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LIVER ABSCESS - SUPPORT KIT) (Copy)

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LIVER ABSCESS - SUPPORT KIT

लीवर में फोड़ा - सपोर्ट किट 

🩺 1. परिचय (Introduction)

Liver Abscess यानी यकृत फोड़ा एक ऐसी स्थिति है जिसमें लीवर के अंदर मवाद (pus) का एक या एक से अधिक गुहा बन जाती है। यह संक्रमण के कारण होता है और यदि समय पर इलाज न हो तो जानलेवा भी हो सकता है।भारत में इसके दो प्रमुख प्रकार सबसे ज़्यादा पाए जाते हैं:

Amoebic Liver Abscess – यह Entamoeba histolytica नामक परजीवी से होता है।
Pyogenic Liver Abscess – यह बैक्टीरिया जैसे E. coli, Klebsiella या Streptococcus से होता है।

इसके अलावा कुछ दुर्लभ मामलों में Fungal Abscess (Candida आदि) और Traumatic Abscess (चोट या सर्जरी के बाद संक्रमण) भी हो सकते हैं।

🧪 2. प्रकार (Types)

Amoebic Abscess – भारत में सबसे आम प्रकार। आमतौर पर लीवर के दाएँ हिस्से में होता है।
Pyogenic Abscess – बैक्टीरियल संक्रमण के कारण। बुजुर्गों और इम्यूनिटी कमज़ोर लोगों में ज़्यादा।
Fungal Abscess – बहुत कम, लेकिन गंभीर इम्यूनो-कम्प्रोमाइज़्ड व्यक्तियों में पाया जा सकता है।
Traumatic/Post-surgical – चोट या ऑपरेशन के बाद संक्रमण से।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

तेज़ या लगातार बुखार
पेट के दाएँ ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
भूख में कमी और वजन घटना
मतली और उल्टी
थकान और कमजोरी
कभी-कभी पीलिया (जॉन्डिस)
गंभीर मामलों में मवाद का संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है (सेप्सिस)

🦠 4. कारण (Causes)

दूषित पानी या भोजन से अमीबिक संक्रमण
आंतों में संक्रमण जो लीवर तक पहुँच जाता है
गॉल ब्लैडर या पेट के संक्रमण का लीवर में फैलना
डायबिटीज या इम्यूनिटी का कम होना
पेट की सर्जरी या चोट के बाद संक्रमण

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

हमेशा साफ़, फ़िल्टर किया हुआ या उबला पानी पीएँ
बिना धोए फल-सब्ज़ियाँ न खाएँ
नियमित रूप से हाथ धोएँ और व्यक्तिगत स्वच्छता रखें
खुले में शौच से बचें और दूषित जल स्रोतों से दूर रहें
पेट के किसी भी संक्रमण का समय पर इलाज कराएँ
इम्यूनिटी मज़बूत रखने के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

गुनगुना पानी और नारियल पानी
हल्की खिचड़ी, दलिया और मूंग की दाल
स्टीम या उबली हुई सब्ज़ियाँ, कम तेल-घी में
मौसमी फल जैसे सेब, पपीता, अनार (छिले और धोए हुए)
थोड़ी मात्रा में दही या छाछ
हल्दी, अदरक और लहसुन का सीमित उपयोग
शुद्ध देशी घी (थोड़ी मात्रा में)

❌ निषेध (Apthya)

तला-भुना और मसालेदार भोजन
शराब और नशीले पदार्थ
रेड मीट और बाहर का दूषित खाना
ठंडे पेय और आइसक्रीम
चीनी और मैदे से बनी चीज़ें
अधपका या सड़क किनारे का खाना

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योगासन संक्रमण के सक्रिय चरण में न करें, केवल रिकवरी (ठीक होने) के बाद हल्के योगासन उपयोगी हैं।

लाभदायक आसन:

सुप्त बद्ध कोणासन – पेट पर दबाव कम करता है।
पवनमुक्तासन – पाचन में सुधार करता है।
भुजंगासन – लीवर क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाता है।
वज्रासन – भोजन के बाद बैठना पाचन को सहायता देता है।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति (हल्के रूप में) – श्वसन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए।

प्रत्येक आसन को 2–5 मिनट तक धीरे-धीरे करें, ज़बरदस्ती नहीं।

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

गंभीर मामलों में एलोपैथिक इलाज (एंटीबायोटिक, ड्रेनेज) अनिवार्य होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा सहायक रूप में की जाती है, योग्य वैद्य की सलाह से।

लीवर की शुद्धि में सहायक
लीवर कार्य सुधारने में उपयोगी
संक्रमण और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक केमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. तुलसी की इकतीस पत्तियों का रस निचोड़ लें और उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला लें।

      इसे रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

6.

—----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, प्याज, मिर्च पालक, टमाटर, पत्तागोभी, बैंगन, मशरूम, पनीर, चीकू, काले चने, सूखे मेवे , भिंडी, सफेद हंस भोजन, मटर।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, दाल, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यू तरबूज, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, तुलसी + शहद, चावल, मैश, खिचरी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, 50-50 लें ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम एक मिलीलीटर।


































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LIVER ABSCESS - SUPPORT KIT

लीवर में फोड़ा - सपोर्ट किट 

🩺 1. परिचय (Introduction)

Liver Abscess यानी यकृत फोड़ा एक ऐसी स्थिति है जिसमें लीवर के अंदर मवाद (pus) का एक या एक से अधिक गुहा बन जाती है। यह संक्रमण के कारण होता है और यदि समय पर इलाज न हो तो जानलेवा भी हो सकता है।भारत में इसके दो प्रमुख प्रकार सबसे ज़्यादा पाए जाते हैं:

