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PERIPHERAL NEUROPATHY- SUPPORT KIT

PERIPHERAL NEUROPATHY- SUPPORT KIT

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PERIPHERAL NEUROPATHY- SUPPORT KIT 

पेरिफेरल न्यूरोपैथी- सपोर्ट किट 

 पेरिफेरल न्यूरोपैथी एक ऐसी अवस्था है जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (Central Nervous System) से शरीर के विभिन्न हिस्सों में संदेश पहुँचाने वाली नसें (Peripheral Nerves) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस कारण हाथों-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, दर्द, कमजोरी या समन्वय में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार क्रॉनिक रूप ले सकती है।

प्रकार:

  1. सेंसरी न्यूरोपैथी (Sensory):
    स्पर्श, तापमान, दर्द या कंपन महसूस करने की क्षमता प्रभावित।

  2. मोटर न्यूरोपैथी (Motor):
    मांसपेशियों की कमजोरी, थकान, चलने में असंतुलन।

  3. ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी (Autonomic):
    पाचन, रक्तचाप, ब्लैडर, हृदय गति जैसी अनैच्छिक क्रियाओं में गड़बड़ी।

  4. मिक्स्ड न्यूरोपैथी (Mixed):
    ऊपर के दो या तीन प्रकारों के लक्षण एक साथ।

लक्षण:

हाथ-पैरों में झनझनाहट या चुभन जैसा महसूस होना
सुन्नपन या संवेदना में कमी
जलन, तेज दर्द या बिजली के झटके जैसा अहसास
मांसपेशियों की कमजोरी, पकड़ में ढीलापन
चलने में संतुलन की कमी, ठोकर लगना
पसीने, पाचन या मूत्र संबंधी गड़बड़ी (ऑटोनोमिक प्रकार में)
रात में लक्षण अधिक बढ़ना

कारण:

  • डायबिटीज (Diabetes): सबसे आम कारण; लंबे समय तक शुगर बढ़े रहने से नसों को नुकसान।
    विटामिन B12, B6, E की कमी
    थायरॉइड रोग, किडनी या लिवर की बीमारियाँ
    नशा, विशेष रूप से शराब का सेवन
    कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट (कीमोथेरपी, एंटीबायोटिक आदि)
    चोट या नसों पर दबाव
    संक्रमण (जैसे हर्पीज़, HIV, लेप्रसी)
    ऑटोइम्यून रोग (जैसे Guillain-Barré Syndrome)
    अनुवांशिक कारण (कुछ मामलों में)

बचाव:

रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखना
नियमित स्वास्थ्य जांच और विटामिन स्तर की जाँच
शराब और नशीले पदार्थों से परहेज़
चोटों से बचाव, विशेषकर पैरों की देखभाल
आरामदायक और फिटिंग वाले जूते पहनना
संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद व तनाव नियंत्रण
नियमित व्यायाम और टहलना — नसों में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए

डाइट चार्ट (आहार):

विटामिन B12 और B6 युक्त आहार: दूध, दही, पनीर, साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियाँ
विटामिन E: बादाम, सूरजमुखी के बीज, मूंगफली, एवोकाडो
ओमेगा-3 फैटी एसिड: अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स
एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन: मौसमी फल, हरी सब्जियाँ, आंवला, हल्दी
प्रोटीन: दालें, अंकुरित अनाज, मूंग, पनीर
गुनगुना पानी पिएँ, भारी या बासी भोजन से बचें
नियमित भोजन समय का पालन करें

अपथ्य (परहेज़):

रिफाइंड शुगर, सफेद आटा, कोल्ड ड्रिंक्स व पैक्ड फूड
अत्यधिक तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड
शराब व सिगरेट का सेवन
अत्यधिक कैफीन (चाय, कॉफी)
देर रात जागना और अनियमित भोजन
बहुत ठंडे वातावरण में लंबे समय तक रहना, विशेषकर पैर नंगे न रखें

योगासन:

