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Myasthenia / Myasthenia Gravis - Support Kit

Myasthenia / Myasthenia Gravis - Support Kit

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Myasthenia / Myasthenia Gravis - Support Kit 

मायस्थीनिया / मायस्थीनिया ग्रेविस - सपोर्ट किट
मायस्थीनिया ग्रेविस एक ऑटोइम्यून न्यूरोमस्कुलर रोग है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से न्यूरोमस्कुलर जंक्शन (नस और मांसपेशियों के बीच संपर्क) पर मौजूद रिसेप्टर्स पर हमला करती है। इसके कारण मांसपेशियों तक नर्व सिग्नल सही से नहीं पहुँचते और व्यक्ति को मांसपेशियों में थकान, कमजोरी और काम करने की क्षमता में कमी महसूस होती है। यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ सकती है और समय पर प्रबंधन न होने पर श्वसन संबंधी जटिलताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रकार:

  1. ओक्यूलर मायस्थीनिया (Ocular Myasthenia):
    केवल आँखों की मांसपेशियों को प्रभावित करती है — पलकें झुकना, दोहरी दृष्टि।

  2. जनरलाइज्ड मायस्थीनिया (Generalized):
    आँखों के अलावा चेहरे, गला, भुजाओं, पैरों व श्वसन मांसपेशियों को भी प्रभावित करती है।

  3. जुवेनाइल मायस्थीनिया:
    बच्चों या किशोरों में उत्पन्न होती है।

  4. नियोनेटल मायस्थीनिया:
    गर्भवती माँ से नवजात में अस्थायी रूप से ट्रांसफर होती है।

  5. Congenital Myasthenic Syndromes:
    दुर्लभ आनुवंशिक कारणों से जन्म से मौजूद।

लक्षण:

पलकें झुकना (Ptosis) — एक या दोनों
दोहरी दृष्टि (Diplopia)
चेहरे के हावभाव में कमजोरी, मुस्कान फीकी लगना
बोलने में अस्पष्टता, थकान के साथ आवाज़ भारी होना
निगलने में कठिनाई, खाना-पीना फंसना
हाथ-पैरों में कमजोरी, सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई
गतिविधि करने पर कमजोरी बढ़ना और आराम करने पर कम होना (fatigability)
गंभीर मामलों में साँस लेने में दिक्कत (Myasthenic crisis)

कारण:

ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली Acetylcholine receptors (AChR) या संबंधित प्रोटीन पर antibodies बनाकर हमला करती है।
थाइमस ग्रंथि की गड़बड़ी: कई रोगियों में thymus ग्रंथि का असामान्य आकार या थाइमोमा (ट्यूमर) पाया जाता है।
दवाओं या संक्रमणों से ट्रिगर: कुछ एंटीबायोटिक, बीटा ब्लॉकर्स या वायरल संक्रमण से लक्षण बढ़ते हैं।

बचाव:

संक्रमणों से बचाव — समय पर वैक्सीनेशन और स्वच्छता
नींद और आराम पर्याप्त मात्रा में लें
अत्यधिक परिश्रम, धूप और गर्मी से बचें
मानसिक तनाव कम रखें — योग और ध्यान उपयोगी
लक्षणों को पहचान कर समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लें
जिन दवाओं से लक्षण बिगड़ते हैं, उनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह से ही करें

डाइट चार्ट (आहार):

ऊर्जा देने वाला हल्का और पौष्टिक आहार: खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, सूप
विटामिन B-कॉम्प्लेक्स: साबुत अनाज, दालें, दूध, पनीर
विटामिन D और कैल्शियम: हड्डी व मांसपेशी स्वास्थ्य हेतु — धूप, दूध, तिल, बादाम
एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन: हरी सब्जियाँ, आंवला, हल्दी, फल
निगलने में कठिनाई होने पर मुलायम और semi-solid आहार दें ताकि दम न घुटे
छोटे-छोटे अंतराल में हल्का भोजन करें, थकान से बचें
पानी गुनगुना और पर्याप्त मात्रा में पिएँ

अपथ्य (परहेज़):

तला-भुना, भारी और मसालेदार भोजन
प्रोसेस्ड फूड, शुगर, सफेद आटा
शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थ
अत्यधिक कैफीन या एनर्जी ड्रिंक
रात में बहुत देर से खाना या जागना
तनावपूर्ण और अराजक दिनचर्या

योगासन:

  • शवासन: पूर्ण विश्राम, मांसपेशियों को आराम देता है
    वज्रासन: पाचन व तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है
    अनुलोम-विलोम प्राणायाम: नाड़ियों को शुद्ध कर नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है
    भ्रामरी प्राणायाम: मानसिक शांति व तंत्रिका सुदृढ़ीकरण
    मंडूकासन, मर्जरीआसन (हल्के रूप में): मांसपेशियों की लचीलापन बनाए रखने हेतु
    गहरी साँस लेने के व्यायाम — श्वसन मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए
    ज़्यादा exertion वाले योगासन, inverted poses या breath-holding techniques से बचें।



आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मांसपेशियों की ताकत व सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक
    स्नायविक और मांसपेशीय पोषण के लिए उपयोगी
    नर्वस सिस्टम को पोषण और शांत प्रभाव
    रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूजन कम करने में सहायक
    ओमनी आयल से हाथ-पैरों की हल्की मालिश तंत्रिका तंत्र को टॉनिक देती है
    टोनर नेसल ड्राप नाक में डालने से मस्तिष्क-नसों का पोषण
    मानसिक व न्यूरोलॉजिकल शांति के लिए


