
KIDNEY INFECTION (PYELONEPHRITIS) SUPPORT KIT
पायलोनेफ्राइटिस सपोर्ट किट
यह किडनी में होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो आमतौर पर मूत्र मार्ग (UTI) से ऊपर की तरफ फैलकर किडनी तक पहुँचता है। समय पर इलाज न होने पर यह किडनी फेलियर या सीप्सिस का कारण बन सकता है, इसलिए तत्काल उपचार आवश्यक है।
प्रकार
Acute Pyelonephritis (तीव्र) – अचानक तेज बुखार, दर्द, जलन; जल्दी उपचार से ठीक हो जाता है।
Chronic Pyelonephritis (दीर्घकालीन) – बार-बार किडनी इंफेक्शन होने से किडनी में स्थायी नुकसान।
लक्षण
तेज बुखार, ठंड लगना
पीठ या कमर के पीछे एक तरफ तेज दर्द
पेशाब में जलन
बार-बार पेशाब आना
पेशाब में बदबू, मटमैला रंग, कभी खून
उल्टी, मितली
थकान, कमजोरी
बच्चों और बुजुर्गों में कभी बुखार नहीं आता—सिर्फ कमजोरी
मुख्य कारण
UTI संक्रमण का किडनी तक फैल जाना
पानी कम पीना
बार-बार यूरिन रोके रखना
महिलाओं में मूत्रमार्ग छोटा होने से संक्रमण जल्दी
किडनी स्टोन
डायबिटीज
कमजोर इम्यून सिस्टम
इंडवेलिंग कैथेटर
गर्भावस्था
बार-बार एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस
बचाव
पर्याप्त पानी पीना
पेशाब कभी न रोकना
स्वच्छता का ध्यान
सेक्स के बाद पेशाब करना (संक्रमण कम करता है)
शुगर नियंत्रण
यदि स्टोन हैं, तो समय पर उपचार
प्रतिरक्षा मजबूत रखना
बार-बार UTI होने पर नियमित यूरिन जांच
डाइट चार्ट (किडनी इंफेक्शन में उपयुक्त)
सुबह: गुनगुना पानी + तुलसी/गिलोय
नाश्ता: हल्का दलिया/पोहा/मूंग चीला
मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी / बेल का शर्बत
दोपहर:लौकी, तोरई, कद्दू, परवल जैसी आसानी से पचने वाली सब्जियाँ
1–2 रोटी,खिचड़ी (यदि कमजोरी है)
शाम: मोरिंगा चाय, हर्बल टी
रात: हल्की सब्जी, खिचड़ी या दाल का पानी
सोने से पहले: गर्म पानी
अपथ्य (क्या न लें)
तीखा, मसालेदार, तला-भुना
चीनी, जंक फूड
सोडा, कोल्ड ड्रिंक
शराब, धूम्रपान
कैफीन (कॉफी) ज्यादा
बहुत खट्टी चीजें
चिकन, लाल मांस (इंफेक्शन में पचता नहीं)
बिना डॉक्टरी सलाह के दर्द की दवा NSAIDs
योगासन
ताड़ासन
पवनमुक्तासन
भुजंगासन
मकरासन
वज्रासन
प्राणायाम: धीमी श्वास, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम
आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी
मूत्रमार्ग शोधन
UTI + सूजन के लिए
इंफ्लेमेशन नियंत्रण
सूजन, यूरिन फ्लो सुधार
संक्रमण व इम्यूनिटी
एंटीमाइक्रोबियल + शोधन
एंटी-इंफ्लेमेटरी
आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन
आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी, आंवला , अपामार्, अश्वगंधा , भृंगराज , भुई आंवला , गिलोय , गोखरू, कटसरैया , केवांच बीज , खस , कुल्थी , मेहंदी , पाषाणभेद , पुनर्नवा , शतावरी , सौंफ,गोजला सांद्र जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
1. आयुर्वेदिक नेफ्रोजिन सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।
2. आयुर्वेदिक नेफ्रोल कैप्सूल 1- 1 दिन में दो बार लें।
3. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक 1 - 1 चम्मच दिन में दो बार लें।
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