ताड़ासन – पूरे शरीर में खिंचाव व नसों को सक्रिय करता है
पवनमुक्तासन – पाचन सुधारता है और पेट की नसों पर अच्छा प्रभाव
वज्रासन – रक्तसंचार बढ़ाने व पैरों की नसों को सक्रिय करने के लिए
भुजंगासन – रीढ़ और नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है
अनुलोम-विलोम व नाड़ी शोधन प्राणायाम – नसों की शुद्धि व मस्तिष्क को संतुलित करता है
भ्रमरी प्राणायाम – तंत्रिका तंत्र को शांत व सक्रिय करने में सहायक

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • नसों की क्षति को कम करने और पुनर्निर्माण में सहायक
    नसों को मजबूत करने वाली प्रमुख औषधियाँ
    सूजन व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करती है
    रक्त शुद्धि व नर्व टॉक्सिन्स के निष्कासन में मददगार
    रोजाना हल्की मालिश नसों को पोषण देती है
    टोनर नेसल ड्राप नाक में डालना — नर्वस सिस्टम को पोषण देता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


 

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PERIPHERAL NEUROPATHY- SUPPORT KIT 

पेरिफेरल न्यूरोपैथी- सपोर्ट किट 

 पेरिफेरल न्यूरोपैथी एक ऐसी अवस्था है जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (Central Nervous System) से शरीर के विभिन्न हिस्सों में संदेश पहुँचाने वाली नसें (Peripheral Nerves) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस कारण हाथों-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, दर्द, कमजोरी या समन्वय में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार क्रॉनिक रूप ले सकती है।

प्रकार:

  1. सेंसरी न्यूरोपैथी (Sensory):
    स्पर्श, तापमान, दर्द या कंपन महसूस करने की क्षमता प्रभावित।

  2. मोटर न्यूरोपैथी (Motor):
    मांसपेशियों की कमजोरी, थकान, चलने में असंतुलन।

  3. ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी (Autonomic):
    पाचन, रक्तचाप, ब्लैडर, हृदय गति जैसी अनैच्छिक क्रियाओं में गड़बड़ी।

  4. मिक्स्ड न्यूरोपैथी (Mixed):
    ऊपर के दो या तीन प्रकारों के लक्षण एक साथ।

लक्षण:

हाथ-पैरों में झनझनाहट या चुभन जैसा महसूस होना
सुन्नपन या संवेदना में कमी
जलन, तेज दर्द या बिजली के झटके जैसा अहसास
मांसपेशियों की कमजोरी, पकड़ में ढीलापन
चलने में संतुलन की कमी, ठोकर लगना
पसीने, पाचन या मूत्र संबंधी गड़बड़ी (ऑटोनोमिक प्रकार में)
रात में लक्षण अधिक बढ़ना

कारण:

  • डायबिटीज (Diabetes): सबसे आम कारण; लंबे समय तक शुगर बढ़े रहने से नसों को नुकसान।
    विटामिन B12, B6, E की कमी
    थायरॉइड रोग, किडनी या लिवर की बीमारियाँ
    नशा, विशेष रूप से शराब का सेवन
    कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट (कीमोथेरपी, एंटीबायोटिक आदि)
    चोट या नसों पर दबाव
    संक्रमण (जैसे हर्पीज़, HIV, लेप्रसी)
    ऑटोइम्यून रोग (जैसे Guillain-Barré Syndrome)
    अनुवांशिक कारण (कुछ मामलों में)

बचाव:

रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखना
नियमित स्वास्थ्य जांच और विटामिन स्तर की जाँच
शराब और नशीले पदार्थों से परहेज़
चोटों से बचाव, विशेषकर पैरों की देखभाल
आरामदायक और फिटिंग वाले जूते पहनना
संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद व तनाव नियंत्रण
नियमित व्यायाम और टहलना — नसों में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए

डाइट चार्ट (आहार):

विटामिन B12 और B6 युक्त आहार: दूध, दही, पनीर, साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियाँ
विटामिन E: बादाम, सूरजमुखी के बीज, मूंगफली, एवोकाडो
ओमेगा-3 फैटी एसिड: अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स
एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन: मौसमी फल, हरी सब्जियाँ, आंवला, हल्दी
प्रोटीन: दालें, अंकुरित अनाज, मूंग, पनीर
गुनगुना पानी पिएँ, भारी या बासी भोजन से बचें
नियमित भोजन समय का पालन करें

