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HEPATITIS C - SUPPORT KIT

HEPATITIS C - SUPPORT KIT

Regular price Rs. 3,100.00 INR
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HEPATITIS C - SUPPORT KIT

हेपेटाइटिस C - सपोर्ट किट 

🧠 1. परिचय (Introduction)

Hepatitis C एक वायरल संक्रमण है जो Hepatitis C Virus (HCV) के कारण होता है।
यह संक्रमण मुख्य रूप से यकृत (लिवर) को प्रभावित करता है और यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में परिवर्तित हो सकता है।

👉 HCV संक्रमण प्रायः रक्त के संपर्क से फैलता है।
👉 इसकी सबसे बड़ी विशेषता है —अक्सर वर्षों तक कोई लक्षण नहीं होते, पर अंदर ही अंदर लिवर को धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है।

🧪 2. प्रकार (Types)

प्रकार

विवरण

🟡 Acute Hepatitis C

संक्रमण के शुरुआती 6 महीनों का चरण। कुछ मामलों में शरीर खुद वायरस खत्म कर देता है।

🔵 Chronic Hepatitis C

यदि वायरस 6 महीनों से अधिक बना रहे तो यह दीर्घकालिक रूप है। अधिकांश मामलों में यही होता है।

🚨 3. लक्षण (Symptoms)

Hepatitis C में शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं 👇

प्रारंभिक लक्षण:

थकान, कमजोरी
हल्का बुखार
भूख कम लगना
मतली या उल्टी
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द
हल्का पीलिया (कुछ मामलों में)

दीर्घकालिक संक्रमण (Chronic stage) में:

लगातार थकान
वजन घटना
जोड़ों में दर्द
त्वचा पर खुजली या रैशेज
पेट में पानी भरना (Ascites) — सिरोसिस की स्थिति में
पीलिया व लिवर फंक्शन बिगड़ना

🧭 4. कारण (Causes / Transmission)

HCV संक्रमण मुख्यतः संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है 👇

संक्रमित सुई, इंजेक्शन, ब्लड ट्रांसफ्यूज़न
संक्रमित ब्लेड / टैटू / पियर्सिंग से
असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं से
संक्रमित माँ से बच्चे को (कम संभावना)
संक्रमित व्यक्ति के खुले घाव से संपर्क
🧍♂️ सामान्य छूने, साथ बैठने, खाने से या हवा से नहीं फैलता।

🛡 5. बचाव (Prevention)

👉 Hepatitis C के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए रोकथाम बहुत ज़रूरी है👇

केवल सुरक्षित, स्टरलाइज्ड सुई और उपकरण का प्रयोग
ब्लड ट्रांसफ्यूज़न से पहले पूरी स्क्रिनिंग
असुरक्षित टैटू या पियर्सिंग से बचाव
यौन संबंधों में सावधानी (Barrier methods)
संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क से बचना
चिकित्सा उपकरणों को ठीक से डिसइंफेक्ट करना

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Plan)

Hepatitis C में लिवर को Regenerate करने और इंफ्लेमेशन कम करने वाला भोजन लेना चाहिए 👇

✅ अनुशंसित आहार (Pathya)

गुनगुना पानी, नींबू पानी
हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन
हरी सब्जियाँ (लौकी, तोरी, परवल, पालक)
ताज़े फल — पपीता, अमरूद, सेब, तरबूज
मूंग दाल, दलिया, खिचड़ी
ब्राउन राइस / गेहूं / ओट्स
नारियल पानी, छाछ, ग्रीन टी
हल्दी और अदरक की सीमित मात्रा (Anti-inflammatory)

❌ अपथ्य (Avoid)

शराब 🍷 — लिवर के लिए सबसे हानिकारक
रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट
तला-भुना, मसालेदार, बहुत नमकीन खाना
पैकेट फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स
अधिक चीनी और मैदा उत्पाद
अनियमित भोजन या उपवास से बचें

🧘♂️ 7. योगासन (Yoga Asanas)

