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GLIOMA - SUPPORT KIT

GLIOMA - SUPPORT KIT

Regular price Rs. 6,700.00 INR
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GLIOMA - SUPPORT KIT

ग्लियोमा - सपोर्ट किट 

🔹 संक्षिप्त परिचय

ग्लियोमा मस्तिष्क (Brain) या रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में बनने वाला एक प्रकार का ट्यूमर है, जो ग्लियल कोशिकाओं (Glial cells) से उत्पन्न होता है। ये कोशिकाएं मस्तिष्क की नसों की रक्षा और पोषण का काम करती हैं। यह एक प्राथमिक मस्तिष्क कैंसर है, जो धीरे-धीरे बढ़ सकता है या कभी-कभी बहुत आक्रामक भी हो सकता है।

🔹 प्रकार

Astrocytoma – एस्ट्रोसाइट नामक कोशिकाओं से बनने वाला, सामान्यतः मस्तिष्क के किसी भाग में धीमी गति से बढ़ने वाला।
Oligodendroglioma – ओलिगोडेन्ड्रोसाइट कोशिकाओं से उत्पन्न, जो माइलिन का निर्माण करती हैं।
Ependymoma – मस्तिष्क और स्पाइनल कोर्ड के वेंट्रिकल्स की परतों से बनने वाला ट्यूमर।
Glioblastoma Multiforme (GBM) – सबसे आक्रामक और घातक रूप, तीव्र गति से फैलने वाला।

🔹 लक्षण

लगातार सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय
मिचली या उल्टी
दृष्टि संबंधी समस्या (धुंधलापन, डबल विजन)
संतुलन खोना या चक्कर आना
बोलने या समझने में कठिनाई
शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नता
दौरे (Seizures)
व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव

🔹 कारण

आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic mutations)
रेडिएशन (Radiation) का अधिक संपर्क
पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों का प्रभाव
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
लंबी अवधि तक इलेक्ट्रॉनिक विकिरण के संपर्क में रहना (संदेहजनक कारण)

🔹 बचाव

अनावश्यक रेडिएशन से बचें
संतुलित जीवनशैली रखें — पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण
एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें
मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग
नियमित मेडिकल चेकअप अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है

🔹 डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से अनुकूल)

सुबह गुनगुना पानी में नींबू व शहद
नाश्ते में – ताजे फल (पपीता, सेब, अमरूद), अंकुरित मूंग
दोपहर – हरी सब्जियाँ (पालक, लौकी, तुरई), दाल, जौ या मल्टीग्रेन रोटी
शाम – नारियल पानी या तुलसी-अदरक की चाय
रात – हल्का सुपाच्य भोजन, मूंग खिचड़ी, सूप
बीच में – आंवला, एलोवेरा जूस, गिलोय रस

🔹 अपथ्य (क्या न खाएँ)

तले, मसालेदार और बासी भोजन
चीनी और सफेद मैदा
कोल्ड ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन
नॉनवेज और अधिक नमक
अत्यधिक तनाव या नींद की कमी

🔹 योगासन

शवासन – मन को शांति देता है
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी) – ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाता है
सुखासन, पद्मासन – तंत्रिका तंत्र को स्थिर करता है
अर्धमत्स्येन्द्रासन – रीढ़ की ऊर्जा संतुलित करता है
मेडिटेशन – मानसिक शांति और न्यूरोलॉजिकल संतुलन में सहायक



🔹 आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद में ग्लियोमा को “अर्बुद” या “मस्तिष्क में वृद्धि रोग” की श्रेणी में माना जाता है। उपचार का उद्देश्य दोष संतुलन, विषहरण (Detoxification) और प्रतिरक्षा सुदृढ़ीकरण होता है।

शरीर को पुनर्यौवन देने हेतु
मस्तिष्क कोशिकाओं को पोषण देता है
जीवन गुणवत्ता और मानसिक स्थिरता में बड़ा योगदान 