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।





















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Myasthenia / Myasthenia Gravis - Support Kit 

मायस्थीनिया / मायस्थीनिया ग्रेविस - सपोर्ट किट
मायस्थीनिया ग्रेविस एक ऑटोइम्यून न्यूरोमस्कुलर रोग है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से न्यूरोमस्कुलर जंक्शन (नस और मांसपेशियों के बीच संपर्क) पर मौजूद रिसेप्टर्स पर हमला करती है। इसके कारण मांसपेशियों तक नर्व सिग्नल सही से नहीं पहुँचते और व्यक्ति को मांसपेशियों में थकान, कमजोरी और काम करने की क्षमता में कमी महसूस होती है। यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ सकती है और समय पर प्रबंधन न होने पर श्वसन संबंधी जटिलताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रकार:

  1. ओक्यूलर मायस्थीनिया (Ocular Myasthenia):
    केवल आँखों की मांसपेशियों को प्रभावित करती है — पलकें झुकना, दोहरी दृष्टि।

  2. जनरलाइज्ड मायस्थीनिया (Generalized):
    आँखों के अलावा चेहरे, गला, भुजाओं, पैरों व श्वसन मांसपेशियों को भी प्रभावित करती है।

  3. जुवेनाइल मायस्थीनिया:
    बच्चों या किशोरों में उत्पन्न होती है।

  4. नियोनेटल मायस्थीनिया:
    गर्भवती माँ से नवजात में अस्थायी रूप से ट्रांसफर होती है।

  5. Congenital Myasthenic Syndromes:
    दुर्लभ आनुवंशिक कारणों से जन्म से मौजूद।

लक्षण:

पलकें झुकना (Ptosis) — एक या दोनों
दोहरी दृष्टि (Diplopia)
चेहरे के हावभाव में कमजोरी, मुस्कान फीकी लगना
बोलने में अस्पष्टता, थकान के साथ आवाज़ भारी होना
निगलने में कठिनाई, खाना-पीना फंसना
हाथ-पैरों में कमजोरी, सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई
गतिविधि करने पर कमजोरी बढ़ना और आराम करने पर कम होना (fatigability)
गंभीर मामलों में साँस लेने में दिक्कत (Myasthenic crisis)

कारण:

ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली Acetylcholine receptors (AChR) या संबंधित प्रोटीन पर antibodies बनाकर हमला करती है।
थाइमस ग्रंथि की गड़बड़ी: कई रोगियों में thymus ग्रंथि का असामान्य आकार या थाइमोमा (ट्यूमर) पाया जाता है।
दवाओं या संक्रमणों से ट्रिगर: कुछ एंटीबायोटिक, बीटा ब्लॉकर्स या वायरल संक्रमण से लक्षण बढ़ते हैं।

बचाव:

संक्रमणों से बचाव — समय पर वैक्सीनेशन और स्वच्छता
नींद और आराम पर्याप्त मात्रा में लें
अत्यधिक परिश्रम, धूप और गर्मी से बचें
मानसिक तनाव कम रखें — योग और ध्यान उपयोगी
लक्षणों को पहचान कर समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लें
जिन दवाओं से लक्षण बिगड़ते हैं, उनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह से ही करें

डाइट चार्ट (आहार):

ऊर्जा देने वाला हल्का और पौष्टिक आहार: खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, सूप
विटामिन B-कॉम्प्लेक्स: साबुत अनाज, दालें, दूध, पनीर
विटामिन D और कैल्शियम: हड्डी व मांसपेशी स्वास्थ्य हेतु — धूप, दूध, तिल, बादाम
एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन: हरी सब्जियाँ, आंवला, हल्दी, फल
निगलने में कठिनाई होने पर मुलायम और semi-solid आहार दें ताकि दम न घुटे
छोटे-छोटे अंतराल में हल्का भोजन करें, थकान से बचें
पानी गुनगुना और पर्याप्त मात्रा में पिएँ

अपथ्य (परहेज़):

तला-भुना, भारी और मसालेदार भोजन
प्रोसेस्ड फूड, शुगर, सफेद आटा
शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थ
अत्यधिक कैफीन या एनर्जी ड्रिंक
रात में बहुत देर से खाना या जागना
तनावपूर्ण और अराजक दिनचर्या

योगासन:

  • शवासन: पूर्ण विश्राम, मांसपेशियों को आराम देता है
    वज्रासन: पाचन व तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है
    अनुलोम-विलोम प्राणायाम: नाड़ियों को शुद्ध कर नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है
    भ्रामरी प्राणायाम: मानसिक शांति व तंत्रिका सुदृढ़ीकरण
    मंडूकासन, मर्जरीआसन (हल्के रूप में): मांसपेशियों की लचीलापन बनाए रखने हेतु
    गहरी साँस लेने के व्यायाम — श्वसन मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए
    ज़्यादा exertion वाले योगासन, inverted poses या breath-holding techniques से बचें।



आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मांसपेशियों की ताकत व सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक
    स्नायविक और मांसपेशीय पोषण के लिए उपयोगी
    नर्वस सिस्टम को पोषण और शांत प्रभाव
    रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूजन कम करने में सहायक
    ओमनी आयल से हाथ-पैरों की हल्की मालिश तंत्रिका तंत्र को टॉनिक देती है
    टोनर नेसल ड्राप नाक में डालने से मस्तिष्क-नसों का पोषण
    मानसिक व न्यूरोलॉजिकल शांति के लिए


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।





















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