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PEMPHIGUS VULGARIS - SUPPORT KIT

PEMPHIGUS VULGARIS - SUPPORT KIT

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PEMPHIGUS VULGARIS - SUPPORT KIT 

पेम्फिगस वल्गैरिस - सपोर्ट किट 

1. संक्षिप्त परिचय

पेम्फिगस वल्गैरिस एक दुर्लभ ऑटोइम्यून त्वचा रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन की कोशिकाओं पर आक्रमण करती है। इससे त्वचा और मुंह के अंदर दर्दनाक फफोले (blisters) और घाव हो जाते हैं।

2. प्रकार

Pemphigus Vulgaris – सबसे सामान्य प्रकार, जिसमें मुंह के छाले व त्वचा पर फफोले होते हैं।
Pemphigus Foliaceus – इसमें ऊपरी त्वचा पर हल्के फफोले होते हैं, मुँह प्रभावित नहीं होता।
Paraneoplastic Pemphigus – कैंसर/ट्यूमर से जुड़ा हुआ, गंभीर और दुर्लभ प्रकार।

3. लक्षण

त्वचा व मुँह में दर्दनाक फफोले
फफोलों के फटने पर घाव और संक्रमण
मुँह में जलन और खाना निगलने में कठिनाई
कमजोरी और थकान
बाल झड़ना (कुछ मामलों में)

4. कारण

ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Immune system द्वारा कोशिकाओं पर आक्रमण)
जेनेटिक प्रवृत्ति
कुछ दवाइयाँ (ACE inhibitors, penicillamine आदि)
तनाव और संक्रमण से स्थिति बिगड़ सकती है

5. बचाव

तनाव और मानसिक दबाव से बचना
तीखे, खट्टे, मसालेदार भोजन से बचाव
दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से ही लें
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना

6. डाइट चार्ट (Pathya आहार)

अनुकूल आहार

मुलायम, गुनगुना, सुपाच्य भोजन
मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, ओट्स
नारियल पानी, बेल का शरबत
दूध (हल्दी डालकर), छाछ
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, चुकंदर
हल्के फल – पपीता, सेब, नाशपाती

अपथ्य (निषेध आहार)

तीखा, खट्टा, तला-भुना भोजन
गरिष्ठ भोजन, फास्ट फूड
अधिक नमक और मिर्च
शराब, धूम्रपान, कैफीन
नींबू, टमाटर, इमली

7. योगासन

प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति (हल्के रूप में)
ध्यान व मेडिटेशन – तनाव कम करने हेतु
हल्के आसन – शवासन, वज्रासन, सुखासन

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

रक्तशोधन हेतु
रक्तशुद्धि
सूजन और जलन कम करने हेतु
मानसिक शांति हेतु


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को नीम छाल, बावची, खदिर, करंज, चक्रमर्द, अनंत मूल, आंवला, मंजीष्ठा, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, रोहितक, विदंग, कुटकी, चंदन, सत्यानाशी, देवदारु, मेंहदी, शुद्ध गंधक, शुद्ध फिटकरी, अजवाइन के फूल, द्रोणपुष्पी चूर्ण, हल्दी, हिमसारा, इन्द्रायण मूल चूर्ण, कैशोर गुग्गुल, कसानी, मीठा इंद्रजव,गोजला सांद्र,नीम, बावची, खदिर, करंज, चक्रमर्द, अनंतमूल, आंवला, मंजीष्ठा, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, रोहितक, विदंग, कुटकी, पुनर्नवा, सत्यनाशी, डीकमाली, मेहंदी, शुद्ध गंधक, शुद्ध फिटकरी, अजवाइन के फूल, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज 

1. आयुर्वेदिक डर्मोसोल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक डर्मोक्योर कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

3. रोजाना सोते समय प्रभावित हिस्सों पर स्थानीय आयुर्वेदिक प्यूरोडर्म ऑइंटमेंट लगाएं।

4. रोजाना नहाने के बाद प्रभावित हिस्से पर हल्की मालिश के साथ आयुर्वेदिक प्यूरोडर्म-ऑयल लगाएं।

5 . टोनर लिक्विड मुंह में प्रभावित जगह पर दिन में दो बार लगावें 

—----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, इमली, अचार, तला हुआ भोजन, अधिक नमकीन चीजें, गन्ना, दही, तिल, काले चने, बैंगन, बेसन, अरबी, बड़े राजमा, छोले, लहसुन, ठंडे पेय, आइसक्रीम, चना ।

अनुशंसित आहार: करेला, फूलगोभी , तुलसी+शहद, सेब, तरबूज, गाजर, ककड़ी, पत्तागोभी, मूली, पालक, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, चावल, दाल, करेला, ज्वार, बाजरा, किडनी- सेम, मोंठ,  लौकी, दूध, खसखस, फूलगोभी का रस, 50-50 मिलीलीटर ताज़ा फ़िल्टर किया हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

 


 




 

Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation- 07313599100

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1. संक्षिप्त परिचय

पेम्फिगस वल्गैरिस एक दुर्लभ ऑटोइम्यून त्वचा रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन की कोशिकाओं पर आक्रमण करती है। इससे त्वचा और मुंह के अंदर दर्दनाक फफोले (blisters) और घाव हो जाते हैं।

2. प्रकार

Pemphigus Vulgaris – सबसे सामान्य प्रकार, जिसमें मुंह के छाले व त्वचा पर फफोले होते हैं।
Pemphigus Foliaceus – इसमें ऊपरी त्वचा पर हल्के फफोले होते हैं, मुँह प्रभावित नहीं होता।
Paraneoplastic Pemphigus – कैंसर/ट्यूमर से जुड़ा हुआ, गंभीर और दुर्लभ प्रकार।

3. लक्षण

त्वचा व मुँह में दर्दनाक फफोले
फफोलों के फटने पर घाव और संक्रमण
मुँह में जलन और खाना निगलने में कठिनाई
कमजोरी और थकान
बाल झड़ना (कुछ मामलों में)

4. कारण

ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Immune system द्वारा कोशिकाओं पर आक्रमण)
जेनेटिक प्रवृत्ति
कुछ दवाइयाँ (ACE inhibitors, penicillamine आदि)
तनाव और संक्रमण से स्थिति बिगड़ सकती है

5. बचाव

तनाव और मानसिक दबाव से बचना
तीखे, खट्टे, मसालेदार भोजन से बचाव
दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से ही लें
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना

6. डाइट चार्ट (Pathya आहार)

अनुकूल आहार

मुलायम, गुनगुना, सुपाच्य भोजन
मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, ओट्स
नारियल पानी, बेल का शरबत
दूध (हल्दी डालकर), छाछ
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, चुकंदर
हल्के फल – पपीता, सेब, नाशपाती

अपथ्य (निषेध आहार)

तीखा, खट्टा, तला-भुना भोजन
गरिष्ठ भोजन, फास्ट फूड
अधिक नमक और मिर्च
शराब, धूम्रपान, कैफीन
नींबू, टमाटर, इमली

7. योगासन

प्राणायाम – अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति (हल्के रूप में)
ध्यान व मेडिटेशन – तनाव कम करने हेतु
हल्के आसन – शवासन, वज्रासन, सुखासन

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

रक्तशोधन हेतु
रक्तशुद्धि
सूजन और जलन कम करने हेतु
मानसिक शांति हेतु


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गौमूत्र को नीम छाल, बावची, खदिर, करंज, चक्रमर्द, अनंत मूल, आंवला, मंजीष्ठा, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, रोहितक, विदंग, कुटकी, चंदन, सत्यानाशी, देवदारु, मेंहदी, शुद्ध गंधक, शुद्ध फिटकरी, अजवाइन के फूल, द्रोणपुष्पी चूर्ण, हल्दी, हिमसारा, इन्द्रायण मूल चूर्ण, कैशोर गुग्गुल, कसानी, मीठा इंद्रजव,गोजला सांद्र,नीम, बावची, खदिर, करंज, चक्रमर्द, अनंतमूल, आंवला, मंजीष्ठा, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, रोहितक, विदंग, कुटकी, पुनर्नवा, सत्यनाशी, डीकमाली, मेहंदी, शुद्ध गंधक, शुद्ध फिटकरी, अजवाइन के फूल, गोजला जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन आदि निम्नानुसार उपयोग कर इलाज 

1. आयुर्वेदिक डर्मोसोल सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक डर्मोक्योर कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

3. रोजाना सोते समय प्रभावित हिस्सों पर स्थानीय आयुर्वेदिक प्यूरोडर्म ऑइंटमेंट लगाएं।

4. रोजाना नहाने के बाद प्रभावित हिस्से पर हल्की मालिश के साथ आयुर्वेदिक प्यूरोडर्म-ऑयल लगाएं।

5 . टोनर लिक्विड मुंह में प्रभावित जगह पर दिन में दो बार लगावें 

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प्रतिबंधित आहार- खट्टी चीजें, इमली, अचार, तला हुआ भोजन, अधिक नमकीन चीजें, गन्ना, दही, तिल, काले चने, बैंगन, बेसन, अरबी, बड़े राजमा, छोले, लहसुन, ठंडे पेय, आइसक्रीम, चना ।

अनुशंसित आहार: करेला, फूलगोभी , तुलसी+शहद, सेब, तरबूज, गाजर, ककड़ी, पत्तागोभी, मूली, पालक, अंकुरित अनाज, सुबह मौखिक रूप से भरपूर पानी, चावल, दाल, करेला, ज्वार, बाजरा, किडनी- सेम, मोंठ,  लौकी, दूध, खसखस, फूलगोभी का रस, 50-50 मिलीलीटर ताज़ा फ़िल्टर किया हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें।

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।

 


 




 

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