षण नहीं।
धीरे-धीरे पैरों/चेहरे में सूजन, यूरिन में झाग, कमजोरी, भूख कम, BP बढ़ना, रात में बार-बार यूरिन, पैर भारी, सांस फूलना, क्रिएटिनिन बढ़ना, घबराहट, हाथ-पैर में जलन/नसों में समस्या (Diabetic neuropathy के कारण)।

कारण

लंबे समय तक शुगर का High रहना
उच्च BP
मोटापा
कम शारीरिक सक्रियता
धूम्रपान
उच्च कोलेस्टेरॉल
आनुवंशिक प्रवृत्ति
फास्ट फूड, अधिक नमक वाला आहार
डायबिटीज दवा/इंसुलिन नियमित न लेना

बचाव के उपाय

Fasting शुगर 80–110 mg/dl, PP 120–160 mg/dl और HbA1c 6.5–7.0% के आसपास रखना
नमक कम
BP और शुगर की रोज मॉनिटरिंग
दिन में 30–40 मिनट वॉक
वजन नियंत्रित
धूम्रपान–शराब से दूर
गहरी नींद
प्रोसेस्ड फूड से बचना
नियमित KFT और माइक्रो-एल्ब्यूमिन यूरिन टेस्ट

डाइट चार्ट (Diabetes + Kidney Friendly Diet)

सुबह गुनगुना पानी, थोड़ी वॉक।
लो-ग्लाइसेमिक फूड: ओट्स, दलिया, मूंग खिचड़ी, मल्टीग्रेन रोटी।
सब्ज़ियाँ: लौकी, तुरई, परवल, टिंडा, गाजर, बीन्स (सीमित), ककड़ी।
दालें हल्की मात्रा में: मूंग दाल, मसूर दाल।
प्रोटीन सीमित: कम वसा वाला दूध, पनीर सीमित।
फल: सेब, अमरूद, पपीता, नाशपाती।
तेल: सरसों/ऑलिव/राइस ब्रान मिश्रित, बहुत कम मात्रा।
दिनभर पानी सही मात्रा में, ओवरवॉटरिंग न करें।
सोडियम, चीनी, तला हुआ भोजन, बेकरी से बचें।

अपथ्य (किन चीज़ों से बचें)

चीनी, मिठाई, सफेद ब्रेड, मैदा
अचार, नमकीन, चिप्स
पोटैशियम ज्यादा फल अगर eGFR कम (केला, नारियल पानी, संतरा)
फास्ट फूड
भारी प्रोटीन (चना, राजमा, सोया)
तला हुआ भोजन
कोल्ड ड्रिंक
अल्कोहल
बहुत ज्यादा चाय–कॉफी
पेनकिलर (NSAIDs)

योग–आसन

अनुलोम-विलोम, भ्रामरी
मंडूकासन (Sugar Control), वज्रासन
पवनमुक्तासन, बालासन
हल्के सूर्य नमस्कार (शुगर कंट्रोल के लिए)
कपालभाती हल्की गति
रोज 30–40 मिनट तेज वॉक
ध्यान और प्राणायाम तनाव घटाते हैं (इसके बिना डायबिटीज कंट्रोल मुश्किल)

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

 शुगर नियंत्रण व एंटीऑक्सीडेंट
sugar craving व control
शुगर कंट्रोल
किडनी सूजन कम
यूरिन मार्ग सपोर्ट
chronic kidney weakness
सूजन और toxins कम
BP व हृदय के लिए
digestion सुधारता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी, गोजला, बबूल, खदिर, अरणी, मेथी, नीम पत्र, करेला, करंज, वृद्ध दारुक, जामुनगिरी, गुड़मार, बिल्व पत्र, पिप्पली, गुलर, गम्भारी, गिलोय, शरपुंखा, तेजपत्ता, बिंभी, तुलसी, त्रिफला, विजयसार, काली मिर्च, निर्गुंडी जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
 

1. आयुर्वेदिक डाइबेक्स सिरप 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक नेफ्रोजिन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक नेफ्रोल कैप्सूल 2-2 दिन में दो बार लें।

4. भोजन से पहले दो चम्मच अंकुरित मेथी-बीज लें।

5. प्रतिदिन मीठी लौकी को भोजन में सब्जी के रूप में लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक (एसएफ) की 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

7.