भुजंगासन (Cobra Pose) — लिवर को सक्रिय करता है
अर्धमत्स्येन्द्रासन — लिवर की मालिश जैसा प्रभाव
पवनमुक्तासन — पेट की जकड़न दूर करता है
वज्रासन — पाचन सुधारता है
अनुलोम-विलोम / कपालभाति — शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने में सहायक

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद में हेपेटाइटिस C को यकृत दोष व कामला (पीलिया) की श्रेणी में माना गया है।
इलाज का उद्देश्य 👇

लिवर को शुद्ध व मजबूत करना
विषाक्त पदार्थ निकालना
इम्यून सिस्टम को सशक्त करना
वायरल एक्टिविटी को कम करना

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ चूर्ण, भृंगराज, तुलसी, बेहड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, रोहितका, कुटकी, भूई आंवला, अर्जुन, गिलोय, काकमाची, हल्दी, घृतकुमारी, हिमसारा, कसानी, पित्तपापड़ा,गोजला सांद्र   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज करें 


1. आयुर्वेदिक हेपोरिल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक गोअमृत सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. छिलके सहित लौकी को जूस या सूप के रूप में + थोड़ी मात्रा में काली मिर्च + रोजाना लें।  सोंठ+तुलसी के 5-5 पत्ते+पुदीना (पुदीना का पौधा)।

5. तुलसी की चटनी के इकतीस पत्तों को एक चाय के चम्मच शहद के साथ लें। सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, चाय, मिठाई, सरसों, चावल, बड़े राजमा, दाल, मसाले, आलू, लिंग।

अनुचित आहार: जौ, मूंग, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यूमेलन, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, तुलसी +शहद, चावल, मैश, खिचड़ी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, मीठी लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, बटर लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, खजूर, ताजा छना हुआ गौमूत्र 50-50 मिलीलीटर सुबह-शाम लें, किशमिश, किशमिश, रसगुल्ला, काली बेरी, बोखरा बेर, लीची, बीटरूट, खरबूजा।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

 

View full details

HEPATITIS C - SUPPORT KIT

हेपेटाइटिस C - सपोर्ट किट 

🧠 1. परिचय (Introduction)

Hepatitis C एक वायरल संक्रमण है जो Hepatitis C Virus (HCV) के कारण होता है।
यह संक्रमण मुख्य रूप से यकृत (लिवर) को प्रभावित करता है और यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में परिवर्तित हो सकता है।

👉 HCV संक्रमण प्रायः रक्त के संपर्क से फैलता है।
👉 इसकी सबसे बड़ी विशेषता है —अक्सर वर्षों तक कोई लक्षण नहीं होते, पर अंदर ही अंदर लिवर को धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है।

🧪 2. प्रकार (Types)

प्रकार

विवरण

🟡 Acute Hepatitis C

संक्रमण के शुरुआती 6 महीनों का चरण। कुछ मामलों में शरीर खुद वायरस खत्म कर देता है।

🔵 Chronic Hepatitis C

यदि वायरस 6 महीनों से अधिक बना रहे तो यह दीर्घकालिक रूप है। अधिकांश मामलों में यही होता है।

🚨 3. लक्षण (Symptoms)

Hepatitis C में शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं 👇

प्रारंभिक लक्षण:

थकान, कमजोरी
हल्का बुखार
भूख कम लगना
मतली या उल्टी
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द
हल्का पीलिया (कुछ मामलों में)

दीर्घकालिक संक्रमण (Chronic stage) में:

लगातार थकान
वजन घटना
जोड़ों में दर्द
त्वचा पर खुजली या रैशेज
पेट में पानी भरना (Ascites) — सिरोसिस की स्थिति में
पीलिया व लिवर फंक्शन बिगड़ना

🧭 4. कारण (Causes / Transmission)

