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MENINGIOMA - SUPPORT KIT

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MENINGIOMA - SUPPORT KIT 

मेनिंजियोमा - सपोर्ट किट 

 मेनिंजियोमा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को घेरे हुई झिल्लियों (Meninges) से उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का ट्यूमर है। अधिकांश मामलों में यह धीरे-धीरे बढ़ने वाला और गैर-कैंसरकारी (Benign) होता है, लेकिन इसकी स्थिति और आकार बढ़ने पर यह मस्तिष्क या नसों पर दबाव डालकर गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह घातक (Malignant) भी हो सकता है।

प्रकार:

  1. ग्रेड I (Benign Meningioma):
    सबसे सामान्य, धीरे-धीरे बढ़ता है और सर्जरी से अक्सर पूरी तरह निकाला जा सकता है।

    ग्रेड II (Atypical Meningioma):
    तेज़ी से बढ़ता है और पुनः होने की संभावना अधिक।

    ग्रेड III (Malignant/Anaplastic Meningioma):
    दुर्लभ लेकिन आक्रामक प्रकार, आसपास के ऊतकों में फैल सकता है।

    स्थान के आधार पर प्रकार:

    Convexity meningioma (मस्तिष्क की बाहरी सतह पर)

    Parasagittal/falx meningioma (मस्तिष्क की मध्य रेखा के पास)

    Skull base meningioma (खोपड़ी के निचले भाग में)

    Spinal meningioma (रीढ़ के पास)

    लक्षण:

    (लक्षण ट्यूमर के स्थान और आकार पर निर्भर करते हैं)

    सिरदर्द, जो धीरे-धीरे बढ़ता है
    मतली, उल्टी
    दृष्टि में धुंधलापन या दोहरी दृष्टि
    स्मरणशक्ति, एकाग्रता या सोचने की क्षमता में कमी
    दौरे (Seizures)
    हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन
    बोलने या समझने में कठिनाई
    संतुलन या समन्वय में कमी
    व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन (कभी-कभी)

    कारण:

    • जेनेटिक परिवर्तन (Genetic mutations): NF2 जीन में बदलाव प्रमुख कारणों में से एक है।
      रेडिएशन एक्सपोजर: सिर पर पूर्व में रेडिएशन थेरेपी लेना।
      हार्मोनल प्रभाव: महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है — एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन का प्रभाव माना जाता है।
      आयु: अधिकतर मामलों में 40 वर्ष से ऊपर।
      परिवार में इतिहास: कुछ दुर्लभ आनुवांशिक सिंड्रोम जैसे Neurofibromatosis type 2।

    बचाव:

    अनावश्यक रेडिएशन एक्सपोज़र से बचाव
    हार्मोनल दवाओं (जैसे लम्बे समय तक HRT) का चिकित्सकीय परामर्श से ही उपयोग
    नियमित हेल्थ चेकअप और सिरदर्द/न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करना
    पोषक तत्वों व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार
    विषैले रसायनों, नशीले पदार्थों से दूरी

    डाइट चार्ट (आहार):

    एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: आंवला, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, हल्दी, अदरक
    ओमेगा-3 फैटी एसिड: अखरोट, अलसी, चिया सीड्स — मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए
    विटामिन B कॉम्प्लेक्स: नसों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक साबुत अनाज, दालें, दूध, पनीर
    हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दाल-चावल, हरी सब्जियाँ
    पर्याप्त पानी व तरल पदार्थ का सेवन
    हर्बल चाय जैसे तुलसी, ब्राह्मी, गोटूकोला (मंडूकपर्णी) का सेवन मस्तिष्क को शांत रखता है
    भोजन समय पर करें और बासी/भारी भोजन से बचें

    अपथ्य (परहेज़):

    तला-भुना, अधिक मसालेदार व प्रोसेस्ड फूड
    अधिक शक्कर, सफेद आटा व कोल्ड ड्रिंक
    शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थ
    अत्यधिक कैफीन का सेवन
    देर रात जागना और अनियमित दिनचर्या
    मानसिक तनाव और अत्यधिक डिजिटल स्क्रीन टाइम

    योगासन:

    • शवासन: पूर्ण शारीरिक व मानसिक विश्राम
      वज्रासन: पाचन सुधारता है और शांत ऊर्जा लाता है
      सुखासन में ध्यान: मानसिक स्पष्टता और शांति
      अनुलोम-विलोम प्राणायाम: मस्तिष्क में ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाता है
      भ्रामरी प्राणायाम: तंत्रिका तंत्र को शांत करता है
      ताड़ासन व त्रिकोणासन (यदि संतुलन ठीक हो): ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में सहायक
      दौरे या न्यूरोलॉजिकल कमजोरी वाले मरीजों को योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही आसन करने चाहिए।

    आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

    • मस्तिष्क को टॉनिक, स्मरणशक्ति व एकाग्रता बढ़ाती है
      नसों को शांत कर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को सहयोग
      सूजन कम करने व मानसिक-शारीरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक
      रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और टॉक्सिन्स निकालने के लिए
      प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट व एंटी-इंफ्लेमेटरी
      टोनर नेसल ड्राप नाक में डालने से नर्वस सिस्टम को पोषण
      मानसिक शांति व तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव

    आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

    कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

    आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


    1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

    2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

    3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

    4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

    5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

    6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

    7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

    प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

    अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

    नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

    Please click to fill form for free consultation with  doctor 

    https://cowurine.com/en/contact

    Whatsapp the reports- 9179078878

    Call For Free Consultation-07313599100





















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    MENINGIOMA - SUPPORT KIT 

