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STRESS - SUPPORT KIT

STRESS - SUPPORT KIT

Regular price Rs. 2,590.00 INR
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STRESS - SUPPORT KIT 

तनाव - सपोर्ट किट 

 स्ट्रेस या तनाव एक ऐसी मानसिक-शारीरिक अवस्था है जब व्यक्ति पर परिस्थितियों, जिम्मेदारियों या भावनाओं का दबाव उसकी सहनशक्ति से अधिक हो जाता है। हल्का स्ट्रेस व्यक्ति को प्रेरित कर सकता है, परंतु लम्बे समय तक बना रहने वाला क्रॉनिक स्ट्रेस स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है — मानसिक, शारीरिक और सामाजिक तीनों स्तरों पर।

प्रकार:

  1. अल्पकालिक स्ट्रेस (Acute Stress):
    अचानक हुई घटना, चुनौती या दबाव से कुछ समय के लिए उत्पन्न होता है।

  2. आवर्तक अल्पकालिक स्ट्रेस (Episodic Acute Stress):
    बार-बार छोटी-छोटी परिस्थितियों से तनाव उत्पन्न होना, जैसे समय पर काम न कर पाना, चिंता की आदत।

  3. दीर्घकालिक स्ट्रेस (Chronic Stress):
    लम्बे समय तक चलने वाला तनाव, जो मानसिक और शारीरिक बीमारियों का कारण बन सकता है।

  4. शारीरिक स्ट्रेस (Physical Stress):
    नींद की कमी, बीमारियाँ, चोट या अत्यधिक परिश्रम से।

  5. मानसिक/भावनात्मक स्ट्रेस (Mental/Emotional Stress):
    व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक या व्यावसायिक संबंधों से उत्पन्न।

लक्षण:

लगातार चिंता या बेचैनी
चिड़चिड़ापन, मूड में उतार-चढ़ाव
सिरदर्द, माइग्रेन, गर्दन-कंधों में जकड़न
दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना
नींद में कमी या अधिक नींद आना
भूख में कमी या ज़्यादा खाना
पाचन संबंधी समस्या, एसिडिटी, गैस
एकाग्रता में कमी, निर्णय न ले पाना
अत्यधिक थकान या सुस्ती

कारण:

कार्य और समय का दबाव, प्रतिस्पर्धा
पारिवारिक झगड़े, रिश्तों में तनाव
आर्थिक असुरक्षा या समस्याएँ
नकारात्मक सोच और अधिक चिंता
डिजिटल और सोशल मीडिया का ओवरलोड
बीमारियाँ या हार्मोनल असंतुलन
अनियमित जीवनशैली, नींद की कमी, व्यायाम की कमी
अत्यधिक अपेक्षाएँ और परफेक्शन की आदत

बचाव:

नियमित जीवनशैली और पर्याप्त नींद रखना
समय का सही प्रबंधन और काम को प्राथमिकता देना
तनावपूर्ण परिस्थितियों में गहरी साँस व प्राणायाम करना
नियमित शारीरिक गतिविधि, टहलना, योग
सकारात्मक सोच व आत्मविश्वास विकसित करना
अपनी भावनाओं को परिवार/मित्रों से साझा करना
डिजिटल डिटॉक्स — मोबाइल, टीवी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग
प्रकृति में समय बिताना (बागवानी, खुली हवा में टहलना)

डाइट चार्ट (आहार):

हल्का, सात्विक, ताजा और पौष्टिक भोजन करें
दिन की शुरुआत गुनगुने जल व तुलसी/नींबू से करें
हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, दालें, अंकुरित अनाज शामिल करें
अखरोट, बादाम, अलसी के बीज जैसे हेल्दी फैट वाले ड्राई फ्रूट्स लें
हर्बल चाय (तुलसी, अश्वगंधा, कैमोमाइल) तनाव को कम करती है
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ
भोजन समय पर करें, देर रात भारी भोजन न लें

अपथ्य (परहेज़):

  • कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स से बचें
    तली-भुनी, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड न लें
    अधिक चीनी, नमक या जंक फूड न खाएं
    शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं
    देर रात तक मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का उपयोग न करें
    नकारात्मक समाचारों और बहसों में अति न करें

योगासन:

शवासन – शरीर व मन को पूर्ण विश्राम देने के लिए
सुखासन में ध्यान – मानसिक स्थिरता और एकाग्रता के लिए
बालासन – तनाव और चिंता कम करने में सहायक
भ्रमरी प्राणायाम – मस्तिष्क को शांत कर बेचैनी घटाता है
अनुलोम-विलोम – नाड़ी शुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए
मंडूकासन, मर्जरीआसन – शारीरिक व मानसिक तनाव दोनों में राहत

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मानसिक शक्ति और सहनशीलता बढ़ाती है
    स्मरणशक्ति और एकाग्रता बढ़ाती है, मन को शांत करती है
    मस्तिष्क को ठंडक और तनाव में आराम
    नींद को सुधारती है, मानसिक थकान दूर करती है
    प्रतिरोधक क्षमता व मानसिक शक्ति में वृद्धि
    गहरा मानसिक तनाव दूर होता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गोमूत्र के साथ पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला, अश्वगंधा, बाला, ब्राह्मी, गम्भारी, जटामांसी, केवंच बीज, मालकंगनी, मण्डूकपर्णी,  शंखपुष्पी, शतावरी, शिलाजीत, तगर, उष्ठेखादूस, वचा, विदंग जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |

1. आयुर्वेदिक ब्रैन्टोन सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रैन्टोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह-शाम एक गिलास गुनगुने गाय के दूध के साथ लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें।इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से घुमाएं उंगली को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी तरह रोजाना सुबह,दोपहर और शाम इसे दोहराएं ।ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में रखें या सीधे सूर्य की रोशनी में.


 

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तनाव - सपोर्ट किट 

 स्ट्रेस या तनाव एक ऐसी मानसिक-शारीरिक अवस्था है जब व्यक्ति पर परिस्थितियों, जिम्मेदारियों या भावनाओं का दबाव उसकी सहनशक्ति से अधिक हो जाता है। हल्का स्ट्रेस व्यक्ति को प्रेरित कर सकता है, परंतु लम्बे समय तक बना रहने वाला क्रॉनिक स्ट्रेस स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है — मानसिक, शारीरिक और सामाजिक तीनों स्तरों पर।

प्रकार:

  1. अल्पकालिक स्ट्रेस (Acute Stress):
    अचानक हुई घटना, चुनौती या दबाव से कुछ समय के लिए उत्पन्न होता है।

  2. आवर्तक अल्पकालिक स्ट्रेस (Episodic Acute Stress):
    बार-बार छोटी-छोटी परिस्थितियों से तनाव उत्पन्न होना, जैसे समय पर काम न कर पाना, चिंता की आदत।

  3. दीर्घकालिक स्ट्रेस (Chronic Stress):
    लम्बे समय तक चलने वाला तनाव, जो मानसिक और शारीरिक बीमारियों का कारण बन सकता है।

  4. शारीरिक स्ट्रेस (Physical Stress):
    नींद की कमी, बीमारियाँ, चोट या अत्यधिक परिश्रम से।

  5. मानसिक/भावनात्मक स्ट्रेस (Mental/Emotional Stress):
    व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक या व्यावसायिक संबंधों से उत्पन्न।

लक्षण:

लगातार चिंता या बेचैनी
चिड़चिड़ापन, मूड में उतार-चढ़ाव
सिरदर्द, माइग्रेन, गर्दन-कंधों में जकड़न
दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना
नींद में कमी या अधिक नींद आना
भूख में कमी या ज़्यादा खाना
पाचन संबंधी समस्या, एसिडिटी, गैस
एकाग्रता में कमी, निर्णय न ले पाना
अत्यधिक थकान या सुस्ती

कारण:

कार्य और समय का दबाव, प्रतिस्पर्धा
पारिवारिक झगड़े, रिश्तों में तनाव
आर्थिक असुरक्षा या समस्याएँ
नकारात्मक सोच और अधिक चिंता
डिजिटल और सोशल मीडिया का ओवरलोड
बीमारियाँ या हार्मोनल असंतुलन
अनियमित जीवनशैली, नींद की कमी, व्यायाम की कमी
अत्यधिक अपेक्षाएँ और परफेक्शन की आदत

बचाव:

नियमित जीवनशैली और पर्याप्त नींद रखना
समय का सही प्रबंधन और काम को प्राथमिकता देना
तनावपूर्ण परिस्थितियों में गहरी साँस व प्राणायाम करना
नियमित शारीरिक गतिविधि, टहलना, योग
सकारात्मक सोच व आत्मविश्वास विकसित करना
अपनी भावनाओं को परिवार/मित्रों से साझा करना
डिजिटल डिटॉक्स — मोबाइल, टीवी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग
प्रकृति में समय बिताना (बागवानी, खुली हवा में टहलना)

डाइट चार्ट (आहार):

हल्का, सात्विक, ताजा और पौष्टिक भोजन करें
दिन की शुरुआत गुनगुने जल व तुलसी/नींबू से करें
हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, दालें, अंकुरित अनाज शामिल करें
अखरोट, बादाम, अलसी के बीज जैसे हेल्दी फैट वाले ड्राई फ्रूट्स लें
हर्बल चाय (तुलसी, अश्वगंधा, कैमोमाइल) तनाव को कम करती है
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ
भोजन समय पर करें, देर रात भारी भोजन न लें

अपथ्य (परहेज़):

  • कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स से बचें
    तली-भुनी, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड न लें
    अधिक चीनी, नमक या जंक फूड न खाएं
    शराब, सिगरेट व नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं
    देर रात तक मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का उपयोग न करें
    नकारात्मक समाचारों और बहसों में अति न करें

योगासन:

शवासन – शरीर व मन को पूर्ण विश्राम देने के लिए
सुखासन में ध्यान – मानसिक स्थिरता और एकाग्रता के लिए
बालासन – तनाव और चिंता कम करने में सहायक
भ्रमरी प्राणायाम – मस्तिष्क को शांत कर बेचैनी घटाता है
अनुलोम-विलोम – नाड़ी शुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए
मंडूकासन, मर्जरीआसन – शारीरिक व मानसिक तनाव दोनों में राहत

आयुर्वेदिक जैंस काऊ यूरिन थेरेपी 

  • मानसिक शक्ति और सहनशीलता बढ़ाती है
    स्मरणशक्ति और एकाग्रता बढ़ाती है, मन को शांत करती है
    मस्तिष्क को ठंडक और तनाव में आराम
    नींद को सुधारती है, मानसिक थकान दूर करती है
    प्रतिरोधक क्षमता व मानसिक शक्ति में वृद्धि
    गहरा मानसिक तनाव दूर होता है

आयुर्वेदिक औषधियों के साथ संयोजन

गोमूत्र के साथ पुनर्नवा, आंवला, कालमेघ, भृंगराज, तुलसी, बहेड़ा, मुलेठी, नागरमोथा, पिप्पली, रोहितक, कुटकी, सौंठ, भुई आंवला, विडंग, गिलोय, काकमाची, काली मिर्च, चित्रक, मेंहदी, घृतकुमारी, जीरा, गोजला, अश्वगंधा, बाला, ब्राह्मी, गम्भारी, जटामांसी, केवंच बीज, मालकंगनी, मण्डूकपर्णी,  शंखपुष्पी, शतावरी, शिलाजीत, तगर, उष्ठेखादूस, वचा, विदंग जैसी औषधियों के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।

आवश्यक अन्य मेडिसिन के कांबीनेशन के साथ पथ्य-अपथ्य, योगासन के साथ रोग का  इलाज करें |

1. आयुर्वेदिक ब्रैन्टोन सिरप 6-6 चम्मच दिन में दो बार लें।

2. आयुर्वेदिक ब्रैन्टोन कैप्सूल 1-1 दिन में दो बार लें।

3. आयुर्वेदिक टोनर आधा-आधा चम्मच (2.5 मिली) सुबह-शाम एक गिलास गुनगुने गाय के दूध के साथ लें।

4. सोने से पहले सिर के नीचे तकिये का उपयोग किए बिना प्रत्येक नाक में आयुर्वेदिक टोनर नेज़ल की 2-2 बूंदें डालें।इसके अलावा नाभि क्षेत्र (नाभि) पर उपरोक्त तरल की 2 बूंदें डालें और अनामिका की मदद से घुमाएं उंगली को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में 3-4 बार घुमाएं। इसी तरह रोजाना सुबह,दोपहर और शाम इसे दोहराएं ।ठोस पदार्थ को पिघलाने के लिए बोतल को गर्म पानी में रखें या सीधे सूर्य की रोशनी में.


 

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