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा  जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक किमोट्रिम सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 4-4  चम्मच दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक एंसोक्योर कैप्सूल 2-2 दिन में दो बार लें।

5. सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालकर पिएँ । दूध में आधा आधा छोटा चम्मच  आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।

6. 31 तुलसी के पत्तों की चटनी बनाकर एक चम्मच शहद के साथ रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें

7. 2 -2 चम्मच आयुर्वेदिक फॉरटेक्स पाक दिन में दो बार लें।

8. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

9 . सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा  नाभि    क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

प्रतिबंधित आहार:- अचार, इमली, मसालेदार भोजन, शराब, धूम्रपान, तम्बाकू चबाना और अन्य नशीले पदार्थ, चीनी (शक्कर), मैदा, उड़द की दाल, बेसन, मिठाइयाँ, ठंडा और ठंडा पेय, भारतीय यान)

सुझाए गए आहार:- हरी पत्तेदार सब्जियां और जूस, दालचीनी, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, ब्लू  बेरी, ब्लैक  बेरी, फूलगोभी, नाशपाती, कद्दू, अदरक,सौंठ, धनिया, खीरा, प्याज, संतरा, नींबू, पपीता, शकरकंद, कीवी, हरी फलियाँ, लहसुन,जौ,मूँग,कुलथी,करेला,भिंडी,बादाम,पिस्ता,अखरोट,चिरोंजी,गेहूं,के,ज्वारे,का,रस,लौकी,पालक,टमाटर,अंगूर,चुकंदर,मेथी,हल्दी,गाजर,अनानास,मूली के पत्ते,आम,अनार,, सेब, नारियल पानी, किशमिश, मुनक्का, शहद, तरबूज, पत्तागोभी का सूप, ड्रम-स्टिक, आड़ू, बेर, बाजरा, काबुली चना, काजू, जामुन , ग्रे चावल, बैंगनी रतालू, अमरूद), केला (दिन में) गर्म पानी

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें। 

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Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation-07313599100

 

















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🔹 संक्षिप्त परिचय

ग्लियोमा मस्तिष्क (Brain) या रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में बनने वाला एक प्रकार का ट्यूमर है, जो ग्लियल कोशिकाओं (Glial cells) से उत्पन्न होता है। ये कोशिकाएं मस्तिष्क की नसों की रक्षा और पोषण का काम करती हैं। यह एक प्राथमिक मस्तिष्क कैंसर है, जो धीरे-धीरे बढ़ सकता है या कभी-कभी बहुत आक्रामक भी हो सकता है।

🔹 प्रकार

Astrocytoma – एस्ट्रोसाइट नामक कोशिकाओं से बनने वाला, सामान्यतः मस्तिष्क के किसी भाग में धीमी गति से बढ़ने वाला।
Oligodendroglioma – ओलिगोडेन्ड्रोसाइट कोशिकाओं से उत्पन्न, जो माइलिन का निर्माण करती हैं।
Ependymoma – मस्तिष्क और स्पाइनल कोर्ड के वेंट्रिकल्स की परतों से बनने वाला ट्यूमर।
Glioblastoma Multiforme (GBM) – सबसे आक्रामक और घातक रूप, तीव्र गति से फैलने वाला।

🔹 लक्षण

लगातार सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय
मिचली या उल्टी
दृष्टि संबंधी समस्या (धुंधलापन, डबल विजन)
संतुलन खोना या चक्कर आना
बोलने या समझने में कठिनाई
शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नता
दौरे (Seizures)
व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव

🔹 कारण

आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic mutations)
रेडिएशन (Radiation) का अधिक संपर्क
पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों का प्रभाव
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
लंबी अवधि तक इलेक्ट्रॉनिक विकिरण के संपर्क में रहना (संदेहजनक कारण)

🔹 बचाव

अनावश्यक रेडिएशन से बचें
संतुलित जीवनशैली रखें — पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण
एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें
मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग
नियमित मेडिकल चेकअप अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है