HCV संक्रमण मुख्यतः संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है 👇

संक्रमित सुई, इंजेक्शन, ब्लड ट्रांसफ्यूज़न
संक्रमित ब्लेड / टैटू / पियर्सिंग से
असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं से
संक्रमित माँ से बच्चे को (कम संभावना)
संक्रमित व्यक्ति के खुले घाव से संपर्क
🧍♂️ सामान्य छूने, साथ बैठने, खाने से या हवा से नहीं फैलता।

🛡 5. बचाव (Prevention)

👉 Hepatitis C के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए रोकथाम बहुत ज़रूरी है👇

केवल सुरक्षित, स्टरलाइज्ड सुई और उपकरण का प्रयोग
ब्लड ट्रांसफ्यूज़न से पहले पूरी स्क्रिनिंग
असुरक्षित टैटू या पियर्सिंग से बचाव
यौन संबंधों में सावधानी (Barrier methods)
संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क से बचना
चिकित्सा उपकरणों को ठीक से डिसइंफेक्ट करना

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Plan)

Hepatitis C में लिवर को Regenerate करने और इंफ्लेमेशन कम करने वाला भोजन लेना चाहिए 👇

✅ अनुशंसित आहार (Pathya)

गुनगुना पानी, नींबू पानी
हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन
हरी सब्जियाँ (लौकी, तोरी, परवल, पालक)
ताज़े फल — पपीता, अमरूद, सेब, तरबूज
मूंग दाल, दलिया, खिचड़ी
ब्राउन राइस / गेहूं / ओट्स
नारियल पानी, छाछ, ग्रीन टी
हल्दी और अदरक की सीमित मात्रा (Anti-inflammatory)

❌ अपथ्य (Avoid)

शराब 🍷 — लिवर के लिए सबसे हानिकारक
रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट
तला-भुना, मसालेदार, बहुत नमकीन खाना
पैकेट फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स
अधिक चीनी और मैदा उत्पाद
अनियमित भोजन या उपवास से बचें

🧘♂️ 7. योगासन (Yoga Asanas)

भुजंगासन (Cobra Pose) — लिवर को सक्रिय करता है
अर्धमत्स्येन्द्रासन — लिवर की मालिश जैसा प्रभाव
पवनमुक्तासन — पेट की जकड़न दूर करता है
वज्रासन — पाचन सुधारता है
अनुलोम-विलोम / कपालभाति — शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने में सहायक

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

आयुर्वेद में हेपेटाइटिस C को यकृत दोष व कामला (पीलिया) की श्रेणी में माना गया है।
इलाज का उद्देश्य 👇

लिवर को शुद्ध व मजबूत करना
विषाक्त पदार्थ निकालना
इम्यून सिस्टम को सशक्त करना
वायरल एक्टिविटी को कम करना

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ चूर्ण, भृंगराज, तुलसी, बेहड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, रोहितका, कुटकी, भूई आंवला, अर्जुन, गिलोय, काकमाची, हल्दी, घृतकुमारी, हिमसारा, कसानी, पित्तपापड़ा,गोजला सांद्र   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज करें 


1. आयुर्वेदिक हेपोरिल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक गोअमृत सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. छिलके सहित लौकी को जूस या सूप के रूप में + थोड़ी मात्रा में काली मिर्च + रोजाना लें।  सोंठ+तुलसी के 5-5 पत्ते+पुदीना (पुदीना का पौधा)।

5. तुलसी की चटनी के इकतीस पत्तों को एक चाय के चम्मच शहद के साथ लें। सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, चाय, मिठाई, सरसों, चावल, बड़े राजमा, दाल, मसाले, आलू, लिंग।

अनुचित आहार: जौ, मूंग, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यूमेलन, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, तुलसी +शहद, चावल, मैश, खिचड़ी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, मीठी लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, बटर लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, खजूर, ताजा छना हुआ गौमूत्र 50-50 मिलीलीटर सुबह-शाम लें, किशमिश, किशमिश, रसगुल्ला, काली बेरी, बोखरा बेर, लीची, बीटरूट, खरबूजा।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

 

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