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FEMALE SEXUAL DYSFUNCTION - SUPPORT KIT

FEMALE SEXUAL DYSFUNCTION - SUPPORT KIT

Regular price Rs. 4,700.00 INR
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FEMALE SEXUAL DYSFUNCTION - SUPPORT KIT 

महिलाओं में यौन विकार / कामेच्छा विकार - सपोर्ट किट 

संक्षिप्त परिचय:
Female Sexual Dysfunction (FSD) का अर्थ है – महिलाओं में यौन इच्छा, उत्तेजना, आनंद या संतुष्टि की कमी होना। यह शारीरिक, मानसिक या हार्मोनल कारणों से हो सकता है। यह कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक चिकित्सीय और उपचार योग्य स्थिति है जो वैवाहिक संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है।

प्रकार:

  1. Low Libido (कामेच्छा की कमी): यौन इच्छा या आकर्षण में कमी।

  2. Arousal Disorder (उत्तेजना विकार): यौन क्रिया के दौरान शारीरिक उत्तेजना न होना (जैसे योनि में सूखापन)।

  3. Orgasmic Disorder (परमसुख न मिलना): चरमसुख तक न पहुंच पाना या उसमें कठिनाई।

  4. Pain Disorder (दर्दयुक्त संभोग): यौन क्रिया के समय दर्द या असहजता।

लक्षण:

यौन इच्छा या आनंद का अभाव।
संभोग के दौरान दर्द या जलन।
योनि का सूखापन या कसाव।
थकान, तनाव या चिड़चिड़ापन।
साथी के प्रति आकर्षण में कमी।
यौन जीवन के प्रति उदासीनता या अपराधबोध।

मुख्य कारण:

हार्मोनल कारण: एस्ट्रोजन की कमी, रजोनिवृत्ति (Menopause), थायरॉयड असंतुलन।
मानसिक कारण: तनाव, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी, पिछला यौन आघात।
शारीरिक कारण: मधुमेह, मोटापा, प्रसव के बाद कमजोरी, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव।
जीवनशैली कारण: नींद की कमी, नशे की आदत, असंतुलित आहार और व्यायाम की कमी।
संबंध कारण: दाम्पत्य कलह, भावनात्मक दूरी या संवाद की कमी।

बचाव के उपाय:

  • नियमित योग, ध्यान और व्यायाम करें।
    तनाव और मानसिक दबाव से दूर रहें।
    साथी के साथ खुलेपन और संवाद बनाए रखें।
    पर्याप्त नींद लें और संतुलित दिनचर्या अपनाएँ।
    हार्मोनल जांच करवाएँ और प्राकृतिक उपचार अपनाएँ।
    खुद के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखें — यह बीमारी नहीं, शरीर का संकेत है संतुलन की आवश्यकता का।

डाइट चार्ट (उचित आहार):

सुबह गुनगुना पानी या आंवला रस।
नाश्ते में दूध, बादाम, अखरोट, केला, खजूर, शहद।
दोपहर में हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, दही।
शाम को फल — अनार, सेब, पपीता या नारियल पानी।
रात में हल्का भोजन — मूंग दाल, चपाती, दूध में शतावरी या अश्वगंधा चूर्ण।
पर्याप्त पानी पिएँ और आयरन, कैल्शियम, विटामिन E युक्त आहार लें।

अपथ्य (जिससे बचना चाहिए):

तंबाकू, शराब, चाय, कॉफी, फास्ट फूड।
अत्यधिक मिर्च-मसाले और तला हुआ भोजन।
देर रात तक जागना और नींद की कमी।
अश्लील सामग्री और नकारात्मक विचारों से दूरी।
स्वयं को अपराधबोध या तुलना में मत उलझाएँ।

योगासन:

भुजंगासन
बद्धकोणासन
सर्वांगासन
पश्चिमोत्तानासन
मंडूकासन
वज्रासन
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति)
ये आसन रक्तसंचार बढ़ाते हैं, पेल्विक क्षेत्र को सक्रिय करते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • महिला हार्मोन (एस्ट्रोजन) को संतुलित कर यौन इच्छा बढ़ाती है।
    गर्भाशय और प्रजनन तंत्र को मजबूत करता है।
    तनाव घटाकर मन और शरीर की ऊर्जा बढ़ाती है।
    शरीर में बल, ओज और यौन उत्तेजना को बढ़ाता है।
    यौन शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक।
    स्त्रीरोग संबंधित असंतुलन को नियंत्रित करता है।
    हार्मोनल संतुलन और रक्त शुद्धि में सहायक।

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला, कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, अकरकरा, अश्वगंधा, बड़ी इलायची, भीमसेनी कपूर, गिलोय, गोखरू, जायफल, कवच बीज, लॉंग, मुलैठी, मुसली, पीपली, शतावरी, शिलाजीत, सौंठ, विदारी कंद, विधारा,जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ  इलाज करें |

