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PROTEINURIA SUPPORT KIT

PROTEINURIA SUPPORT KIT

Regular price Rs. 2,615.00 INR
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PROTEINURIA SUPPORT KIT

प्रोटीनुरिया - सपोर्ट किट 


जब किडनी के फ़िल्टर (ग्लोमेरुली) सही तरह से काम नहीं करते, तब पेशाब में प्रोटीन (विशेषकर एल्ब्यूमिन) आने लगता है। सामान्यतः पेशाब में प्रोटीन नहीं होता या बहुत कम होता है; जब यह बढ़ जाए तो उसे प्रोटीनुरिया कहते हैं। यह स्वयं एक बीमारी नहीं बल्कि किडनी को हुए नुकसान का संकेत है।

प्रकार

ट्रांज़िएंट/अस्थायी प्रोटीनुरिया – बुखार, तनाव, व्यायाम, डिहाइड्रेशन में अस्थायी रूप से बढ़ता है।
ओर्थोस्टेटिक प्रोटीनुरिया – केवल खड़े रहने पर बढ़ता है, लेटने पर सामान्य।
पर्सिस्टेंट प्रोटीनुरिया – लगातार बनी रहे; किडनी रोग, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी इंफ्लेमेशन (नेफ्राइटिस) का संकेत।

लक्षण

अक्सर शुरू में कोई लक्षण नहीं होते। बढ़ने पर—

पेशाब में झाग/फेन आना
पैरों, चेहरे, आंखों के आसपास सूजन
थकान, कमजोरी
रात में बार-बार पेशाब
भूख कम होना
वजन बढ़ना/सूजन के कारण

मुख्य कारण

डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
किडनी इंफेक्शन या ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस
किडनी में सिस्ट या स्टोन
नेफ्रोटिक सिंड्रोम
दवाइयाँ (NSAIDs, एंटीबायोटिक्स का लंबे समय उपयोग)
हार्ट फ़ेलियर, ऑटोइम्यून डिजीज (SLE)
डिहाइड्रेशन

बचाव

शुगर नियंत्रण
ब्लड प्रेशर 120/80 के आसपास रखना
नमक का सेवन कम
पर्याप्त पानी पिएँ
दर्द की दवाइयाँ (NSAIDs) बार-बार न लें
वजन नियंत्रित रखें
धूम्रपान/शराब से दूर
नियमित किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT, Urine ACR)

डाइट चार्ट (किडनी-फ्रेंडली, प्रोटीनुरिया को ध्यान में रखते हुए)

सुबह: गुनगुना पानी + थोड़ी इलायची/लौकी का जूस
नाश्ता: दलिया, पोहा, मूंग चीला (कम तेल), मौसमी फल
मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी / बेल का शर्बत
दोपहर:सब्जियाँ (लौकी, तोरई, परवल, कद्दू)
1–2 रोटी (मल्टीग्रेन)
थोड़ा चावल (यदि किडनी फेल नहीं है)
सलाद (कम सोडियम)
शाम: भूना चना, मोरिंगा चाय
रात: हल्की सब्जी + रोटी
सोने से पहले: गर्म पानी या हल्दी वाला पानी (हलक़ा)

अपथ्य (क्या न लें)

नमक ज्यादा, पैक्ड/प्रोसेस्ड खाद्य
चिप्स, अचार, पापड़
बहुत अधिक प्रोटीन: लाल मांस, दालें अधिक मात्रा में, सोया अधिक
चीनी, मिठाई
कोल्ड ड्रिंक्स
शराब और धूम्रपान
दर्द की दवाइयाँ बार-बार

योगासन

(किडनी की रक्त आपूर्ति और तनाव कम करने के लिए)

भुजंगासन
मकरासन
वक्रासन
पवनमुक्तासन
ताड़ासन
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, धीमी गहरी श्वास
(ध्यान: हाई BP हो तो ज़ोर से प्राणायाम न करें)

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

किडनी टोनिक, इंफ्लेमेशन कम करता है
मूत्रमार्ग शोधन
सूजन कम करने में उपयोगी
पेशाब की गड़बड़ी में सहायक
किडनी की शक्ति में सहायक 

यूरिनरी क्लियरेंस में सहायक 


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी, आंवला , अपामार्, अश्वगंधा , भृंगराज , भुई आंवला , गिलोय , गोखरू, कटसरैया , केवांच बीज , खस , कुल्थी , मेहंदी , पाषाणभेद , पुनर्नवा , शतावरी , सौंफ,गोजला सांद्र जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।


1. आयुर्वेदिक नेफ्रोजिन सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक नेफ्रोल कैप्सूल 1- 1  दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक 1 - 1  चम्मच दिन में दो बार लें।