प्रतिबंधित आहार- अचार, इमली, तला हुआ भोजन, मीठा, अधिक नमक। चावल, सिंघाड़ा, दालें, पालक, मशरूम, प्याज, भिंडी, चुकंदर, दही, टमाटर, बैंगन, चौलाई, सफेद हंस भोजन, नींबू, पत्तागोभी, गन्ने का रस, फलों का रस, मूंगफली, काजू और अन्य सूखे मेवे .

अनुशंसित आहार: करेला, ब्लैक-बेरी, खीरा, चना + गेहूं की रोटी, खजूर, अनार, सेब, पपीता, ककड़ी, हरी गेहूं घास का रस, मीठी लौकी, लौकी या (एंगल्ड लूफै़ण), शलजम, परवल, लहसुन , अदरक, धनिया, फूलगोभी, कद्दू का रस।

  • (मधुमेह के मामले में एलोपैथिक दवाएं अचानक बंद न करें। यदि आप इंजे इंसुलिन ले रहे हैं और यदि आपको गोमूत्र चिकित्सा से कुछ प्रतिक्रिया और राहत मिल रही है तो इंजेक्सन की खुराक कम करें। प्रति माह 1-3 मिलीग्राम तक इंसुलिन लें।

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Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation-07313599100

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डायबिटीज से किडनी खराब होना सपोर्ट किट 

संक्षिप्त परिचय

Diabetic Nephropathy वह स्थिति है जिसमें लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर रहने से किडनी की छोटी रक्त–नलिकाएँ (glomeruli) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इससे यूरिन में प्रोटीन लीकेज (Proteinuria/Albuminuria) होने लगता है और धीरे-धीरे किडनी की क्षमता कम होकर CKD और ESRD तक पहुँच सकती है।

प्रकार (Stages)

Hyperfiltration Stage – शुरुआती समय में किडनी जरूरत से ज्यादा काम करती है।
Microalbuminuria Stage – यूरिन में 30–300 mg/day प्रोटीन।
Macroalbuminuria Stage – यूरिन में 300 mg/day से ज्यादा प्रोटीन।
Declining GFR Stage – किडनी फंक्शन लगातार गिरता है।
ESRD (End Stage Renal Disease) – Dialysis/Transplant की जरूरत।

लक्षण

शुरुआत में कोई लक्षण नहीं।
धीरे-धीरे पैरों/चेहरे में सूजन, यूरिन में झाग, कमजोरी, भूख कम, BP बढ़ना, रात में बार-बार यूरिन, पैर भारी, सांस फूलना, क्रिएटिनिन बढ़ना, घबराहट, हाथ-पैर में जलन/नसों में समस्या (Diabetic neuropathy के कारण)।

कारण

लंबे समय तक शुगर का High रहना
उच्च BP
मोटापा
कम शारीरिक सक्रियता
धूम्रपान
उच्च कोलेस्टेरॉल
आनुवंशिक प्रवृत्ति
फास्ट फूड, अधिक नमक वाला आहार
डायबिटीज दवा/इंसुलिन नियमित न लेना

बचाव के उपाय

Fasting शुगर 80–110 mg/dl, PP 120–160 mg/dl और HbA1c 6.5–7.0% के आसपास रखना
नमक कम
BP और शुगर की रोज मॉनिटरिंग
दिन में 30–40 मिनट वॉक
वजन नियंत्रित
धूम्रपान–शराब से दूर
गहरी नींद
प्रोसेस्ड फूड से बचना
नियमित KFT और माइक्रो-एल्ब्यूमिन यूरिन टेस्ट

डाइट चार्ट (Diabetes + Kidney Friendly Diet)