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन, किमोट्रिम,फॉर्टेक्स,थंडर सिरप 2-2  चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।



प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


 

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महिलाओं में यौन विकार / कामेच्छा विकार - सपोर्ट किट 

संक्षिप्त परिचय:
Female Sexual Dysfunction (FSD) का अर्थ है – महिलाओं में यौन इच्छा, उत्तेजना, आनंद या संतुष्टि की कमी होना। यह शारीरिक, मानसिक या हार्मोनल कारणों से हो सकता है। यह कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक चिकित्सीय और उपचार योग्य स्थिति है जो वैवाहिक संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है।

प्रकार:

  1. Low Libido (कामेच्छा की कमी): यौन इच्छा या आकर्षण में कमी।

  2. Arousal Disorder (उत्तेजना विकार): यौन क्रिया के दौरान शारीरिक उत्तेजना न होना (जैसे योनि में सूखापन)।

  3. Orgasmic Disorder (परमसुख न मिलना): चरमसुख तक न पहुंच पाना या उसमें कठिनाई।

  4. Pain Disorder (दर्दयुक्त संभोग): यौन क्रिया के समय दर्द या असहजता।

लक्षण:

यौन इच्छा या आनंद का अभाव।
संभोग के दौरान दर्द या जलन।
योनि का सूखापन या कसाव।
थकान, तनाव या चिड़चिड़ापन।
साथी के प्रति आकर्षण में कमी।
यौन जीवन के प्रति उदासीनता या अपराधबोध।

मुख्य कारण:

हार्मोनल कारण: एस्ट्रोजन की कमी, रजोनिवृत्ति (Menopause), थायरॉयड असंतुलन।
मानसिक कारण: तनाव, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी, पिछला यौन आघात।
शारीरिक कारण: मधुमेह, मोटापा, प्रसव के बाद कमजोरी, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव।
जीवनशैली कारण: नींद की कमी, नशे की आदत, असंतुलित आहार और व्यायाम की कमी।
संबंध कारण: दाम्पत्य कलह, भावनात्मक दूरी या संवाद की कमी।

बचाव के उपाय:

  • नियमित योग, ध्यान और व्यायाम करें।
    तनाव और मानसिक दबाव से दूर रहें।
    साथी के साथ खुलेपन और संवाद बनाए रखें।
    पर्याप्त नींद लें और संतुलित दिनचर्या अपनाएँ।
    हार्मोनल जांच करवाएँ और प्राकृतिक उपचार अपनाएँ।
    खुद के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखें — यह बीमारी नहीं, शरीर का संकेत है संतुलन की आवश्यकता का।

डाइट चार्ट (उचित आहार):

सुबह गुनगुना पानी या आंवला रस।
नाश्ते में दूध, बादाम, अखरोट, केला, खजूर, शहद।
दोपहर में हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, दही।
शाम को फल — अनार, सेब, पपीता या नारियल पानी।
रात में हल्का भोजन — मूंग दाल, चपाती, दूध में शतावरी या अश्वगंधा चूर्ण।
पर्याप्त पानी पिएँ और आयरन, कैल्शियम, विटामिन E युक्त आहार लें।

अपथ्य (जिससे बचना चाहिए):

तंबाकू, शराब, चाय, कॉफी, फास्ट फूड।
अत्यधिक मिर्च-मसाले और तला हुआ भोजन।
देर रात तक जागना और नींद की कमी।
अश्लील सामग्री और नकारात्मक विचारों से दूरी।
स्वयं को अपराधबोध या तुलना में मत उलझाएँ।

योगासन:

भुजंगासन
बद्धकोणासन
सर्वांगासन
पश्चिमोत्तानासन
मंडूकासन
वज्रासन
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति)
ये आसन रक्तसंचार बढ़ाते हैं, पेल्विक क्षेत्र को सक्रिय करते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • महिला हार्मोन (एस्ट्रोजन) को संतुलित कर यौन इच्छा बढ़ाती है।
    गर्भाशय और प्रजनन तंत्र को मजबूत करता है।
    तनाव घटाकर मन और शरीर की ऊर्जा बढ़ाती है।
    शरीर में बल, ओज और यौन उत्तेजना को बढ़ाता है।
    यौन शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक।
    स्त्रीरोग संबंधित असंतुलन को नियंत्रित करता है।
    हार्मोनल संतुलन और रक्त शुद्धि में सहायक।

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला, कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, अकरकरा, अश्वगंधा, बड़ी इलायची, भीमसेनी कपूर, गिलोय, गोखरू, जायफल, कवच बीज, लॉंग, मुलैठी, मुसली, पीपली, शतावरी, शिलाजीत, सौंठ, विदारी कंद, विधारा,जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ  इलाज करें |

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन, किमोट्रिम,फॉर्टेक्स,थंडर सिरप 2-2  चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।



प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


 

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