Please click to fill form for free consultation with  doctor 

https://cowurine.com/en/contact

Whatsapp the reports- 9179078878

Call For Free Consultation-07313599100

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प्रोटीनुरिया - सपोर्ट किट 


जब किडनी के फ़िल्टर (ग्लोमेरुली) सही तरह से काम नहीं करते, तब पेशाब में प्रोटीन (विशेषकर एल्ब्यूमिन) आने लगता है। सामान्यतः पेशाब में प्रोटीन नहीं होता या बहुत कम होता है; जब यह बढ़ जाए तो उसे प्रोटीनुरिया कहते हैं। यह स्वयं एक बीमारी नहीं बल्कि किडनी को हुए नुकसान का संकेत है।

प्रकार

ट्रांज़िएंट/अस्थायी प्रोटीनुरिया – बुखार, तनाव, व्यायाम, डिहाइड्रेशन में अस्थायी रूप से बढ़ता है।
ओर्थोस्टेटिक प्रोटीनुरिया – केवल खड़े रहने पर बढ़ता है, लेटने पर सामान्य।
पर्सिस्टेंट प्रोटीनुरिया – लगातार बनी रहे; किडनी रोग, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी इंफ्लेमेशन (नेफ्राइटिस) का संकेत।

लक्षण

अक्सर शुरू में कोई लक्षण नहीं होते। बढ़ने पर—

पेशाब में झाग/फेन आना
पैरों, चेहरे, आंखों के आसपास सूजन
थकान, कमजोरी
रात में बार-बार पेशाब
भूख कम होना
वजन बढ़ना/सूजन के कारण

मुख्य कारण

डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
किडनी इंफेक्शन या ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस
किडनी में सिस्ट या स्टोन
नेफ्रोटिक सिंड्रोम
दवाइयाँ (NSAIDs, एंटीबायोटिक्स का लंबे समय उपयोग)
हार्ट फ़ेलियर, ऑटोइम्यून डिजीज (SLE)
डिहाइड्रेशन

बचाव

शुगर नियंत्रण
ब्लड प्रेशर 120/80 के आसपास रखना
नमक का सेवन कम
पर्याप्त पानी पिएँ
दर्द की दवाइयाँ (NSAIDs) बार-बार न लें
वजन नियंत्रित रखें
धूम्रपान/शराब से दूर
नियमित किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT, Urine ACR)

डाइट चार्ट (किडनी-फ्रेंडली, प्रोटीनुरिया को ध्यान में रखते हुए)

सुबह: गुनगुना पानी + थोड़ी इलायची/लौकी का जूस
नाश्ता: दलिया, पोहा, मूंग चीला (कम तेल), मौसमी फल
मिड-मॉर्निंग: नारियल पानी / बेल का शर्बत
दोपहर:सब्जियाँ (लौकी, तोरई, परवल, कद्दू)
1–2 रोटी (मल्टीग्रेन)
थोड़ा चावल (यदि किडनी फेल नहीं है)
सलाद (कम सोडियम)
शाम: भूना चना, मोरिंगा चाय
रात: हल्की सब्जी + रोटी
सोने से पहले: गर्म पानी या हल्दी वाला पानी (हलक़ा)

अपथ्य (क्या न लें)

नमक ज्यादा, पैक्ड/प्रोसेस्ड खाद्य
चिप्स, अचार, पापड़
बहुत अधिक प्रोटीन: लाल मांस, दालें अधिक मात्रा में, सोया अधिक
चीनी, मिठाई
कोल्ड ड्रिंक्स
शराब और धूम्रपान
दर्द की दवाइयाँ बार-बार

योगासन

(किडनी की रक्त आपूर्ति और तनाव कम करने के लिए)

भुजंगासन
मकरासन
वक्रासन
पवनमुक्तासन
ताड़ासन
प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, धीमी गहरी श्वास
(ध्यान: हाई BP हो तो ज़ोर से प्राणायाम न करें)

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

किडनी टोनिक, इंफ्लेमेशन कम करता है
मूत्रमार्ग शोधन
सूजन कम करने में उपयोगी
पेशाब की गड़बड़ी में सहायक
किडनी की शक्ति में सहायक 

यूरिनरी क्लियरेंस में सहायक 


आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

आंवला, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, सौंफ, पशानभेड़, कुल्थी, शतावरी, गिलोय, सौंठ, कुंच बीज, भृंगराज, भूई आंवला, मेहंदी, कट सरैया, खस, दूधी, आंवला , अपामार्, अश्वगंधा , भृंगराज , भुई आंवला , गिलोय , गोखरू, कटसरैया , केवांच बीज , खस , कुल्थी , मेहंदी , पाषाणभेद , पुनर्नवा , शतावरी , सौंफ,गोजला सांद्र जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।


1. आयुर्वेदिक नेफ्रोजिन सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक नेफ्रोल कैप्सूल 1- 1  दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक फोर्टेक्स पाक 1 - 1  चम्मच दिन में दो बार लें।


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