    मेनिंजियोमा - सपोर्ट किट 

     मेनिंजियोमा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को घेरे हुई झिल्लियों (Meninges) से उत्पन्न होने वाला एक प्रकार का ट्यूमर है। अधिकांश मामलों में यह धीरे-धीरे बढ़ने वाला और गैर-कैंसरकारी (Benign) होता है, लेकिन इसकी स्थिति और आकार बढ़ने पर यह मस्तिष्क या नसों पर दबाव डालकर गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह घातक (Malignant) भी हो सकता है।

    प्रकार:

    1. ग्रेड I (Benign Meningioma):
      सबसे सामान्य, धीरे-धीरे बढ़ता है और सर्जरी से अक्सर पूरी तरह निकाला जा सकता है।

      ग्रेड II (Atypical Meningioma):
      तेज़ी से बढ़ता है और पुनः होने की संभावना अधिक।

      ग्रेड III (Malignant/Anaplastic Meningioma):
      दुर्लभ लेकिन आक्रामक प्रकार, आसपास के ऊतकों में फैल सकता है।

      स्थान के आधार पर प्रकार:

      Convexity meningioma (मस्तिष्क की बाहरी सतह पर)

      Parasagittal/falx meningioma (मस्तिष्क की मध्य रेखा के पास)

      Skull base meningioma (खोपड़ी के निचले भाग में)

      Spinal meningioma (रीढ़ के पास)

      लक्षण:

      (लक्षण ट्यूमर के स्थान और आकार पर निर्भर करते हैं)

      सिरदर्द, जो धीरे-धीरे बढ़ता है
      मतली, उल्टी
      दृष्टि में धुंधलापन या दोहरी दृष्टि
      स्मरणशक्ति, एकाग्रता या सोचने की क्षमता में कमी
      दौरे (Seizures)
      हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन
      बोलने या समझने में कठिनाई
      संतुलन या समन्वय में कमी
      व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन (कभी-कभी)

      कारण:

      • जेनेटिक परिवर्तन (Genetic mutations): NF2 जीन में बदलाव प्रमुख कारणों में से एक है।
        रेडिएशन एक्सपोजर: सिर पर पूर्व में रेडिएशन थेरेपी लेना।
        हार्मोनल प्रभाव: महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है — एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन का प्रभाव माना जाता है।
        आयु: अधिकतर मामलों में 40 वर्ष से ऊपर।
        परिवार में इतिहास: कुछ दुर्लभ आनुवांशिक सिंड्रोम जैसे Neurofibromatosis type 2।

      बचाव:

      अनावश्यक रेडिएशन एक्सपोज़र से बचाव
      हार्मोनल दवाओं (जैसे लम्बे समय तक HRT) का चिकित्सकीय परामर्श से ही उपयोग
      नियमित हेल्थ चेकअप और सिरदर्द/न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करना
      पोषक तत्वों व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार
      विषैले रसायनों, नशीले पदार्थों से दूरी

      डाइट चार्ट (आहार):

      एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: आंवला, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, हल्दी, अदरक
      ओमेगा-3 फैटी एसिड: अखरोट, अलसी, चिया सीड्स — मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए
      विटामिन B कॉम्प्लेक्स: नसों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक साबुत अनाज, दालें, दूध, पनीर
      हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दाल-चावल, हरी सब्जियाँ
      पर्याप्त पानी व तरल पदार्थ का सेवन
      हर्बल चाय जैसे तुलसी, ब्राह्मी, गोटूकोला (मंडूकपर्णी) का सेवन मस्तिष्क को शांत रखता है
      भोजन समय पर करें और बासी/भारी भोजन से बचें

      अपथ्य (परहेज़):

      तला-भुना, अधिक मसालेदार व प्रोसेस्ड फूड
      अधिक शक्कर, सफेद आटा व कोल्ड ड्रिंक
      शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थ
      अत्यधिक कैफीन का सेवन
      देर रात जागना और अनियमित दिनचर्या
      मानसिक तनाव और अत्यधिक डिजिटल स्क्रीन टाइम

      योगासन:

      • शवासन: पूर्ण शारीरिक व मानसिक विश्राम
        वज्रासन: पाचन सुधारता है और शांत ऊर्जा लाता है
        सुखासन में ध्यान: मानसिक स्पष्टता और शांति
        अनुलोम-विलोम प्राणायाम: मस्तिष्क में ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाता है
        भ्रामरी प्राणायाम: तंत्रिका तंत्र को शांत करता है
        ताड़ासन व त्रिकोणासन (यदि संतुलन ठीक हो): ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में सहायक
        दौरे या न्यूरोलॉजिकल कमजोरी वाले मरीजों को योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही आसन करने चाहिए।

      आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

      • मस्तिष्क को टॉनिक, स्मरणशक्ति व एकाग्रता बढ़ाती है
        नसों को शांत कर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को सहयोग
        सूजन कम करने व मानसिक-शारीरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक
        रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और टॉक्सिन्स निकालने के लिए
        प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट व एंटी-इंफ्लेमेटरी
        टोनर नेसल ड्राप नाक में डालने से नर्वस सिस्टम को पोषण
        मानसिक शांति व तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव

      आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

      कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

      आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


      1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

      2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

      3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

      4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

      5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

      6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

      7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

      प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

      अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

      नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

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