अपथ्य (परहेज़):

रिफाइंड शुगर, सफेद आटा, कोल्ड ड्रिंक्स व पैक्ड फूड
अत्यधिक तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड
शराब व सिगरेट का सेवन
अत्यधिक कैफीन (चाय, कॉफी)
देर रात जागना और अनियमित भोजन
बहुत ठंडे वातावरण में लंबे समय तक रहना, विशेषकर पैर नंगे न रखें

योगासन:

ताड़ासन – पूरे शरीर में खिंचाव व नसों को सक्रिय करता है
पवनमुक्तासन – पाचन सुधारता है और पेट की नसों पर अच्छा प्रभाव
वज्रासन – रक्तसंचार बढ़ाने व पैरों की नसों को सक्रिय करने के लिए
भुजंगासन – रीढ़ और नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है
अनुलोम-विलोम व नाड़ी शोधन प्राणायाम – नसों की शुद्धि व मस्तिष्क को संतुलित करता है
भ्रमरी प्राणायाम – तंत्रिका तंत्र को शांत व सक्रिय करने में सहायक

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • नसों की क्षति को कम करने और पुनर्निर्माण में सहायक
    नसों को मजबूत करने वाली प्रमुख औषधियाँ
    सूजन व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करती है
    रक्त शुद्धि व नर्व टॉक्सिन्स के निष्कासन में मददगार
    रोजाना हल्की मालिश नसों को पोषण देती है
    टोनर नेसल ड्राप नाक में डालना — नर्वस सिस्टम को पोषण देता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

कांचनार गुग्गुल, सहजना, चित्रक, सारिवा, गिलोय, भूमि आंवला, मेहंदी, पाषाणभेद, अतिबला, अश्वगंधा, पुनर्नवा, मुलेठी, हल्दी, तुलसी, पीपल छाल, मंजिष्ठा, मकोय, गुलर छाल, वट (बड़ का वृक्ष), लोध्र, सहदेवी, नागकेसर, शतावरी,वासा (अडूसा), कंकोल (तेल फल), त्रिकटु, शिलाजीत, वन ककड़ी, सदा पुष्पी, रोहितक, कालमेघ, गोजला,आंवला, अश्वगंधा, दालचीनी, गोखरू, जीवांति, केवांच, लौंग, मुलेठी, पुनर्नवा, शतावरी, शिलाजीत, गोजला चकसू, चंद्रसूर सत्व, दरूहल्दी सत्व, धनिया सत्व, गाजर, जीरा सत्व, कलौंजी सत्व, कत्फल सत्व, ममीरा सत्व, मुलेठी सत्व, नागरमोथा सत्व, पारसिक यवानी, पुनर्नवा सत्व, सहजन छाल, समुद्र फल, सौंफ, टागर, पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला   जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |


1. आयुर्वेदिक केमोट्रिम और फोर्टेक्स सिरप 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रेनटोन सिरप 5-5 चम्मच दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक ब्रैनटोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें। इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से उंगली को दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी प्रकार इसे प्रतिदिन क्रमशः सुबह और दोपहर के भोजन के बाद दोहराएँ। ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में या सीधे सूर्य की रोशनी में रखें।

5. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) रोजाना सुबह और शाम एक गिलास गाय के गुनगुने दूध के साथ लें।

6. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक का 1-1 चम्मच दिन में दो बार लें।

7. दिन में 2-3 बार आयुर्वेदिक ओमनी ऑयल से हल्की मालिश करें।

प्रतिबंधित आहार - अचार, इमली, तला हुआ भोजन, भारी और ठंडा भोजन, चावल, दही।

अनुशंसित आहार: जौ, मूंग, सहजन, करेला, अंकुरित अनाज, हल्का भोजन, सलाद, सुबह गुनगुना पानी, 50-50 मिलीलीटर ताजा छना हुआ गौमूत्र सुबह और शाम लें, अंजीर, बाजरा, पपीता , बटर लौकी, अंगूर, रिबन लौकी, गाय का दूध

नाश्ते में फल लें, दोपहर के भोजन से पहले सलाद लें और सुबह की धूप में 15 से 30 मिनट बैठें।


 

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