सुबह गुनगुना पानी, थोड़ी वॉक।
लो-ग्लाइसेमिक फूड: ओट्स, दलिया, मूंग खिचड़ी, मल्टीग्रेन रोटी।
सब्ज़ियाँ: लौकी, तुरई, परवल, टिंडा, गाजर, बीन्स (सीमित), ककड़ी।
दालें हल्की मात्रा में: मूंग दाल, मसूर दाल।
प्रोटीन सीमित: कम वसा वाला दूध, पनीर सीमित।
फल: सेब, अमरूद, पपीता, नाशपाती।
तेल: सरसों/ऑलिव/राइस ब्रान मिश्रित, बहुत कम मात्रा।
दिनभर पानी सही मात्रा में, ओवरवॉटरिंग न करें।
सोडियम, चीनी, तला हुआ भोजन, बेकरी से बचें।

अपथ्य (किन चीज़ों से बचें)

चीनी, मिठाई, सफेद ब्रेड, मैदा
अचार, नमकीन, चिप्स
पोटैशियम ज्यादा फल अगर eGFR कम (केला, नारियल पानी, संतरा)
फास्ट फूड
भारी प्रोटीन (चना, राजमा, सोया)
तला हुआ भोजन
कोल्ड ड्रिंक
अल्कोहल
बहुत ज्यादा चाय–कॉफी
पेनकिलर (NSAIDs)

योग–आसन

अनुलोम-विलोम, भ्रामरी
मंडूकासन (Sugar Control), वज्रासन
पवनमुक्तासन, बालासन
हल्के सूर्य नमस्कार (शुगर कंट्रोल के लिए)
कपालभाती हल्की गति
रोज 30–40 मिनट तेज वॉक
ध्यान और प्राणायाम तनाव घटाते हैं (इसके बिना डायबिटीज कंट्रोल मुश्किल)

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

 शुगर नियंत्रण व एंटीऑक्सीडेंट
sugar craving व control
शुगर कंट्रोल
किडनी सूजन कम
यूरिन मार्ग सपोर्ट
chronic kidney weakness
सूजन और toxins कम
BP व हृदय के लिए
digestion सुधारता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी, गोजला, बबूल, खदिर, अरणी, मेथी, नीम पत्र, करेला, करंज, वृद्ध दारुक, जामुनगिरी, गुड़मार, बिल्व पत्र, पिप्पली, गुलर, गम्भारी, गिलोय, शरपुंखा, तेजपत्ता, बिंभी, तुलसी, त्रिफला, विजयसार, काली मिर्च, निर्गुंडी जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
 

1. आयुर्वेदिक डाइबेक्स सिरप 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक नेफ्रोजिन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक नेफ्रोल कैप्सूल 2-2 दिन में दो बार लें।

4. भोजन से पहले दो चम्मच अंकुरित मेथी-बीज लें।

5. प्रतिदिन मीठी लौकी को भोजन में सब्जी के रूप में लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक (एसएफ) की 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

7.

प्रतिबंधित आहार- अचार, इमली, तला हुआ भोजन, मीठा, अधिक नमक। चावल, सिंघाड़ा, दालें, पालक, मशरूम, प्याज, भिंडी, चुकंदर, दही, टमाटर, बैंगन, चौलाई, सफेद हंस भोजन, नींबू, पत्तागोभी, गन्ने का रस, फलों का रस, मूंगफली, काजू और अन्य सूखे मेवे .

अनुशंसित आहार: करेला, ब्लैक-बेरी, खीरा, चना + गेहूं की रोटी, खजूर, अनार, सेब, पपीता, ककड़ी, हरी गेहूं घास का रस, मीठी लौकी, लौकी या (एंगल्ड लूफै़ण), शलजम, परवल, लहसुन , अदरक, धनिया, फूलगोभी, कद्दू का रस।

  • (मधुमेह के मामले में एलोपैथिक दवाएं अचानक बंद न करें। यदि आप इंजे इंसुलिन ले रहे हैं और यदि आपको गोमूत्र चिकित्सा से कुछ प्रतिक्रिया और राहत मिल रही है तो इंजेक्सन की खुराक कम करें। प्रति माह 1-3 मिलीग्राम तक इंसुलिन लें।

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