🔹 डाइट चार्ट (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से अनुकूल)

सुबह गुनगुना पानी में नींबू व शहद
नाश्ते में – ताजे फल (पपीता, सेब, अमरूद), अंकुरित मूंग
दोपहर – हरी सब्जियाँ (पालक, लौकी, तुरई), दाल, जौ या मल्टीग्रेन रोटी
शाम – नारियल पानी या तुलसी-अदरक की चाय
रात – हल्का सुपाच्य भोजन, मूंग खिचड़ी, सूप
बीच में – आंवला, एलोवेरा जूस, गिलोय रस

🔹 अपथ्य (क्या न खाएँ)

तले, मसालेदार और बासी भोजन
चीनी और सफेद मैदा
कोल्ड ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन
नॉनवेज और अधिक नमक
अत्यधिक तनाव या नींद की कमी

🔹 योगासन

शवासन – मन को शांति देता है
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, भ्रामरी) – ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाता है
सुखासन, पद्मासन – तंत्रिका तंत्र को स्थिर करता है
अर्धमत्स्येन्द्रासन – रीढ़ की ऊर्जा संतुलित करता है
मेडिटेशन – मानसिक शांति और न्यूरोलॉजिकल संतुलन में सहायक



🔹 आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद में ग्लियोमा को “अर्बुद” या “मस्तिष्क में वृद्धि रोग” की श्रेणी में माना जाता है। उपचार का उद्देश्य दोष संतुलन, विषहरण (Detoxification) और प्रतिरक्षा सुदृढ़ीकरण होता है।

शरीर को पुनर्यौवन देने हेतु
मस्तिष्क कोशिकाओं को पोषण देता है
जीवन गुणवत्ता और मानसिक स्थिरता में बड़ा योगदान 

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा  जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक किमोट्रिम सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 4-4  चम्मच दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक एंसोक्योर कैप्सूल 2-2 दिन में दो बार लें।

5. सुबह और शाम एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर उबालकर पिएँ । दूध में आधा आधा छोटा चम्मच  आयुर्वेदिक टोनर लिक्विड मिलाएं।

6. 31 तुलसी के पत्तों की चटनी बनाकर एक चम्मच शहद के साथ रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें

7. 2 -2 चम्मच आयुर्वेदिक फॉरटेक्स पाक दिन में दो बार लें।

8. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

9 . सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा  नाभि    क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

प्रतिबंधित आहार:- अचार, इमली, मसालेदार भोजन, शराब, धूम्रपान, तम्बाकू चबाना और अन्य नशीले पदार्थ, चीनी (शक्कर), मैदा, उड़द की दाल, बेसन, मिठाइयाँ, ठंडा और ठंडा पेय, भारतीय यान)

सुझाए गए आहार:- हरी पत्तेदार सब्जियां और जूस, दालचीनी, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, ब्लू  बेरी, ब्लैक  बेरी, फूलगोभी, नाशपाती, कद्दू, अदरक,सौंठ, धनिया, खीरा, प्याज, संतरा, नींबू, पपीता, शकरकंद, कीवी, हरी फलियाँ, लहसुन,जौ,मूँग,कुलथी,करेला,भिंडी,बादाम,पिस्ता,अखरोट,चिरोंजी,गेहूं,के,ज्वारे,का,रस,लौकी,पालक,टमाटर,अंगूर,चुकंदर,मेथी,हल्दी,गाजर,अनानास,मूली के पत्ते,आम,अनार,, सेब, नारियल पानी, किशमिश, मुनक्का, शहद, तरबूज, पत्तागोभी का सूप, ड्रम-स्टिक, आड़ू, बेर, बाजरा, काबुली चना, काजू, जामुन , ग्रे चावल, बैंगनी रतालू, अमरूद), केला (दिन में) गर्म पानी

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें। 

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