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NEUROGENIC BLADDER SUPPORT KIT

NEUROGENIC BLADDER SUPPORT KIT

Regular price Rs. 3,450.00 INR
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NEUROGENIC BLADDER SUPPORT KIT

न्यूरोजेनिक ब्लैडर सपोर्ट किट 

संक्षिप्त परिचय

न्यूरोजेनिक ब्लैडर वह स्थिति है जिसमें मूत्राशय (ब्लैडर) का नियंत्रण नसों (नर्वस सिस्टम) की खराबी के कारण बिगड़ जाता है। इसमें मूत्र भरने-खाली होने की प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती। यह समस्या रीढ़ की चोट, स्ट्रोक, डायबिटीज, पार्किन्सन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों में देखी जाती है।

प्रकार

ओवरएक्टिव न्यूरोजेनिक ब्लैडर – बार-बार पेशाब की तीव्र इच्छा, कम मात्रा में मूत्र
अंडरएक्टिव न्यूरोजेनिक ब्लैडर – पेशाब करने में कठिनाई, ब्लैडर पूरी तरह खाली न होना
रिफ्लेक्स ब्लैडर – अचानक बिना चेतावनी पेशाब निकल जाना
मिक्स्ड प्रकार – ऊपर के लक्षणों का मिश्रण

लक्षण

बार-बार पेशाब आना या पेशाब रोक न पाना
पेशाब करने में देर लगना या ज़ोर लगाना
पेशाब के बाद भी ब्लैडर भरा-भरा लगना
पेशाब का रिसाव (Urinary Incontinence)
बार-बार UTI
रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

कारण

रीढ़ की हड्डी की चोट या सर्जरी
स्ट्रोक (लकवा)
डायबिटिक न्यूरोपैथी
पार्किन्सन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस
ब्रेन ट्यूमर या इंफेक्शन
जन्मजात तंत्रिका विकार

बचाव (Prevention)

डायबिटीज व BP को नियंत्रित रखना
समय पर पेशाब करना, देर तक न रोकें
कब्ज से बचाव
नियमित पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़
रीढ़ व नर्वस सिस्टम की चोट से बचाव

डाइट चार्ट (आहार मार्गदर्शन)

हल्का, सुपाच्य भोजन
लौकी, तोरी, गाजर, पपीता
जौ, ओट्स, दलिया
नारियल पानी (सीमित मात्रा)
पर्याप्त गुनगुना पानी

सीमित मात्रा में

  • चाय, कॉफी
    बहुत अधिक खट्टा या मसालेदार

अपथ्य (परहेज़)

शराब व धूम्रपान
ज्यादा कैफीन
तला-भुना व जंक फूड
बहुत अधिक नमक
देर रात भारी भोजन

योगासन (Yoga & Pranayama)

  • मूलबंध – ब्लैडर नियंत्रण के लिए
    भुजंगासन – नर्वस सिस्टम सशक्त करता है
    पवनमुक्तासन – पेट व मूत्र तंत्र के लिए
    वज्रासन – पाचन व नर्व संतुलन
    अनुलोम-विलोम – नर्व्स को शांत करता है

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मूत्र तंत्र को मजबूत करता है
    ब्लैडर टोन सुधार में सहायक
    नर्वस सिस्टम को बल देता है
    नर्व व मसल टोन के लिए
    डिटॉक्स व इम्यून सपोर्ट
    आयुर्वेद में न्यूरोजेनिक ब्लैडर हेतु विशेष उपयोगी

आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों के साथ संयोजन


गोखरू, पुनर्नवा, कुल्थी, हरड़, काकमाची, आंवला, निशोथ, रसवंती, गोजला,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोखरू ड्राई एक्सट्रैक्ट, पुनर्नवा, कुल्थी, हरड़, काकमाची, आंवला, निशोथ, गोरखमुंडी, फासन भेड़, शिलाजीत, कोंकोल, नागरमोथा, अपामार्ग पाउडर, गोजिव्हा (मयूरशिखा) पाउडर, सहदेवी, सु. सुहागा, कलमी शोरा, यवक्षार, शु. फिटकरी, सु. नौसादर,गोजला सांद्र जैसी जड़ीबूटियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक यूरोफ्लश सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक किमोट्रिम  सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक यूरोसिल कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