Amoebic Liver Abscess – यह Entamoeba histolytica नामक परजीवी से होता है।
Pyogenic Liver Abscess – यह बैक्टीरिया जैसे E. coli, Klebsiella या Streptococcus से होता है।

इसके अलावा कुछ दुर्लभ मामलों में Fungal Abscess (Candida आदि) और Traumatic Abscess (चोट या सर्जरी के बाद संक्रमण) भी हो सकते हैं।

🧪 2. प्रकार (Types)

Amoebic Abscess – भारत में सबसे आम प्रकार। आमतौर पर लीवर के दाएँ हिस्से में होता है।
Pyogenic Abscess – बैक्टीरियल संक्रमण के कारण। बुजुर्गों और इम्यूनिटी कमज़ोर लोगों में ज़्यादा।
Fungal Abscess – बहुत कम, लेकिन गंभीर इम्यूनो-कम्प्रोमाइज़्ड व्यक्तियों में पाया जा सकता है।
Traumatic/Post-surgical – चोट या ऑपरेशन के बाद संक्रमण से।

⚠️ 3. लक्षण (Symptoms)

तेज़ या लगातार बुखार
पेट के दाएँ ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
भूख में कमी और वजन घटना
मतली और उल्टी
थकान और कमजोरी
कभी-कभी पीलिया (जॉन्डिस)
गंभीर मामलों में मवाद का संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है (सेप्सिस)

🦠 4. कारण (Causes)

दूषित पानी या भोजन से अमीबिक संक्रमण
आंतों में संक्रमण जो लीवर तक पहुँच जाता है
गॉल ब्लैडर या पेट के संक्रमण का लीवर में फैलना
डायबिटीज या इम्यूनिटी का कम होना
पेट की सर्जरी या चोट के बाद संक्रमण

🛡️ 5. बचाव (Prevention)

हमेशा साफ़, फ़िल्टर किया हुआ या उबला पानी पीएँ
बिना धोए फल-सब्ज़ियाँ न खाएँ
नियमित रूप से हाथ धोएँ और व्यक्तिगत स्वच्छता रखें
खुले में शौच से बचें और दूषित जल स्रोतों से दूर रहें
पेट के किसी भी संक्रमण का समय पर इलाज कराएँ
इम्यूनिटी मज़बूत रखने के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें

🥗 6. डाइट चार्ट (Diet Chart)

✅ सेवन योग्य (Pathya)

गुनगुना पानी और नारियल पानी
हल्की खिचड़ी, दलिया और मूंग की दाल
स्टीम या उबली हुई सब्ज़ियाँ, कम तेल-घी में
मौसमी फल जैसे सेब, पपीता, अनार (छिले और धोए हुए)
थोड़ी मात्रा में दही या छाछ
हल्दी, अदरक और लहसुन का सीमित उपयोग
शुद्ध देशी घी (थोड़ी मात्रा में)

❌ निषेध (Apthya)

तला-भुना और मसालेदार भोजन
शराब और नशीले पदार्थ
रेड मीट और बाहर का दूषित खाना
ठंडे पेय और आइसक्रीम
चीनी और मैदे से बनी चीज़ें
अधपका या सड़क किनारे का खाना

🧘 7. योगासन (Yogasana)

योगासन संक्रमण के सक्रिय चरण में न करें, केवल रिकवरी (ठीक होने) के बाद हल्के योगासन उपयोगी हैं।

लाभदायक आसन:

सुप्त बद्ध कोणासन – पेट पर दबाव कम करता है।
पवनमुक्तासन – पाचन में सुधार करता है।
भुजंगासन – लीवर क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाता है।
वज्रासन – भोजन के बाद बैठना पाचन को सहायता देता है।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति (हल्के रूप में) – श्वसन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए।

प्रत्येक आसन को 2–5 मिनट तक धीरे-धीरे करें, ज़बरदस्ती नहीं।

🌿 8. आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

गंभीर मामलों में एलोपैथिक इलाज (एंटीबायोटिक, ड्रेनेज) अनिवार्य होता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा सहायक रूप में की जाती है, योग्य वैद्य की सलाह से।

लीवर की शुद्धि में सहायक
लीवर कार्य सुधारने में उपयोगी
संक्रमण और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ,पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक हिपोरील सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक केमोट्रिम सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक हेप्टोन-बी कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. तुलसी की इकतीस पत्तियों का रस निचोड़ लें और उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला लें।

      इसे रोजाना सुबह 10.00 बजे और शाम 4.00 बजे लें।

5. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

6.

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प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, अचार, इमली, तला हुआ भोजन, हींग, शारीरिक परिश्रम, धूप, काले चने, खजूर, प्याज, मिर्च पालक, टमाटर, पत्तागोभी, बैंगन, मशरूम, पनीर, चीकू, काले चने, सूखे मेवे , भिंडी, सफेद हंस भोजन, मटर।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, दाल, नारियल पानी, अंकुरित हरे गेहूं का रस, पपीता, पका हुआ केला + शहद, हनीड्यू तरबूज, अंगूर, गन्ना, मूली के पत्ते, सेब, संतरा, अंकुरित अनाज, तुलसी + शहद, चावल, मैश, खिचरी, बाजरा, साबूदाना+दूध, अरारोट, गन्ने का रस, मूली, लौकी, करेला, पुदीना, फूलगोभी, पालक, धनिया, मेथी, लौकी, गाजर, लहसुन, हरड़, चीकू, 50-50 लें ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह-शाम एक मिलीलीटर।


































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