Please click to fill form for free consultation with doctor 

https://cowurine.com/en/contact

Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation- 07313599100

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संक्षिप्त परिचय

न्यूरोजेनिक ब्लैडर वह स्थिति है जिसमें मूत्राशय (ब्लैडर) का नियंत्रण नसों (नर्वस सिस्टम) की खराबी के कारण बिगड़ जाता है। इसमें मूत्र भरने-खाली होने की प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती। यह समस्या रीढ़ की चोट, स्ट्रोक, डायबिटीज, पार्किन्सन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों में देखी जाती है।

प्रकार

ओवरएक्टिव न्यूरोजेनिक ब्लैडर – बार-बार पेशाब की तीव्र इच्छा, कम मात्रा में मूत्र
अंडरएक्टिव न्यूरोजेनिक ब्लैडर – पेशाब करने में कठिनाई, ब्लैडर पूरी तरह खाली न होना
रिफ्लेक्स ब्लैडर – अचानक बिना चेतावनी पेशाब निकल जाना
मिक्स्ड प्रकार – ऊपर के लक्षणों का मिश्रण

लक्षण

बार-बार पेशाब आना या पेशाब रोक न पाना
पेशाब करने में देर लगना या ज़ोर लगाना
पेशाब के बाद भी ब्लैडर भरा-भरा लगना
पेशाब का रिसाव (Urinary Incontinence)
बार-बार UTI
रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

कारण

रीढ़ की हड्डी की चोट या सर्जरी
स्ट्रोक (लकवा)
डायबिटिक न्यूरोपैथी
पार्किन्सन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस
ब्रेन ट्यूमर या इंफेक्शन
जन्मजात तंत्रिका विकार

बचाव (Prevention)

डायबिटीज व BP को नियंत्रित रखना
समय पर पेशाब करना, देर तक न रोकें
कब्ज से बचाव
नियमित पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़
रीढ़ व नर्वस सिस्टम की चोट से बचाव

डाइट चार्ट (आहार मार्गदर्शन)

हल्का, सुपाच्य भोजन
लौकी, तोरी, गाजर, पपीता
जौ, ओट्स, दलिया
नारियल पानी (सीमित मात्रा)
पर्याप्त गुनगुना पानी

सीमित मात्रा में

  • चाय, कॉफी
    बहुत अधिक खट्टा या मसालेदार

अपथ्य (परहेज़)

शराब व धूम्रपान
ज्यादा कैफीन
तला-भुना व जंक फूड
बहुत अधिक नमक
देर रात भारी भोजन

योगासन (Yoga & Pranayama)

  • मूलबंध – ब्लैडर नियंत्रण के लिए
    भुजंगासन – नर्वस सिस्टम सशक्त करता है
    पवनमुक्तासन – पेट व मूत्र तंत्र के लिए
    वज्रासन – पाचन व नर्व संतुलन
    अनुलोम-विलोम – नर्व्स को शांत करता है

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मूत्र तंत्र को मजबूत करता है
    ब्लैडर टोन सुधार में सहायक
    नर्वस सिस्टम को बल देता है
    नर्व व मसल टोन के लिए
    डिटॉक्स व इम्यून सपोर्ट
    आयुर्वेद में न्यूरोजेनिक ब्लैडर हेतु विशेष उपयोगी

आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों के साथ संयोजन


गोखरू, पुनर्नवा, कुल्थी, हरड़, काकमाची, आंवला, निशोथ, रसवंती, गोजला,कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोखरू ड्राई एक्सट्रैक्ट, पुनर्नवा, कुल्थी, हरड़, काकमाची, आंवला, निशोथ, गोरखमुंडी, फासन भेड़, शिलाजीत, कोंकोल, नागरमोथा, अपामार्ग पाउडर, गोजिव्हा (मयूरशिखा) पाउडर, सहदेवी, सु. सुहागा, कलमी शोरा, यवक्षार, शु. फिटकरी, सु. नौसादर,गोजला सांद्र जैसी जड़ीबूटियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

1. आयुर्वेदिक यूरोफ्लश सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक किमोट्रिम  सिरप 3-3 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक यूरोसिल कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

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